राहुल गांधी ने ट्रांसजेंडर अधिकारों पर नए विधेयक को बताया बड़े हमले का हिस्सा
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी ने ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक की आलोचना की।
- विधेयक को संविधान का उल्लंघन बताया गया।
- ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान को खतरा।
- सरकार ने विधेयक को स्पष्टता और प्रक्रिया के लिए आवश्यक बताया।
- विपक्ष ने इसे प्रतिगामी करार दिया।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों से भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र सरकार के 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, २०२६' की तीखी आलोचना की और इसे समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर खुला हमला बताया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "भाजपा सरकार का यह प्रतिगामी विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों से अपनी पहचान स्वयं निर्धारित करने का अधिकार छीनता है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के २०१४ के एनएएलएसए फैसले का सीधा उल्लंघन है। यह भारत की विभिन्न सांस्कृतिक पहचान को मिटाने वाला कदम है। विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को चिकित्सीय बोर्ड के सामने अमानवीय जांच से गुजरने के लिए मजबूर करता है और बिना किसी सुरक्षा उपाय के आपराधिक दंड और निगरानी की व्यवस्था लागू करता है।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय से कोई परामर्श नहीं किया और ऐसा विधेयक पेश किया है जो उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के बजाय कलंकित करता है।
राहुल गांधी ने कहा, "संविधान हर भारतीय के जीवन, स्वतंत्रता, पहचान और गरिमा के अधिकार की रक्षा करता है। लेकिन भाजपा सरकार अपने संकीर्ण विचारों को पूरा करने के लिए संविधान का उल्लंघन कर रही है और ट्रांसजेंडर समुदायों का सम्मान करने वाले भारत के समृद्ध इतिहास को नष्ट कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का स्पष्ट रूप से विरोध करती है।"
यह विधेयक १३ मार्च २०२६ को लोकसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया था। २०१९ के ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन ट्रांसजेंडर की परिभाषा को सीमित करने, स्व-पहचान के अधिकार को हटाने और चिकित्सा बोर्ड की अनुशंसा के बाद ही पहचान प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान करता है। सरकार का तर्क है कि २०१९ का कानून अस्पष्ट था और इसका दुरुपयोग हो रहा था, इसलिए स्पष्ट परिभाषा और मजबूत प्रक्रिया की आवश्यकता है।
हालांकि, विपक्ष और ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस विधेयक को 'संवैधानिक हमला' और 'प्रतिगामी' करार दिया है। कई संगठनों ने कहा कि यह एनएएलएसए फैसले की भावना के खिलाफ है, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्व-पहचान का अधिकार दिया गया था।