15 अक्टूबर 2026
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नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा: रोहिणी हट्टंगडी बोलीं — 'स्टारडम कभी सिर पर नहीं चढ़ा'

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नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा: रोहिणी हट्टंगडी बोलीं — 'स्टारडम कभी सिर पर नहीं चढ़ा'

सारांश

नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा में रोहिणी हट्टंगडी ने कहा कि स्टारडम कभी उनके सिर पर नहीं चढ़ा — यही उन्हें भीड़ से अलग करता था। वर्षा उसगांवकर ने 'तिरंगा' में उनके साथ काम करने को अपनी खुशकिस्मती बताया और कहा कि समय पर सही इलाज मिलता तो शायद 75 साल में वे जाते नहीं।

मुख्य बातें

नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित हुई।
रोहिणी हट्टंगडी ने कहा कि नाना पाटेकर पर स्टारडम कभी हावी नहीं हुआ और उनकी समाज सेवा सर्वविदित है।
हट्टंगडी को नाना पाटेकर की फिल्म 'थोड़ा सा रुमानी हो जाए' सबसे पसंद है।
वर्षा उसगांवकर ने कहा कि समय पर सही इलाज मिलता तो शायद 75 वर्षीय नाना पाटेकर को बचाया जा सकता था।
उसगांवकर ने फिल्म 'तिरंगा' में नाना पाटेकर के साथ काम करने का अवसर मिलना अपनी खुशकिस्मती बताया।

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा बुधवार, 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित की गई, जिसमें मनोरंजन जगत की कई著名 हस्तियों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। अभिनेत्री रोहिणी हट्टंगडी और वर्षा उसगांवकर सहित अनेक कलाकार इस भावुक अवसर पर उपस्थित रहे।

रोहिणी हट्टंगडी की श्रद्धांजलि

अभिनेत्री रोहिणी हट्टंगडी ने नाना पाटेकर के साथ अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा, 'सबसे पहले तो, मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहूंगी। नाना जी के साथ मैंने एक ही फिल्म की थी, उससे पहले तो बस नाटक में ही हमने साथ काम किया था।' उन्होंने नाना पाटेकर के स्वभाव की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के लोग बहुत कम होते हैं, क्योंकि स्टारडम जब सिर पर चढ़ता है तो लोग जमीन से कट जाते हैं — लेकिन नाना जी के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ।

हट्टंगडी ने यह भी कहा कि नाना पाटेकर की समाज सेवा से सभी भली-भांति परिचित हैं। उनके अनुसार, नाना पाटेकर की फिल्म 'थोड़ा सा रुमानी हो जाए' उन्हें विशेष रूप से पसंद है।

वर्षा उसगांवकर का दुख और यादें

अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि अगर उन्हें उस वक्त सही इलाज मिल जाता तो वे आज हमारे बीच होते। 75 साल कोई जाने की उम्र नहीं है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि आजकल मेडिकल साइंस इतनी उन्नत हो गई है कि इंसान 100 साल तक जी सकता है, पर अफसोस कि नाना पाटेकर समय से पहले दुनिया छोड़ गए।

उसगांवकर ने खुद को खुशकिस्मत बताया कि उन्हें फिल्म 'तिरंगा' में नाना पाटेकर के साथ काम करने का अवसर मिला। उनके अनुसार, 'तिरंगा' में नाना पाटेकर का अभिनय बेहद शानदार था।

नाना पाटेकर की विरासत

वर्षा उसगांवकर ने नाना पाटेकर के बहुआयामी अभिनय की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपने करियर में कॉमेडी से लेकर हीरो और विलेन तक हर तरह के किरदार बखूबी निभाए। गौरतलब है कि नाना पाटेकर को न केवल उनके सशक्त अभिनय के लिए, बल्कि किसान राहत कार्य जैसी सामाजिक गतिविधियों के लिए भी याद किया जाता है।

मनोरंजन जगत में शोक की लहर

प्रार्थना सभा में उपस्थित कलाकारों की भावुकता इस बात का प्रमाण थी कि नाना पाटेकर ने फिल्मी दुनिया में न केवल एक अभिनेता बल्कि एक इंसान के रूप में भी गहरी छाप छोड़ी। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों को प्रेरित करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मनोरंजन उद्योग की उस प्रवृत्ति पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी है जहाँ सफलता अक्सर अहंकार में बदल जाती है। वर्षा उसगांवकर की यह टिप्पणी कि 'समय पर सही इलाज मिलता तो शायद बचाया जा सकता था' — स्वास्थ्य सेवा की सुलभता को लेकर एक व्यापक सवाल भी उठाती है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा कब और कहाँ हुई?
नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा बुधवार, 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित की गई। इसमें रोहिणी हट्टंगडी और वर्षा उसगांवकर सहित मनोरंजन जगत की अनेक हस्तियाँ शामिल हुईं।
रोहिणी हट्टंगडी ने नाना पाटेकर के बारे में क्या कहा?
रोहिणी हट्टंगडी ने कहा कि नाना पाटेकर के स्वभाव में कभी स्टारडम का घमंड नहीं आया और वे हमेशा जमीन से जुड़े रहे। उन्होंने नाना पाटेकर की समाज सेवा की भी सराहना की और फिल्म 'थोड़ा सा रुमानी हो जाए' को अपनी पसंदीदा फिल्म बताया।
वर्षा उसगांवकर ने नाना पाटेकर के निधन पर क्या कहा?
वर्षा उसगांवकर ने कहा कि अगर नाना पाटेकर को समय पर सही इलाज मिलता तो उन्हें बचाया जा सकता था। उन्होंने 75 साल को 'जाने की उम्र नहीं' बताया और खुद को खुशकिस्मत माना कि उन्हें 'तिरंगा' में नाना के साथ काम करने का मौका मिला।
नाना पाटेकर की कौन-सी फिल्में उनके सहकर्मियों को सबसे ज्यादा पसंद हैं?
रोहिणी हट्टंगडी ने 'थोड़ा सा रुमानी हो जाए' को अपनी पसंदीदा फिल्म बताया, जबकि वर्षा उसगांवकर के अनुसार 'तिरंगा' में नाना पाटेकर का काम बेहद शानदार था। नाना पाटेकर ने अपने करियर में कॉमेडी, हीरो और विलेन — हर तरह के किरदार निभाए।
नाना पाटेकर की सामाजिक विरासत क्या है?
नाना पाटेकर को उनकी समाज सेवा के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता था, विशेष रूप से किसान राहत कार्यों के लिए। रोहिणी हट्टंगडी के अनुसार, उनकी यही जमीनी सोच और सामाजिक प्रतिबद्धता उन्हें अन्य सितारों से अलग करती थी।
राष्ट्र प्रेस
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