जमशेदपुर में दुर्गा पूजा 2026: 500 पंडालों में उमड़े श्रद्धालु, 110 साल पुरानी परंपरा की धूम
सारांश
मुख्य बातें
जमशेदपुर में 16 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा का उत्सव पूरे जोश और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। लौहनगरी के करीब 500 पंडालों में मां दुर्गा के पट खुलते ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, और ढाक की थाप, शंख की ध्वनि और जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय हो गया है।
प्रमुख पूजा समितियाँ और पंडाल
शहर की कई प्रतिष्ठित पूजा समितियाँ इस वर्ष भव्य आयोजन कर रही हैं। इनमें हिंदी क्लब, रानीकुदर, श्री श्री रंकणी मंदिर, श्री उत्कल दुर्गा पूजा कमेटी, एग्रिको पूजा कमेटी और टूइलाडुंगरी पूजा कमेटी प्रमुख हैं। पंडालों में विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं और सजावट को लेकर सभी समितियों के बीच विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
श्रद्धालुओं की भागीदारी और उत्सव का माहौल
पंडाल केवल दर्शन का स्थान नहीं रहे — परिवार और मित्रों के साथ उत्सव मनाने का केंद्र भी बन गए हैं। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां की आराधना में लीन हैं। सभी पूजा समितियाँ भक्तों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रख रही हैं।
110 साल से अधिक पुरानी परंपरा
गौरतलब है कि जमशेदपुर में सार्वजनिक रूप से पंडाल बनाकर दुर्गा पूजा मनाने का इतिहास 110 वर्षों से भी अधिक पुराना है। शहर का सबसे पहला दुर्गा पूजा पंडाल कालीमाटी रेलवे स्टेशन के निकट बनाया गया था, जिसे आज टाटानगर स्टेशन के नाम से जाना जाता है। यह तथ्य जमशेदपुर की सांस्कृतिक पहचान में दुर्गा पूजा की गहरी जड़ें दर्शाता है।
रांची में सुरक्षा व्यवस्था
यह ऐसे समय में है जब 15 अक्टूबर 2026 को झारखंड की राजधानी रांची में पुलिस ने पूजा पंडालों, संवेदनशील इलाकों और विसर्जन मार्गों का निरीक्षण करते हुए प्रमुख मार्गों पर फ्लैग मार्च निकाला था। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर यह मार्च फिरायालाल चौक से शुरू होकर मेन रोड होते हुए सुजाता चौक तक पहुँचा। ड्रोन के ज़रिए भी महत्वपूर्ण स्थानों की निगरानी की गई।
आगे का उत्सव
दुर्गा पूजा के शेष दिनों में जमशेदपुर में आयोजनों की रंगत और बढ़ने की उम्मीद है। विसर्जन जुलूस के मद्देनज़र प्रशासन की तैयारियाँ पहले से ही सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि उत्सव सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।