रोहित शेट्टी के घर फायरिंग: चार्जशीट में खुलासा — लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने मुंबई में खौफ फैलाने की रची थी साजिश

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रोहित शेट्टी के घर फायरिंग: चार्जशीट में खुलासा — लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने मुंबई में खौफ फैलाने की रची थी साजिश

सारांश

रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग महज एक आपराधिक घटना नहीं थी — यह मुंबई में संगठित गैंग के वर्चस्व की सुनियोजित कोशिश थी। चार्जशीट बताती है कि लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क से जुड़े गिरोह ने बॉलीवुड को 'बाबा सिद्दीकी जैसा हाल' करने की धमकी देकर पूरे उद्योग को निशाना बनाया।

मुख्य बातें

1 फरवरी 2026 की रात 12:30–12:45 बजे जुहू स्थित रोहित शेट्टी के आवास 'शेट्टी टॉवर' पर अंधाधुंध फायरिंग की गई।
चार्जशीट के अनुसार, हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े संगठित गिरोह का हाथ था, जिसका मकसद मुंबई में खौफ कायम करना था।
मास्टरमाइंड के रूप में शुभम रामेश्वर लोंकर और आरजू बिश्नोई का नाम चार्जशीट में दर्ज; दोनों अभी वांटेड हैं।
मामले में अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार, सभी न्यायिक हिरासत में; मकोका की धाराएं 11 फरवरी 2026 को जोड़ी गईं।
कालीना फॉरेंसिक लैब की बैलिस्टिक रिपोर्ट ने पुष्टि की कि बरामद हथियारों से ही फायरिंग हुई; मोटरसाइकिल का चेसिस व इंजन नंबर मिटाया गया था।
हमले के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बॉलीवुड को 'बाबा सिद्दीकी जैसा हाल' करने की धमकी दी गई।

मुंबई के जुहू इलाके में स्थित बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के आवास 'शेट्टी टॉवर' पर हुई फायरिंग की घटना में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच (एंटी-एक्सटॉर्शन सेल) द्वारा दाखिल चार्जशीट ने कई अहम तथ्य उजागर किए हैं। जांच के अनुसार, इस हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक संगठित आपराधिक गिरोह का हाथ था, जिसका मकसद मुंबई में अपना आतंक और वर्चस्व स्थापित करना था। 15 आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

घटनाक्रम: कब और कैसे हुई फायरिंग

चार्जशीट के अनुसार, यह वारदात 1 फरवरी 2026 की देर रात 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच हुई। 'शेट्टी टॉवर' पर तैनात निजी सुरक्षा गार्ड की शिकायत पर जुहू पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। अज्ञात हमलावरों ने रोहित शेट्टी को निशाना बनाकर उनके आवास की दिशा में अंधाधुंध गोलीबारी की।

शुरुआत में मामला भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को सौंपी गई और बाद में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धाराएं भी जोड़ी गईं। 11 फरवरी 2026 को सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद मकोका के तहत विधिवत कार्रवाई की गई।

मास्टरमाइंड और साजिश का खुलासा

चार्जशीट में शुभम रामेश्वर लोंकर और नवीन कुमार दलित कुमार उर्फ आरजू बिश्नोई को इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस के अनुसार, शुभम लोंकर ने ही इस संगठित आपराधिक गिरोह का गठन किया था। दोनों वांटेड आरोपियों ने कथित तौर पर शूटरों को हथियार और जिंदा कारतूस उपलब्ध कराए थे।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए आर्थिक सहायता पहुंचाई गई थी। वारदात के बाद मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट करने के निर्देश भी दिए गए थे, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

सबूतों की पुष्टि: फॉरेंसिक और तकनीकी जांच

गहन सीसीटीवी विश्लेषण, तकनीकी जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले की परतें उघाड़ीं। मुंबई की कालीना फॉरेंसिक लैब की बैलिस्टिक रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि बरामद हथियारों से ही रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग की गई थी।

वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल का इंजन और चेसिस नंबर पूरी तरह खुरचकर मिटा दिया गया था — आरटीओ जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ ने मकोका के तहत सक्षम प्राधिकारी के सामने अपना कबूलनामा भी दर्ज कराया है।

बॉलीवुड को खुली धमकी

फायरिंग की घटना के तुरंत बाद आरोपियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर हमले की जिम्मेदारी ली। उस पोस्ट में बॉलीवुड को सीधी चेतावनी देते हुए कहा गया था: 'समय रहते सुधर जाओ, नहीं तो बाबा सिद्दीकी जैसा हाल करेंगे।' यह धमकी उस संदर्भ में और गंभीर हो जाती है जब याद किया जाए कि बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में भी लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था।

यह घटना मुंबई में संगठित अपराध के बढ़ते दायरे की एक और कड़ी है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड से जुड़ी हस्तियों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं, जो महानगर की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं।

आगे क्या होगा

मामले की सुनवाई अदालत में जारी है और सभी 15 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। वांटेड आरोपी शुभम लोंकर और आरजू बिश्नोई की गिरफ्तारी अभी बाकी है, जिनकी तलाश जारी है। मकोका के तहत दर्ज मामले में दोषसिद्धि की स्थिति में कठोर सजा का प्रावधान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि मास्टरमाइंड शुभम लोंकर और आरजू बिश्नोई कब तक वांटेड बने रहते हैं — क्योंकि बिना शीर्ष आरोपियों की गिरफ्तारी के, चार्जशीट अधूरी न्याय-प्रक्रिया का प्रतीक बनकर रह जाएगी। मुंबई पुलिस की त्वरित जांच सराहनीय है, पर यह सवाल बना रहता है कि अंतरराज्यीय गैंग नेटवर्क को तोड़ने के लिए राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय कितना प्रभावी है।
RashtraPress
22 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग की घटना कब और कैसे हुई?
यह घटना 1 फरवरी 2026 की देर रात 12:30 से 12:45 बजे के बीच मुंबई के जुहू स्थित 'शेट्टी टॉवर' पर हुई, जब अज्ञात हमलावरों ने रोहित शेट्टी के आवास की दिशा में अंधाधुंध फायरिंग की। सुरक्षा गार्ड की शिकायत पर जुहू पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।
इस फायरिंग के पीछे कौन सा गैंग था और उसका मकसद क्या था?
चार्जशीट के अनुसार, हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक संगठित आपराधिक गिरोह का हाथ था। गिरोह का मकसद मुंबई में अपना आतंक और वर्चस्व स्थापित करना था, जैसा कि हमले के बाद सोशल मीडिया पर डाली गई धमकी भरी पोस्ट से स्पष्ट होता है।
इस मामले के मास्टरमाइंड कौन हैं?
चार्जशीट में शुभम रामेश्वर लोंकर और नवीन कुमार दलित कुमार उर्फ आरजू बिश्नोई को मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस के अनुसार शुभम लोंकर ने इस गिरोह का गठन किया था और दोनों ने शूटरों को हथियार व कारतूस उपलब्ध कराए थे। दोनों अभी भी वांटेड हैं।
मकोका की धाराएं इस मामले में क्यों जोड़ी गईं?
सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और गवाहों के बयानों के आधार पर जांचकर्ताओं ने पाया कि यह एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र था। 11 फरवरी 2026 को सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धाराएं जोड़ी गईं, जो गंभीर संगठित अपराध के मामलों में कठोर दंड का प्रावधान करता है।
क्या बॉलीवुड को इस गैंग से सीधी धमकी मिली थी?
हाँ, फायरिंग के तुरंत बाद आरोपियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर हमले की जिम्मेदारी ली और बॉलीवुड को चेतावनी दी कि 'समय रहते सुधर जाओ, नहीं तो बाबा सिद्दीकी जैसा हाल करेंगे।' यह धमकी बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के संदर्भ में विशेष रूप से गंभीर मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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