बिलासपुर में अनोखा दुर्गा पंडाल: कॉपी-किताब और पेन से सजावट, विसर्जन के बाद बच्चों में बंटेगा स्टेशनरी सामान
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के मसानगंज इलाके में इस वर्ष दुर्गा पूजा पंडाल एक अनूठी थीम के साथ श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहा है। स्थानीय दुर्गा पूजा समिति ने पंडाल को कॉपी, किताब, पेन, पेंसिल और स्कूल बैग जैसी स्टेशनरी सामग्री से सजाया है, और मूर्ति विसर्जन के बाद यह सारा सामान आसपास के बच्चों में बाँट दिया जाएगा ताकि उनकी पढ़ाई में मदद मिल सके। 18 अक्टूबर 2026 को इस पहल की व्यापक सराहना हो रही है।
स्टेशनरी वर्ल्ड की थीम
मसानगंज की इस दुर्गा पूजा समिति ने इस साल 'स्टेशनरी वर्ल्ड' थीम चुनी है। पंडाल की दीवारों से लेकर माता रानी के श्रृंगार तक — हर जगह स्टेशनरी आइटम का रचनात्मक उपयोग किया गया है। समिति के एक कार्यकर्ता ने बताया, 'हमारी समिति 58 सालों से यहाँ मूर्ति स्थापना कर रही है। इस साल काफी अनोखा पंडाल बनाया गया है। इसे समिति के सभी सदस्यों द्वारा सजाया गया है। इसमें स्टेशनरी का सारा सामान लगाया गया है।'
विसर्जन के बाद बच्चों में बंटेगा सामान
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि पंडाल की सजावट में लगा स्टेशनरी सामान केवल प्रदर्शन के लिए नहीं है। समिति के एक अन्य सदस्य ने बताया, 'इस स्टेशनरी वर्ल्ड की थीम में जितना भी स्टेशनरी का सामान उपयोग हुआ है, उसे विसर्जन के दिन अलग-अलग जगहों के बच्चों को बाँट दिया जाएगा।' यह पहल उन बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी जो आर्थिक कारणों से स्कूली सामग्री नहीं खरीद पाते।
भक्तों और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
पंडाल देखने आए एक भक्त ने कहा, 'हर साल अलग-अलग थीम होती है, इस बार स्टेशनरी वर्ल्ड की थीम है और माता रानी का श्रृंगार भी इस बार स्टेशनरी आइटम से किया गया है। इसे बनाना बहुत कठिन होता है, पर जो कारीगर हैं, उन्होंने बड़ी ही सुंदरता से माता रानी का शृंगार किया है।' उन्होंने आगे कहा, 'स्टेशनरी में बच्चों का भविष्य होता है, उसी से जुड़ा हुआ यह माता रानी का आशीर्वाद है।'
58 साल पुरानी परंपरा में नया संदेश
जहाँ आमतौर पर दुर्गा पूजा पंडाल फूलों, रंगीन रोशनी और पारंपरिक सजावट से सजे होते हैं, वहीं मसानगंज का यह पंडाल भक्ति के साथ-साथ शिक्षा का संदेश दे रहा है। गौरतलब है कि 58 वर्षों की लंबी परंपरा वाली इस समिति ने हर वर्ष नवाचार का प्रयास किया है। इस बार की थीम न केवल धार्मिक आस्था को, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी को भी उजागर करती है। आने वाले दिनों में विसर्जन की तिथि पर स्थानीय बच्चों को यह स्टेशनरी सामग्री वितरित की जाएगी।