3 सितंबर 2026
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एसएडी ने पंजाब सरकार पर दुष्कर्म-भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, राज्यपाल को सौंपे 300 दस्तावेज़

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एसएडी ने पंजाब सरकार पर दुष्कर्म-भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, राज्यपाल को सौंपे 300 दस्तावेज़

सारांश

शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब सरकार पर दुष्कर्म पीड़ितों को दबाने और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए राज्यपाल को 300 दस्तावेज़ सौंपे। ₹5 करोड़ के कथित लेनदेन के आरोप और 5 सितंबर को CM आवास घेराव के ऐलान ने पंजाब की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।

मुख्य बातें

बिक्रम सिंह मजीठिया और दलजीत सिंह चीमा ने 3 सितंबर को पंजाब सरकार पर दुष्कर्म, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए।
एसएडी नेताओं ने पंजाब के राज्यपाल को करीब 300 दस्तावेज़ सौंचकर हस्तक्षेप की माँग की।
चीमा ने दावा किया कि एक अमेरिकी नागरिक से जुड़े दुष्कर्म मामले में ₹5 करोड़ के कथित लेनदेन के आरोप CM की पत्नी और रिश्तेदारों पर हैं।
हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में एसएडी की महिला विंग 5 सितंबर को चंडीगढ़ में CM आवास का घेराव करेगी।
मजीठिया ने डीजीपी गौरव यादव और मुख्यमंत्री भगवंत मान की भूमिका पर सवाल उठाए; ईडी के हाईकोर्ट में चार पत्र दाखिल होने का हवाला दिया।
एसआईआर विवाद पर चीमा ने कहा कि 12 सितंबर तक दस्तावेज़ जमा करने का अवसर है; प्रक्रिया चुनाव आयोग की निगरानी में।

शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और दलजीत सिंह चीमा ने 3 सितंबर को चंडीगढ़ में पंजाब सरकार पर दुष्कर्म पीड़ितों को कथित तौर पर दबाने, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने पंजाब के राज्यपाल को करीब 300 दस्तावेज़ सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की और 5 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया।

मजीठिया के आरोप: पुलिस और सरकार पर सवाल

मजीठिया ने आरोप लगाया कि पंजाब में दुष्कर्म पीड़ितों को पुलिस के स्तर पर कथित तौर पर डराया और दबाया गया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक गौरव यादव और मुख्यमंत्री भगवंत मान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में पुलिस की कार्रवाई संदिग्ध रही है। कुछ एफआईआर और धारा 164 के तहत दर्ज बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्तियों को रिहा कर दिया गया।

मजीठिया ने कहा कि हाईकोर्ट में पीड़ितों की मदद और कार्रवाई को लेकर चार पत्र दाखिल हो चुके हैं, जबकि पुलिस की ओर से लगातार सबूत माँगे जा रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि पुलिस भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करेगी या उसे बढ़ावा देती रहेगी।

भ्रष्टाचार के आरोप और ईडी का मुद्दा

मजीठिया ने कहा कि पहले छोटे स्तर के आरोपों पर भी राजनीतिक कार्रवाई होती थी, लेकिन अब कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने मंत्री अमन अरोड़ा के उस बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का कोई अधिकारी पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद पेश नहीं हुआ। मजीठिया ने सवाल किया कि अरोड़ा किस हैसियत से इस मामले पर टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जाँच इसलिए नहीं आगे बढ़ रही क्योंकि इससे सरकार से जुड़े लोग भी सवालों के घेरे में आ सकते हैं।

चीमा के दावे: ₹5 करोड़ के लेनदेन का आरोप

दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब में दुष्कर्म के दो मामलों में पीड़ित महिलाओं के साथ कथित अन्याय अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने दावा किया कि एक अमेरिकी नागरिक पर दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले में ₹5 करोड़ के कथित लेनदेन के आरोप मुख्यमंत्री की पत्नी और उनके रिश्तेदारों पर लगाए जा रहे हैं। चीमा ने कहा कि ये गंभीर आरोप हैं और इनकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

5 सितंबर का विरोध-प्रदर्शन

एसएडी की महिला विंग पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में 5 सितंबर को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी। चीमा ने स्पष्ट किया कि पार्टी पीड़ित महिलाओं के साथ खड़ी है।

एसआईआर विवाद पर चीमा का जवाब

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के एसआईआर से जुड़े आरोपों पर चीमा ने कहा कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग की निगरानी में चल रही है। जिन लोगों की 2003 की मैपिंग नहीं हुई, उनके पास 12 सितंबर तक दस्तावेज़ पेश करने का समय है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यदि 12 सितंबर के बाद भी दस्तावेज़ देने के बावजूद किसी के साथ अन्याय होता है, तब सवाल उठाना तर्कसंगत होगा।

यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में विपक्ष और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में राज्यपाल के रुख और 5 सितंबर के प्रदर्शन के बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक दस्तावेज़ों की स्वतंत्र पड़ताल नहीं होती — खासकर ₹5 करोड़ के लेनदेन जैसे गंभीर दावों की। गौरतलब है कि एसएडी खुद पिछले कार्यकाल में भ्रष्टाचार और नशा तस्करी के आरोपों से घिरी रही है, जो उसकी नैतिक साख पर सवाल खड़े करता है। दूसरी तरफ, यदि पुलिस ने वाकई सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस की अनदेखी की है, तो यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, संस्थागत विफलता का भी है। राज्यपाल का अगला कदम और 5 सितंबर का प्रदर्शन तय करेगा कि यह मुद्दा सड़क की राजनीति बनकर रह जाएगा या न्यायिक जाँच तक पहुँचेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसएडी ने पंजाब के राज्यपाल को 300 दस्तावेज़ क्यों सौंपे?
शिरोमणि अकाली दल ने दुष्कर्म पीड़ितों को कथित तौर पर दबाने, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े करीब 300 दस्तावेज़ राज्यपाल को सौंपे और तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। पार्टी का आरोप है कि पंजाब पुलिस ने कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है।
5 सितंबर को CM आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन क्यों होगा?
एसएडी की महिला विंग पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में 5 सितंबर को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास का घेराव करेगी। यह प्रदर्शन दुष्कर्म पीड़ितों के साथ कथित अन्याय और सरकार की निष्क्रियता के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
₹5 करोड़ के कथित लेनदेन का आरोप किस मामले से जुड़ा है?
दलजीत सिंह चीमा ने दावा किया कि एक अमेरिकी नागरिक पर दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े मामले में ₹5 करोड़ के कथित लेनदेन के आरोप मुख्यमंत्री की पत्नी और उनके रिश्तेदारों पर लगाए जा रहे हैं। एसएडी ने इस मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
मजीठिया ने ईडी और मंत्री अमन अरोड़ा पर क्या आरोप लगाए?
मजीठिया ने सवाल उठाया कि मंत्री अमन अरोड़ा किस हैसियत से ईडी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी कर रहे हैं, जबकि ईडी हाईकोर्ट में चार पत्र दाखिल कर चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जाँच इसलिए आगे नहीं बढ़ रही क्योंकि इससे सरकार से जुड़े लोग भी सवालों के घेरे में आ सकते हैं।
एसआईआर विवाद में 12 सितंबर की समयसीमा क्यों अहम है?
दलजीत सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों की 2003 की मैपिंग नहीं हुई, उनके पास 12 सितंबर तक दस्तावेज़ पेश कर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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