संसद में विपक्ष का व्यवधान 'अराजक मानसिकता' का प्रमाण: BJP नेता नितिन नवीन और अमित शाह का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता नितिन नवीन ने 12 अगस्त को विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद में लगातार व्यवधान डालना विपक्ष की अराजक मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने यह बात गृह मंत्री अमित शाह के बयान को साझा करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट की।
नितिन नवीन का विपक्ष पर आरोप
नितिन नवीन ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'संसद में विपक्ष द्वारा लगातार किया जा रहा व्यवधान उनकी अराजक मानसिकता को उजागर करता है। हर अहम मुद्दे पर चर्चा करने के लिए केंद्र सरकार की बार-बार की कोशिशों के बावजूद विपक्ष चर्चा से भागता है और संसद को कामकाज करने से रोकता है। जनता सब देख रही है और अब समझ रही है कि असल में चर्चा से कौन भाग रहा है।'
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र विपक्ष के हंगामे के कारण बार-बार बाधित हो रहा है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा विवाद और अन्य मुद्दों पर विपक्षी दल सदन में प्रदर्शन कर रहे हैं।
अमित शाह की दो-टूक: 'जनता तय करे'
गृह मंत्री अमित शाह ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मोदी सरकार संसद में हर तरह की चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष का मकसद चर्चा करना नहीं बल्कि अराजकता फैलाना है। विपक्ष को लोकसभा अध्यक्ष को चर्चा के लिए पत्र लिखना चाहिए। हम बुधवार दोपहर 3 बजे से गुरुवार दोपहर 3 बजे तक चर्चा के लिए तैयार हैं।'
शाह ने यह भी कहा कि जब से सत्र शुरू हुआ है, वे लगातार संसद आ रहे हैं और अपने चैंबर में बैठते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब विपक्ष दोनों सदनों को चलने नहीं दे रहा, तो सदन में जाकर कुछ नहीं किया जा सकता।
NEET पर चर्चा की पेशकश
शाह ने स्पष्ट किया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार NEET को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, 'चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए। विपक्ष इसकी माँग कर रहा था और हमने इसे स्वीकार किया।'
शाह ने जोड़ा, 'मैंने भी कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूँ, लेकिन वे चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कि कौन भाग रहा है।'
संसदीय गतिरोध का व्यापक संदर्भ
यह टकराव भारतीय संसद में एक पुराने पैटर्न की कड़ी है, जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर सदन बाधित करने का आरोप लगाते हैं। आलोचकों का कहना है कि इस गतिरोध का सबसे बड़ा नुकसान जनता को होता है, क्योंकि महत्वपूर्ण विधायी कार्य अधूरा रह जाता है। आगे देखना होगा कि क्या दोनों पक्ष चर्चा की मेज पर आते हैं या गतिरोध जारी रहता है।