रूस-यूक्रेन युद्ध में 10 भारतीयों की मौत, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- 10 भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में की।
- याचिका में 26 लोगों का उल्लेख है जो रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे बताए गए हैं।
- 215 भारतीय कुल मिलाकर रूस गए थे, जिनमें से अधिकांश कॉन्ट्रैक्ट पर।
- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र की ओर से अदालत को जानकारी दी।
- चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए सावधानी से संभालने की बात कही।
- विदेश मंत्रालय को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल: रूस-यूक्रेन युद्ध में 10 भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकों को नौकरी का लालच देकर रूस भेजा गया और फिर उन्हें जबरन युद्ध में झोंक दिया गया।
केंद्र सरकार का खुलासा — 215 भारतीय गए, 10 की मौत
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि कुल 215 भारतीय नागरिक रूस गए थे। याचिका में जिन 26 लोगों का उल्लेख किया गया है, उनमें से 10 की मृत्यु हो चुकी है। ये सभी कथित तौर पर यूक्रेन के विरुद्ध चल रहे सैन्य अभियान में शामिल थे।
सरकार ने स्वीकार किया कि अधिकांश लोग कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर स्वेच्छा से रूस गए थे, लेकिन कुछ मामलों में एजेंटों द्वारा गुमराह किए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया। यह विरोधाभास ही इस पूरे मामले की जड़ में है।
शवों को वापस लाने में बाधाएं
केंद्र सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि मृतकों के पार्थिव शव भारत लाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में परिवारों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा। कई परिजन सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहे हैं, जिससे राजनयिक और प्रशासनिक समन्वय में गंभीर बाधाएं आ रही हैं।
विदेश मंत्रालय पीड़ित परिवारों के साथ निरंतर संपर्क में होने का दावा किया गया और बताया गया कि कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, युद्धग्रस्त क्षेत्र से शव वापस लाना अत्यंत जटिल और जोखिम भरा कार्य है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी
मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि युद्ध क्षेत्र से शवों को वापस लाना अत्यंत कठिन कार्य है और इस पूरे मामले को संवेदनशीलता और समझदारी के साथ संभालने की आवश्यकता है। अदालत ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
26 लोगों के परिजनों की ओर से दायर इस याचिका में आरोप है कि एजेंटों ने नौकरी का झांसा देकर इन्हें रूस भेजा, जहां उन्हें बंधक बनाकर जबरन युद्ध में धकेला गया। परिजनों का कहना है कि उनके प्रियजन किस हाल में हैं, इसकी कोई ठोस जानकारी उन्हें नहीं दी जा रही।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब अदालत सरकार की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
गहरा संदर्भ — मानव तस्करी और श्रम शोषण का खतरनाक पैटर्न
यह मामला केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं है। 2023-24 में इसी तरह के कई मामले सामने आए जब भारतीय युवाओं को साइबर फ्रॉड रैकेट के लिए म्यांमार और कंबोडिया भेजा गया। अब रूस में युद्धक्षेत्र में जबरन भर्ती का यह नया आयाम दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क भारतीय युवाओं की बेरोजगारी और विदेश में बेहतर कमाई की चाह का फायदा उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक एजेंटों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होती और विदेश भेजने की प्रक्रिया को विनियमित नहीं किया जाता, ऐसे मामले बढ़ते रहेंगे। विदेश मंत्रालय की अगली रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का अगला आदेश इस मामले की दिशा तय करेगा।