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क्या विवेक रंजन अग्निहोत्री ने आरएसएस को महान बताया? 100 साल तक निस्वार्थ सेवा अनोखी मिसाल!

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क्या विवेक रंजन अग्निहोत्री ने आरएसएस को महान बताया? 100 साल तक निस्वार्थ सेवा अनोखी मिसाल!

सारांश

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा पर चर्चा की, जिसमें उन्होंने संघ की महत्वपूर्ण सेवाओं और नेतृत्व की सराहना की। जानिए इस कार्यक्रम में अन्य हस्तियों ने क्या कहा और मोहन भागवत जी के विचारों की विशेषता क्या थी।

मुख्य बातें

आरएसएस ने 100 वर्षों तक निस्वार्थ सेवा की है।
संस्कृति और सभ्यता को बनाए रखने में युवाओं का योगदान महत्वपूर्ण है।
देशभक्ति की भावना हर नागरिक का दायित्व है।
मोहन भागवत ने सकारात्मकता और करुणा का संदेश दिया।
खेल और शिक्षा में युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने अस्तित्व के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ विषय पर तीन दिवसीय व्याख्यानमाला आयोजित की गई है।

इस कार्यक्रम में बुधवार को फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री सहित खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया और अपने विचारों को साझा किया।

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "संघ ने देश के युवाओं को भारत की सभ्यता और संस्कृति से जोड़े रखने का कार्य किया है। आपदाओं और विपदाओं में लोगों की सेवा की है। ऐसा संघ 100 साल पूरा कर रहा है, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। मोहन भागवत जी एक उत्कृष्ट नेता और वक्ता हैं, मैं उन्हें सुनने आया हूं। 100 साल अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। 100 साल तक देश की सेवा करना इससे बड़ा महान कार्य और क्या हो सकता है।"

रिसलिंग कोच सतपाल सिंह ने कहा कि देश के लिए युवाओं में जज्बा होना चाहिए। खासकर खेलों में उन्हें देश का नाम रोशन करने के लिए और मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने का भी संदेश दिया।

पैरा एथलीट दीपा मलिक ने कहा कि सबके अंदर राष्ट्र सेवा की भावना होनी चाहिए। हर नागरिक का दायित्व बनता है कि वह देश के निर्माण में योगदान दे और सच्ची देशभक्ति दिखाए। अलग-अलग राज्य और भाषाओं के होने के बावजूद भावना केवल एक ही होनी चाहिए।

ज्ञात हो कि नई दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ का आयोजन हो रहा है। इस कार्यक्रम के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने व्याख्यान दिया।

मोहन भागवत ने कहा, "नेक या सज्जन लोगों से दोस्ती करें, उन लोगों को नजरअंदाज करें, जो नेक काम नहीं करते। अच्छे कामों की सराहना करें, भले ही वे विरोधियों द्वारा किए गए हों। गलत काम करने वालों के प्रति क्रूरता नहीं, बल्कि करुणा दिखाएं।"

उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म वह है जो आरंभ, मध्य और अंत में सभी को हमेशा सुख प्रदान करे। जहां दुख उत्पन्न होता है, वह धर्म नहीं है। धर्म त्याग की मांग करता है और धर्म की रक्षा करके हम सभी की रक्षा करते हैं और सृष्टि में सद्भाव सुनिश्चित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि आरएसएस ने अपने 100 वर्षों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके योगदान और सेवा कार्यों को समझना और सराहना करना आवश्यक है। यह भारतीय समाज के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें एकजुटता और समर्पण के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएसएस की स्थापना कब हुई थी?
आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी।
इस कार्यक्रम का आयोजन कहाँ हो रहा है?
यह कार्यक्रम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित हो रहा है।
विवेक रंजन अग्निहोत्री का संघ के बारे में क्या कहना है?
विवेक रंजन अग्निहोत्री ने संघ की सेवा और युवाओं को संस्कृति से जोड़ने के कार्य की सराहना की।
मोहन भागवत ने क्या संदेश दिया?
मोहन भागवत ने नेक लोगों के साथ दोस्ती और अच्छे कामों की सराहना करने का संदेश दिया।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन सी हस्तियां शामिल हुईं?
फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री और खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
राष्ट्र प्रेस
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