रांची में 'बिहार आई बैंक ट्रस्ट' बनेगा 'झारखंड आई बैंक', राज्यपाल गंगवार ने दिया नाम बदलने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में वर्षों से 'बिहार आई बैंक ट्रस्ट' के नाम से संचालित संस्थान का नाम अब बदलकर 'झारखंड आई बैंक' किया जाएगा। 12 मई 2026 को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का औपचारिक निर्देश दिया। झारखंड राज्य के गठन के करीब ढाई दशक बाद भी यह संस्थान पुराने नाम से ही चल रहा था, जिसे अब एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में क्या हुए निर्णय
लोकभवन में आयोजित आई बैंक ट्रस्ट के कार्यों की समीक्षा बैठक में राज्यपाल गंगवार ने कहा कि इस संस्थान को राज्य में एक उत्कृष्ट और विश्वसनीय नेत्र चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिल सके। बैठक में डॉ. टीपी बर्णवाल को ट्रस्टी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया, जबकि अजय जैन का संयुक्त सचिव पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
सीएसआर फंड और आधुनिक सुविधाओं पर जोर
राज्यपाल ने ट्रस्ट को एक ऐसा सेवा और कार्य मॉडल विकसित करने का निर्देश दिया, जिससे कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड अधिक मात्रा में प्राप्त हो सके। उन्होंने विशेष रूप से एडवांस आई केयर सुविधाओं के विकास पर बल दिया, ताकि आधुनिक और उन्नत नेत्र चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा सके। ट्रस्ट से जुड़ी भूमि संबंधी समस्याओं के शीघ्र समाधान पर भी जोर दिया गया।
आयुष्मान भारत से जोड़ने का निर्देश
बैठक में राज्यपाल ने ट्रस्ट को जल्द से जल्द आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने का निर्देश दिया। उनका कहना था कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल के सुचारु संचालन के लिए एक दक्ष और समर्पित अस्पताल प्रबंधक या प्रशासक की नियुक्ति पर भी जोर दिया गया।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी, स्वास्थ्य विभाग के विकास आयुक्त-सह-अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार, राज्यपाल सचिवालय के विशेष सचिव ए.के. सत्यजीत तथा ट्रस्ट की सचिव डॉ. प्रणंति सिन्हा समेत अन्य ट्रस्टी उपस्थित थे।
आगे क्या होगा
नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही संस्थान को झारखंड की पहचान के अनुरूप एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आयुष्मान भारत से जुड़ाव, सीएसआर फंड की बढ़ोतरी और एडवांस आई केयर सुविधाओं के विस्तार से यह संस्थान राज्य के नेत्र चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।