23 सितंबर 2026
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प्रोजेक्ट कौशलवीर: भारतीय सेना ने अग्निवीरों को दिया उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाणन

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प्रोजेक्ट कौशलवीर: भारतीय सेना ने अग्निवीरों को दिया उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाणन

सारांश

भारतीय सेना ने 'प्रोजेक्ट कौशलवीर' के ज़रिए अग्निवीरों की सबसे बड़ी चिंता — सेवानिवृत्ति के बाद क्या? — का संस्थागत जवाब दिया है। सेवाकाल में ही उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल और NIOS-IGNOU के प्रमाण-पत्र देकर सेना ने 'योद्धा प्रथम' दृष्टिकोण को ठोस आकार दिया।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 23 सितंबर 2026 को पहला कौशल दिवस आयोजित कर प्रोजेक्ट कौशलवीर की सफलता रेखांकित की।
इस पहल के तहत अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को सेवाकाल में ही उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल प्रशिक्षण और औपचारिक प्रमाणन दिया जाता है।
अग्निवीरों के पहले बैच को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल विपुल शिंगल ने की; IGNOU और NIOS के प्रमुख भी उपस्थित रहे।
सेना ने इस पहल को 'जय से विजय' और 'योद्धा प्रथम' दृष्टिकोण का हिस्सा बताया है।

भारतीय सेना ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पहला कौशल दिवस आयोजित कर 'प्रोजेक्ट कौशलवीर' की सफलता को रेखांकित किया — एक ऐसी पहल जो अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को सैन्य सेवा के दौरान ही उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल प्रशिक्षण और औपचारिक प्रमाणन उपलब्ध कराती है। इस कार्यक्रम में अग्निवीरों के पहले बैच को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक प्रमाण-पत्र सौंपे गए, जो सेना और शिक्षा जगत के बीच एक ऐतिहासिक सेतु है।

प्रोजेक्ट कौशलवीर: मुख्य घटनाक्रम

कौशल दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल विपुल शिंगल, डीसीओएएस (आईएसएंडटी) ने की। इसमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) की कुलपति प्रोफेसर उमा कांजीलाल और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के अध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश मिश्रा भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में प्रोजेक्ट कौशलवीर कंपेंडियम और NIOS प्रिसिस का विमोचन किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना न केवल सैनिकों को युद्धकौशल में दक्ष बनाना चाहती है, बल्कि उनके सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन को भी सुरक्षित करना चाहती है।

अग्निवीरों के लिए विशेष महत्व

यह पहल विशेष रूप से अग्निवीरों के लिए प्रासंगिक है, जो चार वर्षों की सेवा के बाद सेना छोड़ते हैं। प्रोजेक्ट कौशलवीर के अंतर्गत, उन्हें सैन्य सेवा के दौरान ऐसे विषयों में प्रशिक्षण दिया जाता है जिन्हें उद्योग जगत मान्यता देता है। इस तरह उनकी सेवावधि समाप्त होते ही उनके पास रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक औपचारिक योग्यता तैयार होती है।

सेना ने इस पहल को अपने 'योद्धा प्रथम' दृष्टिकोण और परिवर्तनकारी अवधारणा 'जय से विजय' का अभिन्न हिस्सा बताया है। 'योद्धा को सक्षम बनाना, भविष्य को तैयार करना' — इसी सोच के साथ यह कार्यक्रम सैन्य प्रशिक्षण को केवल वर्तमान दायित्वों तक सीमित न रखकर भविष्य की संभावनाओं तक विस्तारित करता है।

शिक्षा और सेना का संयोजन

गौरतलब है कि प्रोजेक्ट कौशलवीर के तहत सेवाकाल में हासिल किए गए कौशल को NIOS और IGNOU जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से औपचारिक प्रमाणन से जोड़ा जा रहा है। इससे माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर की शैक्षणिक योग्यता सैनिकों को सेवाकाल के दौरान ही प्राप्त हो सकती है।

