सैम पित्रोदा बोले — सीजेपी और छात्र आंदोलन बड़ी राजनीतिक पहेली के हिस्से, लोकतंत्र पर हमला सबसे बड़ी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सत्यनारायण (सैम) पित्रोदा ने 15 अक्टूबर 2026 को कहा कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) और छात्र आंदोलन देश में चल रही व्यापक राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के केवल दो पहलू हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन मुद्दों को शासन-व्यवस्था और असमानता को लेकर जारी बहस से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
सीजेपी और छात्र आंदोलन: बड़ी तस्वीर का हिस्सा
पित्रोदा ने नई दिल्ली में एक खास बातचीत में कहा, 'सीजेपी के बारे में बात करने से पहले, हमें यह समझना होगा कि देश में चल क्या रहा है? सीजेपी और छात्र आंदोलन एक बड़ी पहेली के बस कुछ हिस्से हैं। ये इकलौते हिस्से नहीं हैं। मेरी नजर में, एक ही समय में कई चीजें हो रही हैं, जो कई अलग-अलग मुद्दों को एक साथ जोड़ रही हैं।'
उन्होंने बताया कि सीजेपी आंदोलन की शुरुआत तब हुई जब कुछ छात्रों को 'कॉकरोच' कहे जाने पर वे एकजुट हो गए। परीक्षा संबंधी समस्याएँ, पेपर लीक, खराब बुनियादी ढाँचा, शिक्षा की गुणवत्ता, बढ़ती ट्यूशन फीस, कोचिंग सेंटरों का बढ़ता प्रभाव और बेरोज़गारी — इन सभी मुद्दों ने इस विरोध को बल दिया।
लोकतंत्र पर हमला: पित्रोदा की प्रमुख चिंता
पित्रोदा ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर है। उनके अनुसार, 'जब आप संस्थानों पर कब्जा करने लगते हैं, नागरिक समाज को कमज़ोर करते हैं, मीडिया को नियंत्रित करते हैं, और एक तानाशाह सोच के साथ आगे बढ़ते हैं — जहाँ सब कुछ प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), प्रधानमंत्री या जिसे 'डबल-इंजन सरकार' कहा जाता है, उसके द्वारा तय किया जाता है — तो लोकतंत्र पर कई तरह से हमले होते हैं।'
उन्होंने यह भी दावा किया कि लोग अब अलग राय रखने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच या अदालती कार्रवाई का भय रहता है।
चुनावी पारदर्शिता पर सवाल
पित्रोदा ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'चाहे वह रजिस्ट्रेशन हो, मेरी योग्यता हो, वोटों की गिनती हो, ईवीएम का इस्तेमाल हो, वोटर लिस्ट हो, या फिर मतपेटियों को इधर-उधर ले जाना, उन्हें ताला लगाना, सड़क पर खोलना या ट्रक में फेंक देना हो — इन सबने अविश्वास पैदा किया है।' उन्होंने स्वीकार किया कि इन आरोपों पर लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है।
आर्थिक असमानता और शासन पर सवाल
पित्रोदा ने यह मानते हुए कि अर्थव्यवस्था लगभग 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, सवाल उठाया कि इस विकास का लाभ किसे मिल रहा है। उन्होंने कहा, 'इसका फायदा किसे मिल रहा है? क्या कुछ गिने-चुने लोगों को? इस प्रक्रिया में, हमने नौकरियाँ पैदा नहीं की हैं। धन का वितरण असमान है।'
उन्होंने वेतन में ठहराव, बढ़ती महंगाई, घटती क्रय शक्ति और मिड-डे मील जैसी सार्वजनिक सेवाओं की दशा को भी शासन-व्यवस्था की विफलता से जोड़ा।
युवाओं में नई उम्मीद और 'इंडियन मॉनसून'
पित्रोदा ने सीजेपी आंदोलन की तुलना 'अरब स्प्रिंग' से करते हुए इसे 'इंडियन मॉनसून' की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन ने युवाओं में निडरता और साहस जगाया है — जो लोग पहले बोलने से डरते थे, वे अब खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। हालाँकि, विरोध प्रदर्शनों के दौरान अनुचित भाषा के इस्तेमाल को उन्होंने 'गुस्से का इज़हार' बताते हुए इसका समर्थन करने से इनकार किया।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में युवा बेरोज़गारी और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर आक्रोश चरम पर है, और विपक्षी दल इसे सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाने में जुटे हैं।