सतीश चंद्र दुबे: विपक्ष का काम केवल विधेयकों का विरोध करना है
सारांश
Key Takeaways
- विपक्ष का विरोध: विपक्ष का काम केवल हर विधेयक का विरोध करना है।
- संवाद का महत्व: युद्ध के बजाय संवाद और समझौता आवश्यक है।
- ट्रांसजेंडर अधिकार: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
- सरकारी योजनाएँ: केंद्र की योजनाएँ किसानों और गरीबों के लिए लाभदायक हैं।
- पारदर्शिता: ट्रांसजेंडरों के लिए पारदर्शिता आवश्यक है।
नई दिल्ली, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक पर विपक्षी नेताओं के वक्तव्यों का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि विपक्ष का एकमात्र कार्य हर विधेयक का विरोध करना है।
सतीश चंद्र दुबे ने नई दिल्ली में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में यह स्पष्ट किया कि अगर कोई ऐसा विधेयक है जिसका विपक्ष विरोध नहीं करता है, तो मुझे उसका नाम बताएं। ये लोग तो अच्छे से अच्छे प्रस्ताव का भी विरोध कर देते हैं। कई ऐसे राज्य हैं जहाँ केंद्र की योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू नहीं होने दिया जाता, चाहे वह किसान सम्मान निधि हो या आयुष्मान योजना। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को अच्छे कार्यों का समर्थन करना चाहिए, लेकिन यह केवल विरोध करने में ही लगे रहते हैं।
उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के संदर्भ में कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। इतिहास यह दर्शाता है कि संवाद के माध्यम से मुद्दों का समाधान किया जा सकता है। समझौता हमेशा सबसे प्रभावी तरीका होता है। भारत हमेशा शांति की पेशकश करता है। आज दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में निश्चित रूप से कोई सकारात्मक परिणाम निकलना चाहिए।
विपक्ष द्वारा ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक पर भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि विपक्ष का मानना है कि इस विधेयक को उचित चर्चा के लिए समिति के पास भेजा जाना चाहिए, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि इस पर पहले ही चर्चा की जा चुकी है। यह सत्य है कि ट्रांसजेंडरों के लिए पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा करते समय सांसदों को आश्वस्त किया गया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में यह विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 में संशोधन करने के लिए है। इसका उद्देश्य उन व्यक्तियों की सुरक्षा करना है जिन्हें उनकी जैविक स्थिति के कारण सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। यह अधिनियम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए बना है। इस संशोधन के बाद मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर जिला मजिस्ट्रेट एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के रूप में पहचान पत्र जारी करेगा।