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बांकीपुर उपचुनाव हार के बाद आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने माँगा संगठन में बड़ा बदलाव, तेजस्वी के करीबियों पर उठाए सवाल

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बांकीपुर उपचुनाव हार के बाद आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने माँगा संगठन में बड़ा बदलाव, तेजस्वी के करीबियों पर उठाए सवाल

सारांश

बांकीपुर उपचुनाव में हार ने आरजेडी के भीतर आत्ममंथन की आग सुलगा दी है। विधायक भाई वीरेंद्र ने तेजस्वी यादव के करीबियों को हटाने और संगठन को जमीन से फिर खड़ा करने की माँग की — यह बयान बिहार में अगले चुनाव से पहले पार्टी की रणनीतिक उथल-पुथल का संकेत है।

मुख्य बातें

आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने 4 अगस्त को बांकीपुर उपचुनाव हार के बाद पार्टी में बड़े संगठनात्मक बदलाव की माँग की।
उन्होंने तेजस्वी यादव के निकट घेरे में मौजूद कुछ 'अलोकप्रिय' नेताओं को हटाने की अपील की।
उनके अनुसार आरजेडी के परंपरागत मतदाताओं ने प्रशांत किशोर को BJP को हराने में सक्षम विकल्प मानकर वोट दिया।
भाई वीरेंद्र ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर होने का आरोप लगाया।
उन्होंने पार्टी की संगठनात्मक संरचना और चुनावी रणनीति दोनों की व्यापक समीक्षा की माँग की।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद्र ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद संगठन की जड़ों तक समीक्षा की माँग की है। 4 अगस्त को पटना में दिए बयान में उन्होंने कहा कि पार्टी को सिरे से खड़ा करना होगा और जमीनी मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा।

तेजस्वी के करीबियों पर निशाना

भाई वीरेंद्र ने खुलकर कहा कि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के निकट घेरे में मौजूद कुछ नेताओं को हटाया जाना चाहिए। उनके अनुसार ये नेता जनता के बीच गहरी अलोकप्रियता के शिकार हो चुके हैं और लोग उनके बारे में असंसदीय भाषा तक का प्रयोग करते हैं।

उन्होंने कहा, 'तेजस्वी यादव के आसपास कुछ लोग हैं जिन्हें हटाने की जरूरत है। जनता उनसे नाराज है और उनके खिलाफ असंसदीय भाषा का भी इस्तेमाल करती है। हमें पार्टी को फिर से सिरे से बनाना होगा, लोगों के बीच जाना होगा और उनसे जुड़ना होगा। हम मानते हैं कि हमारी तरफ से बड़ी गलती हुई है।'

बांकीपुर नतीजे की वीरेंद्र की व्याख्या

भाई वीरेंद्र ने बांकीपुर के चुनावी नतीजे को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रति जनता की नाराजगी का प्रतिबिंब बताया। उनका तर्क है कि आरजेडी के परंपरागत मतदाताओं के एक हिस्से ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को वोट दिया, क्योंकि वे उन्हें इस सीट पर BJP को हराने में सक्षम सबसे मजबूत विकल्प मानते थे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मतदान पैटर्न को केवल आरजेडी की अस्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बजाय इसके, पार्टी को यह समझना होगा कि उसके पारंपरिक समर्थकों को किसी अन्य उम्मीदवार की ओर रुख करने के लिए क्या मजबूर किया।

संगठनात्मक ढाँचे की व्यापक समीक्षा की माँग

विधायक ने पार्टी की संगठनात्मक संरचना और चुनावी रणनीति दोनों की गहन पड़ताल की माँग की। उन्होंने कहा, 'पार्टी ने कुछ लोगों पर भरोसा जताया था, लेकिन उनमें से कुछ उस भरोसे पर खरे नहीं उतरे। इसलिए उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए।'

उन्होंने यह भी कहा कि सक्षम, प्रतिबद्ध और मेहनती नेताओं को संगठन की मुख्यधारा में लाकर शीर्ष नेतृत्व के करीब रखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं।

नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप

भाई वीरेंद्र ने उन जनता दल (यूनाइटेड) नेताओं के तर्क को सिरे से खारिज किया जो कह रहे थे कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सक्रिय रूप से प्रचार किया होता तो BJP बांकीपुर में हार से बच सकती थी। उनके अनुसार नीतीश कुमार की राजनीतिक साझेदारी ने राज्य में BJP के विस्तार को आसान बनाया है।

इससे भी आगे जाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान बिहार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर था। यह बयान राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।

आगे क्या होगा

भाई वीरेंद्र के बयान से स्पष्ट है कि बांकीपुर की हार के बाद आरजेडी के भीतर संगठन, नेतृत्व और रणनीति को लेकर आंतरिक बहस तेज होगी। आंतरिक समीक्षा की उनकी माँग पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भविष्य के चुनावी मुकाबलों से पहले अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ा सकती है। यह देखना अहम होगा कि तेजस्वी यादव इस आंतरिक आवाज पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या पार्टी नेतृत्व आंतरिक आलोचना को संगठनात्मक सुधार में बदल पाएगा या इसे दबाकर अगले चुनाव में एक और झटका झेलेगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाई वीरेंद्र ने बांकीपुर उपचुनाव हार के बाद क्या माँग की?
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने पार्टी के संगठन की जड़ों तक समीक्षा और तेजस्वी यादव के करीबी कुछ अलोकप्रिय नेताओं को हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि पार्टी को सिरे से खड़ा करना होगा और जमीनी मतदाताओं से सीधा जुड़ाव बनाना होगा।
बांकीपुर उपचुनाव में आरजेडी के वोट क्यों कटे?
भाई वीरेंद्र के अनुसार आरजेडी के परंपरागत समर्थकों ने जन सुराज के प्रशांत किशोर को वोट दिया, क्योंकि वे उन्हें BJP को हराने में सक्षम सबसे मजबूत उम्मीदवार मानते थे। उन्होंने कहा कि इस वोट शिफ्ट को सिर्फ आरजेडी की अस्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान बिहार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर था। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार की राजनीतिक साझेदारी ने राज्य में BJP के विस्तार को आसान बनाया।
क्या आरजेडी में तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं?
भाई वीरेंद्र के बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर तेजस्वी यादव के निकट घेरे की कार्यशैली को लेकर असंतोष है। हालाँकि उन्होंने तेजस्वी के नेतृत्व पर सीधे सवाल नहीं उठाए, बल्कि उनके करीबियों को हटाने की माँग की।
बांकीपुर उपचुनाव का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
इस हार और उसके बाद उठी आंतरिक आवाजों से आरजेडी पर अगले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी रणनीति और संगठन को नए सिरे से तैयार करने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी विपक्षी वोट बैंक में एक नई चुनौती के रूप में उभरती दिख रही है।
राष्ट्र प्रेस
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