जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी ड्रोन की घुसपैठ, राजौरी और सांबा में सर्च ऑपरेशन जारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के राजौरी और सांबा जिलों में 27 जुलाई 2026 की रात संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने के बाद सुरक्षा बलों ने सोमवार सुबह से व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) और इंटरनेशनल बॉर्डर के निकटवर्ती संवेदनशील इलाकों में यह कार्रवाई हथियारों और नशीले पदार्थों की संभावित तस्करी की आशंका के मद्देनज़र की जा रही है।
कहाँ-कहाँ दिखी ड्रोन गतिविधि
अधिकारियों के अनुसार, सांबा जिले में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास नंदपुर और राजौरी के नौशेरा सेक्टर में एलओसी के निकट तरकुंडी-साज क्षेत्र में सतर्क सैनिकों ने रात के दौरान ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि दर्ज की। दोनों स्थानों पर तत्काल निगरानी बढ़ा दी गई।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले एक सप्ताह से सीमावर्ती अग्रिम इलाकों में ड्रोन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सांबा और कठुआ जिलों में पहले से ही ड्रोन-रोधी उपाय तेज़ किए जा चुके हैं।
सर्च ऑपरेशन का विवरण
भारतीय सेना और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से सुबह होते ही संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संदिग्ध ड्रोन से कोई हथियार या नशीला पदार्थ तो नहीं गिराया गया। शाम तक तलाशी जारी थी, हालाँकि अब तक कोई सामग्री बरामद नहीं हुई और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई।
राजौरी में मोर्टार शेल बरामद
इस बीच, रविवार को राजौरी जिले के कयान गाँव में शाम करीब 4 बजे किसानों को एक खुले खेत में 51-एमएम का मोर्टार शेल पड़ा मिला। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय राइफल्स के जवान बम निरोधक दस्ते के साथ मौके पर पहुँचे। शेल को सुरक्षित बरामद कर नियंत्रित धमाके के ज़रिए नष्ट कर दिया गया — इस प्रक्रिया में कोई नुकसान नहीं हुआ।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती सतर्कता
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना करती है, जबकि इंटरनेशनल बॉर्डर की निगरानी BSF के ज़िम्मे है। अधिकारियों के अनुसार, हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा घुसपैठ की आशंकाओं के बीच संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में तकनीकी और ज़मीनी निगरानी दोनों स्तरों पर सतर्कता बढ़ाई गई है। यह ऐसी घटनाओं की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है जो सीमा पार से ड्रोन के ज़रिए अवैध सामग्री पहुँचाने की कोशिशों की ओर इशारा करती है।
आगे की स्थिति
तलाशी अभियान जारी रहने की उम्मीद है और सुरक्षा बल किसी भी बरामदगी या गिरफ्तारी की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन निगरानी और काउंटर-ड्रोन तकनीक को और मज़बूत करने की ज़रूरत है।