रिम्स रांची का ₹466 करोड़ से कायाकल्प: MBBS-PG सीटें बढ़ेंगी, 10 नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग खुलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची के व्यापक पुनर्विकास के लिए ₹466 करोड़ की योजना को मंजूरी मिल गई है। 15 अक्टूबर 2026 को संस्थान की गवर्निंग बॉडी की 66वीं बैठक में कुल 16 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें सीटों में वृद्धि, फैकल्टी पुनर्गठन, नए विभाग और अस्पताल सुविधाओं का विस्तार शामिल है। यह निर्णय झारखंड की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
स्वास्थ्य विभाग के सचिव के अनुसार, रिम्स में वर्ष 2002 के बाद पहली बार फैकल्टी और विभागों की संरचना का व्यापक पुनर्गठन किया जा रहा है। मौजूदा 319 स्वीकृत पदों के पुनर्गठन के साथ 16 नए पद सृजित होंगे, जिससे फैकल्टी पदों की कुल संख्या 335 हो जाएगी।
प्रस्ताव के तहत एमबीबीएस की सीटें बढ़ाकर 250 और पीजी की सीटों में 100 की वृद्धि की जाएगी। सुपर स्पेशियलिटी सीटें मौजूदा 11 से बढ़ाकर 150 की जाएंगी और इसके लिए 10 नए विभाग खोले जाएंगे।
₹466 करोड़ की पुनर्विकास योजना में क्या शामिल है
परिसर पुनर्विकास के तहत ₹466 करोड़ की अनुमानित लागत से अस्पताल भवन, शैक्षणिक इमारतों और आवासीय परिसरों का नवीनीकरण तथा एक नए शैक्षणिक भवन का निर्माण होगा। परियोजना को केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत नए हॉस्टल बनाने की योजना है। पुराने डीआईजी ग्राउंड में स्टेडियम के साथ हॉस्टल निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया है।
अस्पताल सुविधाओं और प्रशासन में बदलाव
सुविधाओं के विस्तार के अंतर्गत वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाकर 25 करने, अल्ट्रासाउंड मशीनें बढ़ाने और बर्न वार्ड को उन्नत बनाने की योजना है। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की सहायता के लिए 100 आयुष्मान मित्र नियुक्त किए जाएंगे।
प्रशासनिक सुधारों के तहत रेगुलेशन-2014 की जगह रेगुलेशन-2026 तैयार किया जा रहा है। स्थायी समितियों की संख्या 5 से बढ़ाकर 10 की जाएगी और मेडिकल सुपरिटेंडेंट के अधीन डिप्टी सुपरिटेंडेंट के पदों की व्यवस्था भी होगी। डॉक्टरों के प्रमोशन में अब शोध के साथ-साथ क्लिनिकल सेवाओं और मेडिकल विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में योगदान को भी महत्व दिया जाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और निर्देश
बैठक की अध्यक्षता करते हुए झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लिए गए सभी फैसलों को अगली बैठक तक लागू करने की दिशा में ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कैंसर की महंगी दवाओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी एसएएफ (SAF) को सौंपी जाएगी और होमगार्ड जवानों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। स्थायी निदेशक की नियुक्ति होने तक डीके सिंह संस्थान की जिम्मेदारी संभालेंगे और उनके कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा।
क्या होगा आगे — चुनौतियाँ और अगले कदम
गौरतलब है कि बैठक में यह भी सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के करीब ₹240 करोड़ खर्च नहीं हो सके हैं। यह ऐसे समय में चिंताजनक है जब संस्थान एक बड़े विस्तार की ओर बढ़ रहा है। प्रस्तावित योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना और उपलब्ध राशि का प्रभावी उपयोग संस्थान के सामने सबसे अहम चुनौती होगी। यदि क्रियान्वयन में देरी हुई, तो यह झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के इस महत्वाकांक्षी प्रयास को कमज़ोर कर सकता है।