तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार पर केए सेंगोट्टैयन का संकेत, जयललिता मॉडल पर चलेगी विजय सरकार
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के वरिष्ठ मंत्री केए सेंगोट्टैयन ने रविवार, 17 मई को कोयंबटूर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया कि मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार आने वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती है। उन्होंने इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कार्यकाल में अपनाई गई क्रमिक कैबिनेट-निर्माण रणनीति का उदाहरण दिया।
जयललिता मॉडल का संदर्भ
सेंगोट्टैयन ने याद दिलाया कि जयललिता ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में केवल सात मंत्रियों के साथ सरकार चलाई थी और बाद में अलग-अलग चरणों में मंत्रिमंडल को बढ़ाया था। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार भी इसी मॉडल पर आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय की संरचना समय के साथ बदल सकती है, हालाँकि इसकी गति और सीमा का अंतिम निर्णय पूरी तरह मुख्यमंत्री पर निर्भर है।
मुख्यमंत्री विजय की भूमिका केंद्रीय
सेंगोट्टैयन ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट विस्तार जैसे बड़े फैसले नेतृत्व स्तर पर गहन विचार-विमर्श के बाद ही लिए जाते हैं। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री विजय जो कुछ भी लागू करना चाहते हैं, यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि वह पूरा हो।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मंत्रिमंडल विस्तार का आखिरी फैसला मुख्यमंत्री ही लेंगे।
AIADMK को मंत्री पद की अटकलें
पत्रकारों ने जब सेंगोट्टैयन से सीधे पूछा कि भविष्य के कैबिनेट फेरबदल में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) को कितनी सीटें मिल सकती हैं, तो उन्होंने इस तरह की किसी भी अटकल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'आप ही ऐसा कह रहे हैं। हमने इस बारे में कुछ नहीं कहा है।' उनके अनुसार, अभी तक इस विषय पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब विजय सरकार की भविष्य की संरचना और मंत्रिमंडल में अतिरिक्त नेताओं को शामिल करने की संभावना को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो रही हैं। गौरतलब है कि नई सरकारें अक्सर शुरुआती महीनों में सीमित मंत्रिमंडल के साथ काम करती हैं और बाद में राजनीतिक समीकरणों के आधार पर विस्तार करती हैं।
आगे क्या
फिलहाल कैबिनेट विस्तार की कोई आधिकारिक तारीख या घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, AIADMK की संभावित भागीदारी को लेकर अटकलें जारी रहेंगी, लेकिन अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री विजय के विवेक पर निर्भर करेगा।