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गन्ना किसान देश की रीढ़: संजय निषाद का विपक्ष पर वार, 7.5 लाख नौकरियों में 75,000 परिवारों को लाभ का आरोप

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गन्ना किसान देश की रीढ़: संजय निषाद का विपक्ष पर वार, 7.5 लाख नौकरियों में 75,000 परिवारों को लाभ का आरोप

सारांश

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने बरेली में गन्ना किसानों को देश की रीढ़ बताया और विपक्ष पर आरोप लगाया कि 7.5 लाख नौकरियों का लाभ केवल 75,000 परिवारों तक सीमित रहा। साथ ही उन्होंने निषाद-कश्यप समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को एक बार फिर उठाया।

मुख्य बातें

संजय निषाद ने 16 अक्टूबर 2026 को बरेली में गन्ना किसानों को देश और कृषि क्षेत्र की रीढ़ बताया।
उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद BJP सरकार ने किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता दी।
विपक्ष पर आरोप — 7.5 लाख नौकरियों का लाभ केवल 75,000 परिवारों तक सीमित रहा।
निषाद और कश्यप समुदाय अभी भी ओबीसी श्रेणी में उचित प्रतिनिधित्व और संवैधानिक मान्यता की माँग कर रहे हैं।
निषाद ने विपक्ष को जाति के नाम पर वोट माँगने और 'नकारात्मक राजनीति' करने का दोषी ठहराया।

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने 16 अक्टूबर 2026 को बरेली में कहा कि गन्ना किसान देश और कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं, और 2017 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद से किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया गया। उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने जाति के नाम पर वोट माँगे, लेकिन लाभ केवल चुनिंदा परिवारों तक पहुँचाया।

किसानों पर सरकार का रुख

निषाद ने कहा, 'गन्ना किसान देश और कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं। 2017 से पहले किसानों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन हमारी सरकार ने उनकी चिंताओं को दूर करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए काम किया है।' उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकारों के विपरीत BJP सरकार ने किसानों के कल्याण को केंद्र में रखा और उन्हें अधिक सहयोग प्रदान किया।

विपक्ष पर सीधा निशाना

विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए संजय निषाद ने कहा कि 2017 से पहले की सरकारें विभिन्न जातियों और पिछड़े समुदायों के नाम पर वोट माँगती थीं, जबकि वास्तव में अन्य समुदायों को निरंतर उपेक्षा और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में विशेष वर्गों को तरजीह दी जाती थी।

उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाया कि विपक्ष के सत्ता में रहने के दौरान 7.5 लाख नौकरियों का वितरण हुआ, जिसका लाभ केवल लगभग 75,000 परिवारों तक सीमित रहा। निषाद ने कहा, 'इन्हीं वर्गों को बार-बार इन अवसरों का लाभ मिलता रहा, जबकि अन्य लोग पीछे छूट गए। इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है?'

निषाद और कश्यप समुदाय के अधिकारों की माँग

संजय निषाद ने कहा कि निषाद और कश्यप समुदायों का समाज में योगदान का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। उनके अनुसार इन समुदायों के पूर्वजों ने मुगलों और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और समुदाय ने भगवान राम को नदी पार कराने में भी भूमिका निभाई।

इन ऐतिहासिक योगदानों के बावजूद, निषाद ने कहा, इन समुदायों को संवैधानिक मान्यता और उचित प्रतिनिधित्व के लिए अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी उठाया कि कुछ समुदायों के बच्चों को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है, जबकि अन्य अभी भी अपने अधिकारों की मान्यता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

विपक्ष की राजनीति पर टिप्पणी

निषाद ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास नकारात्मक राजनीति के अलावा कोई एजेंडा नहीं है। गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में जाति-आधारित राजनीति पर चर्चा तेज़ है और ओबीसी वर्गीकरण के मुद्दे पर विभिन्न दलों के बीच तीखी बहस जारी है।

आने वाले समय में निषाद और कश्यप समुदायों के ओबीसी उप-वर्गीकरण एवं संवैधानिक प्रतिनिधित्व के सवाल पर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ OBC उप-वर्गीकरण का सवाल तेजी से चुनावी धुरी बनता जा रहा है। 7.5 लाख नौकरियों में 75,000 परिवारों को लाभ का आरोप गंभीर है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि अनुपस्थित है — यह आँकड़ा सत्यापन की माँग करता है, न कि केवल राजनीतिक स्वीकृति की। गन्ना किसानों की समस्याएँ — बकाया भुगतान, उचित मूल्य, चीनी मिलों की देनदारियाँ — अभी भी असमाधित हैं, जिन पर कोई ठोस नीतिगत घोषणा इस बयान में नहीं आई। बड़ा सवाल यह है कि जब निषाद-कश्यप समुदाय के अधिकारों की बात होती है, तो भाषण से आगे ठोस विधायी या प्रशासनिक कदम कब उठेंगे।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद ने गन्ना किसानों के बारे में क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने बरेली में कहा कि गन्ना किसान देश और कृषि क्षेत्र की रीढ़ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 में BJP सरकार आने के बाद किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया गया।
संजय निषाद ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
निषाद ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सत्ता में रहते हुए 7.5 लाख नौकरियों का लाभ केवल लगभग 75,000 परिवारों तक सीमित रखा और जाति के नाम पर वोट माँगते हुए अन्य समुदायों की उपेक्षा की। उन्होंने इसे 'सबसे बड़ा अन्याय' बताया।
निषाद और कश्यप समुदाय किन अधिकारों की माँग कर रहे हैं?
ये समुदाय OBC श्रेणी में उचित उप-वर्गीकरण और संवैधानिक मान्यता की माँग कर रहे हैं। संजय निषाद के अनुसार, कुछ समुदायों के बच्चों को OBC में शामिल किया गया है, जबकि निषाद और कश्यप समुदाय अभी भी अपने अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यह बयान किस संदर्भ में आया है?
यह बयान उत्तर प्रदेश में जाति-आधारित राजनीतिक बहस के बीच आया है, जहाँ OBC उप-वर्गीकरण और पिछड़े समुदायों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा तेजी से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। निषाद 16 अक्टूबर 2026 को बरेली में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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