जाली नोटों के रैकेट का खुलासा: 2.38 करोड़ रुपये के नकली नोट जब्त, 7 गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- 2.38 करोड़ रुपये के नकली नोट जब्त किए गए।
- 7 आरोपी गिरफ्तार किए गए, जिनमें एक महिला शामिल है।
- जाली नोट बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
- क्राइम ब्रांच ने सूरत में एक आश्रम पर छापा मारा।
- इस ऑपरेशन ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अहमदाबाद, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात की अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने जाली नोटों के निर्माण और वितरण करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। इस ऑपरेशन में, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने नकली भारतीय नोट बनाने और उसे सर्कुलेट करने में शामिल एक महिला समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को होने वाले बड़े नुकसान को रोका गया है।
गुप्त सूचना पर, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक सफेद फॉर्च्यूनर कार (जीजे-05-आरएस-5252) को जब्त किया, जो सूरत से अहमदाबाद के अमराईवाड़ी क्षेत्र में 500 रुपए के नकली नोट लेकर जा रही थी। पुलिस ने कार को अमराईवाड़ी में टॉरेंट पावर के निकट रोका। गाड़ी की जाँच में एक काले बैग और छिपे हुए पैकेजिंग में नकली करेंसी के बंडल बरामद हुए, जिसके बाद गाड़ी में सवार सभी व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया।
जांच में यह सामने आया कि आरोपियों ने पिछले चार महीनों से सूरत में एक रिहायशी स्थान पर नकली करेंसी छापने की योजना बनाई थी। इस गिरोह का नेतृत्व मुकेशभाई लखाभाई थुम्मर कर रहा था, जिसने प्रिंटर, पेपर कटिंग मशीन और अन्य आवश्यक उपकरणों का प्रबंध किया था। आरोपियों ने डिजिटल पेमेंट गेटवे का उपयोग करके अलीबाबा जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आरबीआई और भारत के निशान वाले सिक्योरिटी थ्रेड पेपर प्राप्त किए।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नकली नोटों के डिज़ाइन और विशेषताओं को असली भारतीय करेंसी जैसा दिखाने के लिए फोटो-एडिटिंग सॉफ्टवेयर और चैटजीपीटी जैसे एआई-आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया था। एक आरोपी को ग्राफिक एडिटिंग और प्रिंटिंग प्रक्रियाओं में विशेष अनुभव था, जिससे वह नकली नोटों की गुणवत्ता को बढ़ा रहा था।
क्राइम ब्रांच ने मिली सूचना के आधार पर एक टीम को तुरंत सूरत भेजा और सूरत क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर, नकली करेंसी बनाने की जगह को सुरक्षित किया। नकली करेंसी सूरत में 'श्री सत्य योग फाउंडेशन' के आश्रम में छापी जा रही थी। यह आश्रम सूरत जिले के कामरेज तालुका के धोरन पारडी गांव में स्थित है। क्राइम ब्रांच ने आश्रम के गुरु, परम पूज्य अष्टांग योग सिद्ध सद्गुरु प्रदीप को भी गिरफ्तार किया है, जहाँ नकली करेंसी का उत्पादन किया जा रहा था।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 'श्री सत्य योग फाउंडेशन' पर छापा मारा और कई दस्तावेज जब्त किए। इस दौरान नकली करेंसी नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद किए गए। क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद में गिरोह की कार से लगभग 2.10 करोड़ रुपए मूल्य के नकली 500 रुपए के नोट (42,000 नोट), फॉर्च्यूनर गाड़ी, जिसकी कीमत लगभग 25 लाख रुपए है, मोबाइल फोन और नकद राशि, जिनका मूल्य लगभग 1.20 लाख रुपए है, बरामद किए हैं। वहीं, गिरोह के सूरत के ठिकाने से लगभग 28 लाख रुपए मूल्य के नकली 500 रुपए के नोट, सिक्योरिटी थ्रेड पेपर (16 रीम), प्रिंटर, लैपटॉप, पेपर कटिंग मशीन, नोट गिनने की मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
सभी आरोपी सूरत के निवासी हैं, जिनकी पहचान मुकेशभाई लखाभाई - थुम्मर, अशोकभाई धनजीभाई - मावानी, रमेशभाई वल्लभभाई - भालर, दिव्येश ईश्वरभाई - राणा, प्रदीपभाई दिलीपभाई- जोतांगिया, महिला आरोपी- कतारगाम और भरतभाई वलजीभाई - काकड़िया के रूप में हुई है। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और डीसीबी पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा व्यापक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन के सुराग और संभावित अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय संबंधों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
इस ऑपरेशन का देश की वित्तीय प्रणाली पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। उच्च गुणवत्ता वाली नकली मुद्रा का प्रचलन सीधे तौर पर वैध मुद्रा में जनता के विश्वास को कमजोर करता है, मौद्रिक स्थिरता को बाधित करता है, और इसका उपयोग संगठित अपराध तथा अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली मुद्रा की जब्ती और एक संगठित छपाई इकाई का भंडाफोड़ उस आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर देता है, जो बाजार में भारी मात्रा में नकली मुद्रा डाल सकती थी।
निर्माण के स्रोत की पहचान करके और वितरण के चरण को रोककर, क्राइम ब्रांच ने न केवल तत्काल आर्थिक नुकसान को रोका है, बल्कि एक बड़े नेटवर्क पर भी अंकुश लगाया है, जो अपने ऑपरेशन्स का आगे विस्तार कर सकता था। यह मामला अपराध करने के बदलते तरीकों को उजागर करता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय खरीद चैनलों और डिजिटल उपकरणों का उपयोग शामिल है। यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों में निरंतर सतर्कता और तकनीकी अनुकूलन की आवश्यकता को और मजबूत करता है।