बिहार दुर्गा पूजा 2026: मुंगेर में 250 फीट का पेट्रोनास टावर पंडाल, कटिहार में विशालकाय कॉकरोच थीम
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में शारदीय नवरात्र 2026 के अवसर पर दुर्गोत्सव का उत्साह चरम पर है। महासप्तमी के दिन पंडालों के पट खुलते ही पटना से लेकर मुंगेर और कटिहार तक लाखों श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। इस वर्ष के पंडाल केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं — ये कला, वास्तुकला, सामाजिक संदेश और रचनात्मक कल्पनाशीलता का अद्भुत संगम बन गए हैं।
मुंगेर में पेट्रोनास ट्विन टावर की भव्य अनुकृति
मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड के कल्याणपुर में 'बड़ी दुर्गा महारानी का दरबार' इस बार सबसे अधिक चर्चा में है। यहाँ मलेशिया के विश्वप्रसिद्ध पेट्रोनास ट्विन टावर की तर्ज पर करीब 250 फीट ऊंचा पंडाल खड़ा किया गया है। हजारों बांसों और दर्जनों कुशल कारीगरों की कड़ी मेहनत से निर्मित यह संरचना देखने वालों को अचंभित कर रही है।
इस विशाल ढाँचे को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और उत्सुक दर्शक कल्याणपुर पहुँच रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, इस पंडाल का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना है।
कटिहार में कॉकरोच थीम — आयोजकों ने राजनीतिक संबंध से किया इनकार
कटिहार जिले के विनोदपुर में बने दुर्गा पूजा पंडाल ने अपनी अनोखी थीम से जिज्ञासा जगा दी है। यहाँ विशालकाय कॉकरोच और मकड़ी के जालों जैसी सजावट के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है।
गौरतलब है कि देश की राजनीति में 'कॉकरोच पार्टी' को लेकर हाल में चर्चाएँ रही हैं, जिसके चलते इस पंडाल को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की व्याख्याएँ हो रही हैं। हालाँकि, आयोजकों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस थीम का किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिक टिप्पणी से कोई संबंध नहीं है। उनके अनुसार, यह पूरी तरह एक काल्पनिक अवधारणा है, जिसे उत्सव में आने वाले लोगों और बच्चों के मनोरंजन के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
पटना के पंडालों में कला और सामाजिक सरोकारों का संगम
राजधानी पटना के डाकबंगला चौराहे पर मध्य प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध खजुराहो मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित करीब 80 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया गया है। यह संरचना श्रद्धालुओं को भारत की समृद्ध धार्मिक विरासत और शिल्पकला की जीवंत झलक दे रही है।
बोरिंग रोड स्थित जमुना गली के कस्तूरबा पथ पर श्री श्री सर्वजन दुर्गा पूजा समिति ने इस बार फरक्का बराज की भव्य प्रतिकृति बनाई है। करीब 55 फीट ऊंचे और 55 फीट चौड़े इस पंडाल की थीम बिहार में बाढ़, सुखाड़, नदी कटाव और किसानों की समस्याओं जैसे ज्वलंत मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करती है। इस प्रकार यह पंडाल पूजा-स्थल के साथ-साथ जल संसाधनों और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर संवाद का माध्यम भी बन गया है।
बोरिंग कैनाल रोड स्थित हिमगिरी चौराहे के पास शिवलिंग के आकार का विशाल पंडाल एक और आकर्षण है। करीब 100 फीट ऊंचे और 150 मीटर लंबे इस पंडाल को लगभग 20 हजार घंटियों से सजाया जा रहा है। इसमें मां दुर्गा की 16 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है और पंडाल तक पहुँचने वाले करीब 450 फीट लंबे मार्ग को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है।
परंपरा और रचनात्मकता का नया अध्याय
बिहार में इस वर्ष के दुर्गा पूजा पंडाल यह साबित कर रहे हैं कि धार्मिक उत्सव अब परंपरा की सीमाओं से परे जाकर कला, वास्तुकला और सामाजिक संदेश को भी आत्मसात कर रहा है। पटना से कटिहार और मुंगेर तक फैली यह रचनात्मकता सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा बटोर रही है।
महासप्तमी के बाद महाअष्टमी और महानवमी पर श्रद्धालुओं की भीड़ और अधिक बढ़ने की संभावना है। इन पंडालों की विशिष्टता इस दुर्गोत्सव को केवल धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि एक यादगार सांस्कृतिक उत्सव बना रही है।