रांची के दुर्गा पूजा पंडालों में मोदी की द्वारका यात्रा और लालू परिवार की आदमकद प्रतिमाएं
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में इस वर्ष दुर्गा पूजा 2026 के आयोजन एक अनूठा रंग लिए हुए हैं — कुछ पंडालों में पारंपरिक धार्मिक दृश्यों के साथ-साथ समकालीन राजनीतिक हस्तियों की प्रतिमाएं और तस्वीरें भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्वारका यात्रा की तस्वीरें प्रदर्शित हैं, तो कहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की आदमकद मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
द्वारका थीम वाला चंद्रशेखर आज़ाद पंडाल
रांची के मेन रोड पर अल्बर्ट एक्का चौक और सर्जना चौक के बीच स्थित चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति ने इस बार गुजरात के प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर और द्वारका नगरी की थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया है। इस पंडाल की सजावट में भगवान श्रीकृष्ण की नगरी से जुड़े धार्मिक एवं ऐतिहासिक प्रसंगों को जीवंत रूप दिया गया है।
पंडाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें भी प्रमुखता से लगाई गई हैं। ये तस्वीरें फरवरी 2024 में उनकी गुजरात यात्रा के दौरान समुद्र में स्कूबा डाइविंग कर प्राचीन जलमग्न द्वारका के दर्शन करने और वहां प्रार्थना करने के ऐतिहासिक क्षणों को दर्शाती हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था और समसामयिक घटनाओं को एक साथ प्रस्तुत करने का प्रयास है।
नामकुम पंडाल में लालू परिवार की आदमकद प्रतिमाएं
नामकुम रेलवे स्टेशन के निकट जय माता दी नवयुवक दुर्गा पूजा समिति ने जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल की तर्ज पर पंडाल का निर्माण किया है। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ ही लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव की आदमकद मिट्टी की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।
इसके अलावा, झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की प्रतिमा भी इस पंडाल में लगाई गई है। समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह यादव के अनुसार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की प्रतिमाओं को नवरात्र का व्रत रखते हुए दर्शाया गया है, जो उनकी धार्मिक आस्था को प्रतिबिंबित करता है।
राम-लक्ष्मण की तरह भाईचारे का संदेश
तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव की प्रतिमाओं के माध्यम से परिवार में परस्पर प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया गया है। इस संदेश को और प्रभावी बनाने के लिए भगवान राम और लक्ष्मण के पवित्र भ्रातृ संबंधों का उदाहरण भी सामने रखा गया है।
धर्म और राजनीति का अनूठा संगम
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हैं और त्योहारी मौसम में सामाजिक संदेश देने की परंपरा पंडाल समितियों में पहले से रही है। गौरतलब है कि दुर्गा पूजा पंडालों में सामाजिक-राजनीतिक थीम का चलन पूर्वी भारत में वर्षों से देखा जाता रहा है, जहां कोलकाता से लेकर पटना तक पंडाल समितियाँ समसामयिक विषयों पर कलात्मक टिप्पणी करती आई हैं।
रांची के इन पंडालों ने धार्मिक उत्सव को एक सांस्कृतिक मंच के रूप में इस्तेमाल करते हुए क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक भावनाओं को अभिव्यक्ति दी है। आने वाले दिनों में यह पंडाल स्थानीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहने की उम्मीद है।