प्रोजेक्ट कौशलवीर: भारतीय सेना ने अग्निवीरों को दिया उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाणन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पहला कौशल दिवस आयोजित कर 'प्रोजेक्ट कौशलवीर' की सफलता को रेखांकित किया — एक ऐसी पहल जो अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को सैन्य सेवा के दौरान ही उद्योग-मान्यता प्राप्त कौशल प्रशिक्षण और औपचारिक प्रमाणन उपलब्ध कराती है। इस कार्यक्रम में अग्निवीरों के पहले बैच को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक प्रमाण-पत्र सौंपे गए, जो सेना और शिक्षा जगत के बीच एक ऐतिहासिक सेतु है।
प्रोजेक्ट कौशलवीर: मुख्य घटनाक्रम
कौशल दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल विपुल शिंगल, डीसीओएएस (आईएसएंडटी) ने की। इसमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) की कुलपति प्रोफेसर उमा कांजीलाल और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के अध्यक्ष प्रोफेसर अखिलेश मिश्रा भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रोजेक्ट कौशलवीर कंपेंडियम और NIOS प्रिसिस का विमोचन किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना न केवल सैनिकों को युद्धकौशल में दक्ष बनाना चाहती है, बल्कि उनके सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन को भी सुरक्षित करना चाहती है।
अग्निवीरों के लिए विशेष महत्व
यह पहल विशेष रूप से अग्निवीरों के लिए प्रासंगिक है, जो चार वर्षों की सेवा के बाद सेना छोड़ते हैं। प्रोजेक्ट कौशलवीर के अंतर्गत, उन्हें सैन्य सेवा के दौरान ऐसे विषयों में प्रशिक्षण दिया जाता है जिन्हें उद्योग जगत मान्यता देता है। इस तरह उनकी सेवावधि समाप्त होते ही उनके पास रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक औपचारिक योग्यता तैयार होती है।
सेना ने इस पहल को अपने 'योद्धा प्रथम' दृष्टिकोण और परिवर्तनकारी अवधारणा 'जय से विजय' का अभिन्न हिस्सा बताया है। 'योद्धा को सक्षम बनाना, भविष्य को तैयार करना' — इसी सोच के साथ यह कार्यक्रम सैन्य प्रशिक्षण को केवल वर्तमान दायित्वों तक सीमित न रखकर भविष्य की संभावनाओं तक विस्तारित करता है।
शिक्षा और सेना का संयोजन
गौरतलब है कि प्रोजेक्ट कौशलवीर के तहत सेवाकाल में हासिल किए गए कौशल को NIOS और IGNOU जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से औपचारिक प्रमाणन से जोड़ा जा रहा है। इससे माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर की शैक्षणिक योग्यता सैनिकों को सेवाकाल के दौरान ही प्राप्त हो सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब अग्निपथ योजना को लेकर रोजगार की चिंताएँ बार-बार उठती रही हैं। प्रोजेक्ट कौशलवीर उन आशंकाओं का एक संस्थागत उत्तर देने का प्रयास करता है, हालाँकि इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता आने वाले बैचों के परिणामों पर निर्भर करेगी।
आम जनता और सैनिकों पर असर
अग्निवीरों के पहले बैच को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक प्रमाण-पत्र मिलना इस बात का संकेत है कि यह पहल केवल कागज़ी नहीं है। उद्योग-मान्यता प्राप्त प्रमाणन से इन युवाओं को निजी क्षेत्र में प्रवेश करना अपेक्षाकृत सुलभ होगा।
सेना के अनुसार, यह कार्यक्रम सैनिकों की वर्तमान सेवा और भविष्य के अवसरों के बीच एक मज़बूत कड़ी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तारित किए जाने की संभावना है।