त्रिपुरा दुर्गा पूजा 2026: 'वाट अरुण' मंदिर की प्रतिकृति, 20 लाख सीपियों से होगी अनूठी सजावट
सारांश
मुख्य बातें
अगरतला के फ्लावर्स क्लब ने इस वर्ष की दुर्गा पूजा के लिए एक अनूठी थीम चुनी है — थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक स्थित विश्वप्रसिद्ध 'वाट अरुण' (Wat Arun) सूर्य मंदिर की भव्य प्रतिकृति। पंडाल को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील तरीके से तैयार किया जा रहा है, जिसमें प्लास्टिक या थर्मोकोल का कोई उपयोग नहीं होगा और 20 लाख से अधिक सीपियों से सजावट की जाएगी।
थीम और पंडाल की खास बात
फ्लावर्स क्लब के प्रवक्ता किसलय मोदक ने बताया कि इस साल पंडाल की थीम बैंकॉक का सूर्य मंदिर 'वाट अरुण' है और क्लब इसकी एक यथार्थवादी प्रतिकृति तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारा इस साल का लक्ष्य है कि प्लास्टिक या थर्मोकोल का इस्तेमाल न किया जाए और इसके बजाय सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों और दोबारा इस्तेमाल होने वाली चीजों का ही उपयोग किया जाए।'
यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में त्योहारी आयोजनों में पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अपनाने का चलन बढ़ रहा है। ओडिशा से विशेष रूप से मंगाई गई 20 लाख से अधिक सीपियाँ पंडाल की सजावट का केंद्रीय आकर्षण बनेंगी।
निर्माण कार्य और कारीगर
मोदक के अनुसार, पश्चिम बंगाल के करीब 30 कुशल कारीगर इस पंडाल के निर्माण में दिन-रात जुटे हुए हैं। पंडाल निर्माण में केवल प्राकृतिक और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का उपयोग हो रहा है, जो इसे पारंपरिक पंडालों से अलग बनाता है। गौरतलब है कि 'वाट अरुण' मंदिर अपनी विशिष्ट शिखर शैली और सीपियों की सजावट के लिए ही दुनियाभर में जाना जाता है, जिसे अगरतला के इस पंडाल में सजीव रूप में उतारने का प्रयास किया जा रहा है।
आगंतुकों के लिए आकर्षण
थीम आधारित पंडाल और दुर्गा प्रतिमा के अलावा, दर्शकों के लिए विशेष लेजर शो का भी आयोजन किया जाएगा। मोदक ने बताया कि हर साल हजारों लोग उनकी दुर्गा पूजा देखने आते हैं और इस बार लेजर शो की वजह से और भी अधिक भीड़ जुटने की उम्मीद है।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
आयोजकों ने बड़ी संख्या में आगंतुकों को देखते हुए व्यापक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की है। क्लब के स्वयंसेवकों के साथ-साथ निजी सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहेंगे। बुजुर्गों के लिए अलग प्रवेश द्वार और विश्राम की सुविधाएँ भी सुनिश्चित की गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग का व्यक्ति उत्सव का आनंद ले सके।
यह आयोजन त्रिपुरा की सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मकता का प्रमाण है, जो धार्मिक उत्सव को वैश्विक स्थापत्य कला से जोड़ने का साहसी प्रयास करता है।