यह ऐसे समय में आया है जब अग्निपथ योजना को लेकर रोजगार की चिंताएँ बार-बार उठती रही हैं। प्रोजेक्ट कौशलवीर उन आशंकाओं का एक संस्थागत उत्तर देने का प्रयास करता है, हालाँकि इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता आने वाले बैचों के परिणामों पर निर्भर करेगी।

आम जनता और सैनिकों पर असर

अग्निवीरों के पहले बैच को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक प्रमाण-पत्र मिलना इस बात का संकेत है कि यह पहल केवल कागज़ी नहीं है। उद्योग-मान्यता प्राप्त प्रमाणन से इन युवाओं को निजी क्षेत्र में प्रवेश करना अपेक्षाकृत सुलभ होगा।

सेना के अनुसार, यह कार्यक्रम सैनिकों की वर्तमान सेवा और भविष्य के अवसरों के बीच एक मज़बूत कड़ी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तारित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि NIOS-IGNOU के ये प्रमाण-पत्र निजी क्षेत्र की नियोक्ताओं की नज़र में कितने वज़नी साबित होते हैं। अग्निपथ योजना की आलोचना का केंद्र हमेशा से यही रहा है कि चार साल की सेवा के बाद युवा किस दरवाज़े पर दस्तक दें। कौशलवीर उस दरवाज़े की चाबी बनने का दावा करता है, लेकिन उद्योग जगत द्वारा इन प्रमाणनों की वास्तविक स्वीकार्यता अभी सिद्ध होनी बाकी है। पहले बैच के रोजगार परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन ही बताएगा कि यह पहल नीतिगत नवाचार है या केवल एक सुनियोजित संचार रणनीति।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोजेक्ट कौशलवीर क्या है?
प्रोजेक्ट कौशलवीर भारतीय सेना की एक पहल है जिसके तहत अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को सेवाकाल के दौरान ही उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल प्रशिक्षण और NIOS तथा IGNOU जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से औपचारिक शैक्षणिक प्रमाणन दिया जाता है। इसका उद्देश्य सैनिकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार और उच्च शिक्षा के रास्ते सुगम बनाना है।
अग्निवीरों को इस योजना से क्या फायदा होगा?
चार वर्षीय सैन्य सेवा के बाद सेना छोड़ने वाले अग्निवीरों के पास प्रोजेक्ट कौशलवीर के तहत उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल और माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक शैक्षणिक प्रमाण-पत्र होंगे। इससे निजी क्षेत्र में नौकरी और आगे की पढ़ाई दोनों में उन्हें सुविधा मिलेगी।
कौशल दिवस कार्यक्रम में कौन शामिल हुए?
23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कौशल दिवस की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल विपुल शिंगल, डीसीओएएस (आईएसएंडटी) ने की। IGNOU की कुलपति प्रोफेसर उमा कांजीलाल और NIOS के अध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश मिश्रा भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
प्रोजेक्ट कौशलवीर को सेना के किस दृष्टिकोण से जोड़ा गया है?
भारतीय सेना ने इसे अपने 'योद्धा प्रथम' दृष्टिकोण और परिवर्तनकारी अवधारणा 'जय से विजय' का हिस्सा बताया है। इसका मूल विचार 'योद्धा को सक्षम बनाना, भविष्य को तैयार करना' है — यानी सैन्य प्रशिक्षण को वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं से भी जोड़ना।
अग्निपथ योजना और प्रोजेक्ट कौशलवीर में क्या संबंध है?
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीर केवल चार वर्षों के लिए सेवा में आते हैं, जिससे उनके भविष्य के रोजगार को लेकर चिंताएँ रही हैं। प्रोजेक्ट कौशलवीर उन्हीं चिंताओं का संस्थागत समाधान देने का प्रयास है — सेवाकाल के दौरान ही उन्हें ऐसे कौशल और प्रमाणन देकर जो नागरिक जीवन में काम आ सकें।
राष्ट्र प्रेस
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