रांची IIIT छात्र आदित्य कुमार की मौत पर NHRC सख्त, प्रियांक कानूनगो ने कहा — सभी जिम्मेदारों को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रांची के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की मौत के मामले में 11 अक्टूबर 2026 को संज्ञान लिया। आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने स्पष्ट किया कि शिकायत के आधार पर सभी संबंधित जाँच एजेंसियों और जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब छात्रों ने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस देर से आने के कारण आदित्य को समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया जा सका।
मुख्य घटनाक्रम
बिहार के पूर्णिया निवासी आदित्य कुमार शनिवार की रात रांची के खेलगांव स्थित IIIT के हॉस्टल के अपने कमरे में फंदे से लटके हुए मिले थे। साथी छात्रों ने उन्हें फंदे से नीचे उतारा, लेकिन कथित तौर पर एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुँची और अस्पताल पहुँचने में विलंब हो गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आदित्य ने अगस्त 2026 में संस्थान में प्रवेश लिया था और इन दिनों उनकी मिड-सेमेस्टर परीक्षाएँ चल रही थीं।
NHRC की प्रतिक्रिया
NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने कहा, 'हमें जानकारी मिली है कि रांची के IIIT संस्थान में एक छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या की है। शिकायतकर्ता के अनुसार फर्स्ट ईयर के छात्र को उसके सहपाठियों ने फंदे से उतारा, लेकिन एम्बुलेंस देर से आने के कारण उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया जा सका।' उन्होंने आगे कहा कि आयोग यह भी पता लगाएगा कि छात्र ने यह कदम क्यों उठाया, एम्बुलेंस की देरी के कारण क्या थे और ऐसी स्थिति कैसे बनी।
छात्रों का प्रदर्शन और माँगें
इस घटना के बाद रविवार को संस्थान के छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित विद्यार्थियों ने हॉस्टल की बुनियादी सुविधाओं में सुधार और संस्थान के निदेशक राजीव श्रीवास्तव के इस्तीफे की माँग की। प्रदर्शनकारियों ने खेलगांव-टाटीसिलवे मार्ग को जाम कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। निदेशक राजीव श्रीवास्तव स्वयं छात्रों से संवाद करने पहुँचे, लेकिन इससे आक्रोश और बढ़ गया।
पुलिस जाँच की स्थिति
रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन ने बताया कि मौत की प्रारंभिक जाँच जारी है। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा चुकी है और छात्र के रूममेट का बयान भी दर्ज किया गया है। SSP ने परीक्षा से जुड़े दबाव को प्रारंभिक आशंका के रूप में रेखांकित किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि छात्र की मौत की जाँच और हॉस्टल की माँगों को लेकर हो रहे प्रदर्शन को दो अलग-अलग मामलों के रूप में देखा जा रहा है। मौके पर सदर DSP संजीव कुमार बेसरा और खेलगांव थाना प्रभारी भी मौजूद रहे।
आगे क्या होगा
NHRC की नोटिस प्रक्रिया शुरू होने से यह मामला अब केवल संस्थान की आंतरिक जाँच तक सीमित नहीं रहा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के तकनीकी संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत और हॉस्टल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। NHRC की जाँच के नतीजे न केवल इस मामले में बल्कि भविष्य की संस्थागत जवाबदेही के लिए भी मिसाल बन सकते हैं।