क्या सीट बंटवारे को लेकर जल्दी होगा फैसला?: दीपांकर भट्टाचार्य

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क्या सीट बंटवारे को लेकर जल्दी होगा फैसला?: दीपांकर भट्टाचार्य

सारांश

बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर दीपांकर भट्टाचार्य ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने सीट बंटवारे की जटिलताओं और लोकतंत्र पर हालिया हमले को लेकर चिंता जताई। जानिए उनके विचार और सीपीआई (माले) की रणनीति।

मुख्य बातें

सीट बंटवारे की चर्चा अंतिम चरण में है।
लोकतंत्र पर हालिया हमले चिंता का विषय हैं।
सीपीआई (माले) ने संविधान की रक्षा का संकल्प लिया है।
बिहार का ईमानदार राज्य होने का दावा।
कार्यकर्ताओं से एकजुटता का आह्वान।

पटना, 9 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। सीपीआई (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार विधानसभा चुनाव के संदर्भ में चल रही सीट बंटवारे की चर्चा पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीट बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है और यह मुद्दा एक-दो दिन में सुलझने की उम्मीद है। हालांकि, इस बार गठबंधन में सीटों का बंटवारा पिछले चुनाव की तुलना में अधिक जटिल है।

भट्टाचार्य ने बिहार में एसआईआर के दौरान हुई गड़बड़ियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि लगभग 10 प्रतिशत समर्थकों के नाम, जो सूची में शामिल होने चाहिए थे, उसमें नहीं हैं। इस समस्या को हल करने के लिए उनकी पार्टी ने प्रयास किए हैं, लेकिन यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में हुई घटना का जिक्र किया, जहां मुख्य न्यायाधीश पर 'हमले' की कोशिश की गई। भट्टाचार्य ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत बताया और कहा कि इस तरह की स्थिति को एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, "किसी ने नहीं सोचा था कि भारत में ऐसा दिन आएगा जब अदालत में ऐसी घटना होगी। इतना ही नहीं, इस तरह की घटना में संलिप्त हमलावरों को 'हीरो' भी बनाया जाएगा। यह देश और समाज के लिए खतरनाक है कि हम इस तरह का कृत्य करने वाले लोगों को नायक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार कोई अलग देश नहीं है, लेकिन उसे अपने मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से विचार करना होगा। भट्टाचार्य ने न्यायपालिका, संविधान और दलितों पर हो रहे हमलों को बिहार चुनाव का प्रमुख मुद्दा बताया और कहा कि इसे बेबाकी से उठाया जाएगा। सीपीआई (माले) बिहार चुनाव में इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष को तेज करेगी।

उन्होंने कहा कि बिहार एक ईमानदार राज्य है। हमें उम्मीद है कि यहां का लोकतंत्र संविधान के पक्ष में एक मजबूत जवाब देगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर इन चुनौतियों का सामना करने का आह्वान किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना आवश्यक है कि बिहार के मुद्दे केवल राज्य के नहीं हैं। न्यायपालिका, संविधान और दलितों के अधिकारों पर हो रहे हमले देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन मुद्दों को उठाना और जनता के बीच जागरूकता फैलाना आवश्यक है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीट बंटवारे का फैसला कब होगा?
दीपांकर भट्टाचार्य के अनुसार, सीट बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में है और यह एक-दो दिन में सुलझ जाएगा।
भट्टाचार्य ने किस विषय पर चिंता व्यक्त की?
उन्होंने बिहार में एसआईआर के दौरान हुई गड़बड़ियों और न्यायपालिका पर हमलों को लेकर चिंता जताई।
सीपीआई (माले) की चुनावी रणनीति क्या है?
सीपीआई (माले) संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए लोगों के बीच जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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