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नशा मुक्त भारत अभियान की छठी वर्षगांठ: 10 करोड़ नागरिकों को दिलाई जाएगी नशे के खिलाफ राष्ट्रीय शपथ

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नशा मुक्त भारत अभियान की छठी वर्षगांठ: 10 करोड़ नागरिकों को दिलाई जाएगी नशे के खिलाफ राष्ट्रीय शपथ

सारांश

नशा मुक्त भारत अभियान छह साल पूरे करते हुए अपने सबसे बड़े जन-संकल्प की ओर बढ़ रहा है — 10 करोड़ नागरिकों की शपथ। 34.56 करोड़ तक पहुँच चुके इस अभियान की असली परीक्षा अब यह है कि क्या संख्याओं की यह ताकत ज़मीनी बदलाव में तब्दील हो सकती है।

मुख्य बातें

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सितंबर 2026 में 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को नशे के खिलाफ राष्ट्रीय शपथ दिलाएगा।
नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की स्थापना 15 अगस्त 2020 को हुई थी और यह अपनी छठी वर्षगांठ मना रहा है।
अभियान अब तक 34.56 करोड़ नागरिकों तक पहुँचा, जिनमें 13.71 करोड़ युवा और 10.65 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं।
1.64 लाख से अधिक 'नशा मुक्ति मित्र' सामुदायिक स्तर पर अभियान से जुड़े हैं।
तैयारी बैठकों की अध्यक्षता संयुक्त सचिव संदीप रेवाजी राठौड़ ने 3 सितंबर को नई दिल्ली में की।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) की छठी वर्षगांठ के अवसर पर इस सितंबर माह में आयोजित होने वाली 'नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय सामूहिक प्रतिज्ञा' की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मंत्रालय का लक्ष्य इस पहल में 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को — भौतिक और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से — शामिल करना है।

उच्चस्तरीय बैठकों में रणनीति तय

नई दिल्ली में 3 सितंबर को दो उच्चस्तरीय समन्वय बैठकें आयोजित की गईं, जिनकी अध्यक्षता संयुक्त सचिव (ड्रग प्रिवेंशन) संदीप रेवाजी राठौड़ ने की। इन बैठकों में व्यापक क्रियान्वयन रणनीति और नागरिकों की निर्धारित संख्या की भागीदारी सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठकों में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के निदेशक अस्तिक कुमार पांडे, अवर सचिव अरुण कुमार कर्ण तथा विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बयान के अनुसार, "देशव्यापी शपथ के लिए अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों और अन्य हितधारकों को जुटाने में संबंधित मंत्रालयों और विभागों की भूमिका पर चर्चा की गई।"

अभियान की पृष्ठभूमि और दायरा

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने देश में नशीले पदार्थों की माँग पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की थी। यह अभियान 'ड्रग डिमांड रिडक्शन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना' (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत संचालित होता है, जो एक साक्ष्य-आधारित रणनीति पर टिका है।

गौरतलब है कि यह रणनीति एम्स, नई दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) द्वारा भारत में नशीले पदार्थों के उपयोग के दायरे और पैटर्न पर किए गए पहले राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर आधारित है।

अब तक की उपलब्धियाँ

पिछले छह वर्षों में यह अभियान देशभर में जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 34.56 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँच चुका है। इनमें 13.71 करोड़ से अधिक युवा और 10.65 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं। सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करने के लिए 1.64 लाख से अधिक 'नशा मुक्ति मित्र' (एनएमएम) इस अभियान से जुड़े हैं।

एनएपीडीडीआर के तहत मंत्रालय राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सरकारी अस्पतालों को रोकथाम संबंधी शिक्षा, जागरूकता, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

आगे की राह

मंत्रालय इस माह की सामूहिक प्रतिज्ञा को अभियान के सबसे बड़े जन-जुड़ाव कार्यक्रम के रूप में आयोजित करने की तैयारी में है। रोकथाम, आकलन, उपचार, पुनर्वास, देखभाल के बाद की सहायता, जन-जागरूकता और सामुदायिक संवेदनशीलता — इन सभी आयामों पर एक साथ काम करते हुए मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नशे के विरुद्ध यह संकल्प केवल एक औपचारिकता न बनकर, एक स्थायी सामाजिक आंदोलन का रूप ले।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन के बीच की खाई को मापने का कोई सार्वजनिक ढाँचा अभी तक सामने नहीं आया है। 10 करोड़ शपथ का लक्ष्य एक राजनीतिक रूप से आकर्षक संख्या है, पर असली सवाल यह है कि उपचार केंद्रों की क्षमता और पुनर्वास की सफलता दर क्या है। एनडीडीटीसी के राष्ट्रीय सर्वेक्षण ने नशे की गहराई उजागर की थी — अभियान की वार्षिक रिपोर्ट में उसी पैमाने पर प्रगति का आकलन होना चाहिए, न कि केवल भागीदारी की संख्या से संतुष्टि।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) क्या है?
नशा मुक्त भारत अभियान सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश में नशीले पदार्थों की माँग को कम करना है। यह रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक जागरूकता को एक साथ संबोधित करता है।
राष्ट्रीय सामूहिक प्रतिज्ञा कब और कैसे होगी?
यह प्रतिज्ञा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी और इसमें 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को भौतिक तथा ऑनलाइन दोनों माध्यमों से जोड़ने का लक्ष्य है। अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों, अभिभावकों और स्वयंसेवकों को इसमें शामिल करने की रणनीति तय की जा रही है।
अभियान अब तक कितने लोगों तक पहुँचा है?
अभियान अब तक देशभर में जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 34.56 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुँच चुका है। इनमें 13.71 करोड़ से अधिक युवा और 10.65 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं।
नशा मुक्ति मित्र कौन होते हैं?
नशा मुक्ति मित्र (एनएमएम) सामुदायिक स्तर पर स्वयंसेवक होते हैं जो अभियान के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुँचाते हैं। अब तक 1.64 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र इस अभियान से जुड़ चुके हैं।
एनएपीडीडीआर क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
'ड्रग डिमांड रिडक्शन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना' (एनएपीडीडीआर) एम्स, नई दिल्ली के एनडीडीटीसी के राष्ट्रीय सर्वेक्षण पर आधारित साक्ष्य-आधारित रणनीति है। इसके तहत मंत्रालय राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सरकारी अस्पतालों को रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता देता है।
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