सागर में टैक्सी ड्राइवर के घर से ₹3.02 करोड़ नकद जब्त, PWD रिटायर्ड इंजीनियर का नाम जांच में
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के सागर में पुलिस ने एक टैक्सी ड्राइवर के घर से ₹3.02 करोड़ नकद बरामद किए हैं। 17 अगस्त को हुई इस जब्ती के बाद अधिकारी नकदी के स्रोत और असली मालिक की पहचान करने में जुटे हैं। मामले की जानकारी आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ साझा की जा रही है।
कैसे शुरू हुई तलाशी
गोपालगंज पुलिस स्टेशन क्षेत्र के टिली तिगड्डा इलाके में रहने वाले टैक्सी ड्राइवर सौरभ अहिरवार के घर पर रविवार को छापा मारा गया। पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर देखी थी, जिसमें अहिरवार के हाथ में पिस्तौल जैसी दिखने वाली वस्तु थी — इसी के आधार पर तलाशी अभियान शुरू किया गया।
ऑपरेशन के दौरान घर से कोई हथियार नहीं मिला। हालाँकि, एक बंद अलमारी के भीतर नकदी से भरे बैग बरामद हुए। पुलिस ने मौके पर नोट गिनने की मशीन मंगाकर रकम की गिनती की। परिवार ने बाद में स्पष्ट किया कि तस्वीर में दिखने वाली वस्तु दरअसल बंदूक के आकार का लाइटर थी।
रिटायर्ड PWD इंजीनियर का नाम सामने आया
पूछताछ के दौरान परिवार ने दावा किया कि यह नकदी उनके रिश्तेदार रमेश कुमार अहिरवार की है। रमेश कुमार अहिरवार भोपाल में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सेवानिवृत्त अभियंता हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRRDA) में अनुबंध के आधार पर मुख्य महाप्रबंधक (CGM) के पद पर कार्यरत हैं।
परिवार के अनुसार, रमेश कुमार अपनी पत्नी के साथ घर आए, नकदी से भरे बैग नई खरीदी गई अलमारी में रखे और चाबी लेकर चले गए। पुलिस को अलमारी बंद मिली और घर में चाबी नहीं थी — तलाशी के दौरान ताला तोड़कर खोला गया।
हालाँकि, रमेश कुमार अहिरवार ने इस दावे को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि उनका नाम इस नकदी से क्यों जोड़ा जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक का बयान
सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने कहा, 'घर से लगभग 3 करोड़ रुपए जब्त किए गए। नकदी को सुरक्षित रख लिया गया है और जाँचकर्ता इसके स्रोत व मालिकाना हक की पुष्टि कर रहे हैं। आगे की जाँच के लिए आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की जा रही है।'
आगे की जाँच का दायरा
जाँचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इतनी बड़ी नकदी घर तक कैसे पहुँची और क्या इसका किसी अवैध गतिविधि से संबंध है। संबंधित एजेंसियाँ वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जाँच कर सकती हैं। पुलिस उस सोशल मीडिया तस्वीर की भी प्रामाणिकता की जाँच कर रही है, जिसके आधार पर यह पूरा अभियान शुरू हुआ था। परिवार के सदस्यों से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।