RSS का नशे के खिलाफ देशव्यापी अभियान, इंदौर बैठक में 40 से 88 संभागों में पुनर्गठन का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने युवाओं में नशीले पदार्थों के बढ़ते सेवन को एक गंभीर सामाजिक संकट करार देते हुए इसके विरुद्ध देशव्यापी जागरूकता अभियान छेड़ने की घोषणा की है। मध्य प्रदेश के इंदौर में 2 से 4 नवंबर 2026 तक आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (ABKM) की बैठक के समापन पर RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने यह घोषणा की। इसी बैठक में संगठन के ढाँचे को 40 प्रांतों से पुनर्गठित कर 88 संभागों में बाँटने की रूपरेखा भी तय की गई।
नशे की समस्या: RSS की चिंता और रणनीति
होसबोले ने नशीले पदार्थों की लत को एक सुनियोजित और बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क द्वारा संचालित समस्या बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ इस तस्करी को रोकने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन इस लड़ाई में समाज की भागीदारी उतनी ही ज़रूरी है।
RSS के अनुसार, संगठन विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने, नशे से पीड़ित व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श देने और उनके परिवारों को सहायता प्रदान करने पर काम करेगा। बैठक में इन प्रयासों के समन्वय के लिए एक व्यापक रणनीति पर विचार किया गया।
संपर्क अभियान: आँकड़ों में व्यापकता
होसबोले ने बताया कि RSS ने हाल ही में 8,346 कस्बों और 5,028 समूहों में एक बड़ा संपर्क अभियान चलाया, जिसमें 3,79,581 सामुदायिक नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को जोड़ा गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना और हिंदू समाज के भीतर हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना था।
बैठक में सामाजिक परिवर्तन के पाँच चिन्हित क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया।
संगठनात्मक पुनर्गठन: 40 से 88 संभाग
RSS के लिए यह बैठक संगठनात्मक दृष्टि से भी ऐतिहासिक रही। वर्तमान में संघ 40 प्रांतों के माध्यम से संचालित होता है, परंतु नवंबर और दिसंबर 2026 में संघचालकों के चुनाव और नई कार्यकारी समितियों के गठन के बाद इसे 88 संभागों में पुनर्गठित किया जाएगा।
बैठक में प्रत्येक संभाग की स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप अलग-अलग कार्य योजनाएँ तैयार करने पर चर्चा हुई। यह पुनर्गठन संगठन की जमीनी उपस्थिति और क्षेत्रीय प्रभावशीलता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
श्रद्धांजलि प्रस्ताव और ऐतिहासिक स्मरण
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल ने बैठक में हिंदू सामाजिक जागरण से जुड़ी तीन प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रस्ताव पारित किए। स्वामी श्रद्धानंद को उनकी शहादत की शताब्दी पर और स्वामी सदानंद को उनके सामाजिक योगदान के लिए स्मरण किया गया — दोनों को धर्मांतरण विरोध, आदिवासी समुदायों में शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं और सांस्कृतिक जागरूकता के प्रयासों के लिए याद किया गया। एक अन्य प्रस्ताव में राजनारायण बसु की 200वीं जयंती का उल्लेख किया गया, जिन्हें भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है।
मोहन भागवत की विदेश यात्रा पर चर्चा
बैठक में RSS सरसंघचालक मोहन भागवत की हाल की अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा यात्राओं की भी समीक्षा हुई। संगठन के अनुसार, भागवत ने इन देशों में बसे भारतीय समुदायों, शिक्षाविदों और सामुदायिक नेताओं से संवाद किया और वैश्विक एकता तथा मानवता की एकात्मता का संदेश दिया।
यह बैठक ऐसे समय में आई है जब RSS अपने संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक हस्तक्षेप को एक साथ नई धार देने की कोशिश में है। आने वाले महीनों में नशे विरोधी अभियान की रूपरेखा और 88 संभागों की नई संरचना, दोनों पर नज़र रहेगी।