1 अगस्त 2026
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रामशिला पहाड़ी पर सीड बॉल अभियान: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने गया में पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया

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रामशिला पहाड़ी पर सीड बॉल अभियान: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने गया में पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया

सारांश

गयाजी की रामशिला पहाड़ी पर सीड बॉल अभियान महज एक वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं था — यह पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पुकार थी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के नेतृत्व में गया वन प्रमंडल ने 2026-27 में 24 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

मुख्य बातें

गया वन प्रमंडल ने 1 अगस्त 2026 को रामशिला पहाड़ी, गयाजी पर सीड बॉल रोपण कार्यक्रम आयोजित किया।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ.
प्रेम कुमार ने प्रत्येक नागरिक से वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लेने का आह्वान किया।
सीड बॉल में नीम, पीपल, बरगद, जामुन और शीशम जैसी देशी प्रजातियों के बीज उपयोग किए गए, जो मानसून में स्वतः अंकुरित होते हैं।
वर्ष 2026-27 में गया वन प्रमंडल क्षेत्र में 24 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित।
आगे गया की अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक पहाड़ियों पर भी इसी तरह के अभियान चलाए जाएंगे।

गयाजी की ऐतिहासिक रामशिला पहाड़ी पर 1 अगस्त 2026 को गया वन प्रमंडल ने 'सीड बॉल रोपण कार्यक्रम' आयोजित किया, जिसमें बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाए और उसके वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण केवल प्राकृतिक संसाधनों का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, हरित वन, उपजाऊ भूमि और जैव विविधता के संरक्षण के बिना सतत विकास संभव नहीं है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट और जैव विविधता के क्षरण को वैश्विक चुनौतियाँ बताते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।

सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ा पर्यावरण संरक्षण

डॉ. कुमार ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत में वृक्षों, नदियों, पर्वतों और जीव-जंतुओं को पूजनीय मानने की परंपरा रही है, जो आज भी समाज को पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा देती है। उन्होंने युवाओं से इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने की अपील की और जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, स्वच्छता तथा ऊर्जा संरक्षण को दैनिक जीवन का अंग बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहाँ जल संचयन, जैविक खेती और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में व्यापक प्रयास आवश्यक हैं।

सीड बॉल तकनीक क्यों है प्रभावी

गया वन प्रमंडल के अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में पारंपरिक पौधारोपण की तुलना में 'सीड बॉल' तकनीक अधिक प्रभावी सिद्ध हो रही है। मिट्टी, कंपोस्ट खाद और स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी प्रजातियों — नीम, पीपल, बरगद, जामुन और शीशम — के बीजों से तैयार ये सीड बॉल मानसून की वर्षा मिलते ही स्वतः अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं, जिससे प्राकृतिक हरियाली विकसित होती है।

लक्ष्य और आगे की योजना

वन प्रमंडल के अनुसार वर्ष 2026-27 में गया वन प्रमंडल क्षेत्र में लगभग 24 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आने वाले समय में गया की अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक पहाड़ियों पर भी इसी प्रकार के सीड बॉल रोपण एवं पौधारोपण अभियान चलाए जाएंगे।

कार्यक्रम में बेलागंज विधायक मनोरमा देवी, वन विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पर्यावरणविद, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की यह पहल आने वाले वर्षों में गया के हरित आवरण को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि इन पौधों की जीवित रहने की दर का स्वतंत्र सत्यापन कैसे होगा। बिहार में पिछले वर्षों के पौधारोपण अभियानों में लक्ष्य और वास्तविक उपलब्धि के बीच अक्सर बड़ा अंतर देखा गया है। 24 लाख पौधों का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब निगरानी तंत्र और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए — केवल कार्यक्रम आयोजन से हरियाली नहीं आती।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीड बॉल रोपण तकनीक क्या है और यह पारंपरिक पौधारोपण से कैसे अलग है?
सीड बॉल मिट्टी, कंपोस्ट खाद और देशी प्रजातियों के बीजों से तैयार की जाती हैं, जो मानसून की वर्षा मिलते ही स्वतः अंकुरित होती हैं। यह तकनीक पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में पारंपरिक पौधारोपण की तुलना में अधिक प्रभावी मानी जाती है, क्योंकि इसमें रोपण के बाद अलग से सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती।
गया वन प्रमंडल का 2026-27 में पौधारोपण का लक्ष्य क्या है?
गया वन प्रमंडल ने वर्ष 2026-27 में अपने क्षेत्र में लगभग 24 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा गया की अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक पहाड़ियों पर भी सीड बॉल रोपण अभियान चलाने की योजना है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने इस अभियान में क्या संदेश दिया?
डॉ. प्रेम कुमार ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाना चाहिए और उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना चाहिए। उन्होंने युवाओं से जल संरक्षण, प्लास्टिक में कमी और ऊर्जा संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की भी अपील की।
रामशिला पहाड़ी पर सीड बॉल अभियान में कौन-सी प्रजातियों के बीज उपयोग किए गए?
इस अभियान में स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी प्रजातियों — नीम, पीपल, बरगद, जामुन और शीशम — के बीजों से सीड बॉल तैयार की गईं। ये प्रजातियाँ पर्यावरण के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करती हैं।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए?
कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार मुख्य अतिथि थे। इसके अलावा बेलागंज विधायक मनोरमा देवी, वन विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पर्यावरणविद, कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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