क्या सज्जाद लोन ने जम्मू-कश्मीर एकता पर सवाल उठाए, बेरोजगारी और नौकरियों की असमानता पर चिंता जताई?

Click to start listening
क्या सज्जाद लोन ने जम्मू-कश्मीर एकता पर सवाल उठाए, बेरोजगारी और नौकरियों की असमानता पर चिंता जताई?

सारांश

क्या जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी और राजनीतिक असमानता की समस्या को सज्जाद लोन ने उठाया है? जानें उनकी चिंताओं का क्या है असर और इस मुद्दे पर उनकी राय।

Key Takeaways

  • सज्जाद गनी लोन ने जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक ढांचे पर सवाल उठाए।
  • बेरोजगारी और नौकरी के अवसरों के असमान वितरण की समस्या को उजागर किया।
  • कश्मीरी युवाओं की चिंताओं को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
  • धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए कश्मीरी नेताओं की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।
  • राजनीतिक नेतृत्व और आम लोगों के बीच की दूरी को समझने की जरूरत है।

श्रीनगर, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू और कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन ने जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे पर एक गंभीर और विस्तृत चर्चा का आगाज़ किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर संबंधों की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया और स्पष्ट रूप से सवाल उठाया कि क्या वर्तमान व्यवस्था में दोनों क्षेत्रों की वास्तविक आवश्यकताओं का उचित ध्यान रखा जा रहा है।

सज्जाद गनी लोन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की हाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं फारूक साहब का सम्मान करता हूं, वह मेरे लिए बहुत प्रिय हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से मैं उनके खिलाफ हूं।”

लोन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की कथित निरंतर एकता का बोझ कौन उठाता है, इसे समझना आवश्यक है। उनका तर्क था कि स्थापित राजनीतिक नेतृत्व और आम लोग, विशेषकर बेरोजगार युवा, हर दिन इसके प्रभाव का सामना करते हैं।

उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या कश्मीरियों ने कभी धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए किसी अनुबंध पर सहमति दी थी। लोन ने बताया कि कश्मीरी नेता धर्मनिरपेक्षता की उच्च नैतिक जिम्मेदारी का दावा करते हैं, लेकिन कश्मीरी छात्रों को देश भर में पीटा और अपमानित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरक्षण और नौकरी के मामलों पर भी चिंता जताई।

लोन ने कहा कि जम्मू में नौकरी के अवसरों के लिए कश्मीरियों को निरंतर नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि 2007 में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 2010 में जिला और डिवीजनल कैडर खत्म करने से कश्मीर की हजारों नौकरियां जम्मू में ट्रांसफर हो गईं। उन्होंने प्रश्न किया कि इन नौकरियों का नुकसान कौन उठाएगा और क्या इसका बोझ कश्मीरी युवाओं पर ही डाला जाएगा।

सज्जाद लोन ने अपनी राजनीतिक सोच की शुरुआत 2006 से बताई, जब उन्होंने 'अचीवेबल नेशनहुड' किताब में पहली बार 'ऑप्ट-आउट ऑप्शन' का विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस विचार को सामने लाने की भारी व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी, जिसमें कांग्रेस सरकार द्वारा उनके पासपोर्ट पर चार वर्षों का प्रतिबंध और उनकी पत्नी के कश्मीर में आने पर रोक शामिल थी, जिसके कारण उनके बच्चों को पाकिस्तान में पढ़ाई करनी पड़ी।

लोन ने कहा, “मैं गवाह हूं कि मेरे बच्चों ने अपने पहले तीन साल पाकिस्तान में पढ़ाई की, क्योंकि उन्हें यहां आने की अनुमति नहीं थी।”

उन्होंने कहा कि जम्मू में लोग आसानी से कुछ भी बोल सकते हैं, लेकिन एक कश्मीरी के लिए बोलना ही अपराध बन जाता है। सज्जाद लोन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या उन्होंने कभी बेरोजगारी की वास्तविकता को समझा है। लोन ने जोर देकर कहा कि बच्चों के सपनों, परिवार की देखभाल, और घर बनाने जैसी मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

लोन ने मुख्यधारा की पार्टियों द्वारा जम्मू के साथ लगातार जुड़ाव को सही ठहराने के लिए बलिदान और हिंसा के कथनों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कश्मीरी मुसलमान सबसे आगे रहते हैं, पुलिस शहीदों में लगभग 90 प्रतिशत कश्मीरी मुसलमान हैं, लेकिन केंद्र और जम्मू से उनका समर्थन साफ तौर पर गायब रहता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पूरे भारत में कश्मीरी युवाओं को निशाना बनाने और उनके खिलाफ नफरत फैलाने के लगातार प्रयास जारी हैं।

सज्जाद लोन की यह टिप्पणी न केवल जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक और राजनीतिक असमानताओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि क्षेत्रीय युवा और नौकरियों की गंभीर स्थिति पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि हमें एक समावेशी और सहिष्णु समाज बनाने की आवश्यकता है।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

सज्जाद लोन ने किस विषय पर चिंता जताई?
सज्जाद लोन ने जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी और राजनीतिक असमानता पर चिंता जताई है।
क्या सज्जाद लोन ने फारूक अब्दुल्ला पर टिप्पणी की?
हाँ, सज्जाद लोन ने फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
Nation Press