क्या शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमनाथ मंदिर पर प्रधानमंत्री मोदी के लेख की प्रशंसा की?

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क्या शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमनाथ मंदिर पर प्रधानमंत्री मोदी के लेख की प्रशंसा की?

सारांश

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री मोदी के सोमनाथ मंदिर पर लेख की प्रशंसा की। उन्होंने गजनवी के आक्रमण की बात की और कहा कि सोमनाथ आज भी अडिग है। मोदी का ब्लॉग इस मंदिर के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता है, जो इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है।

Key Takeaways

  • सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
  • प्रधानमंत्री मोदी का समर्पण और संवेदनाएं
  • गजनवी का आक्रमण और उसके प्रभाव
  • शंकराचार्य का संदेश
  • मंदिर का पुनर्निर्माण और उसकी यात्रा

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लेख की सराहना की है। उन्होंने बताया कि एक हजार वर्ष पूर्व इस मंदिर को नष्ट करने का पहला प्रयास किया गया था। आज भी यह मंदिर अडिग खड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पीड़ा, संवेदनाएं और भावनाएं व्यक्त की हैं।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा, "प्रधानमंत्री मोदी का ब्लॉग उस पीड़ा को लेकर था जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया गया था। महमूद गजनवी ने अपनी सेना के साथ मंदिर को क्षति पहुंचाई थी। मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं को नुकसान हुआ था। वह सोचता था कि मंदिर और मूर्ति तोड़ने से सब खंडित हो जाएगा। एक हजार वर्ष पहले यह प्रयास हुआ।"

उन्होंने आगे कहा, "देश के प्रधानमंत्री ने अपने ब्लॉग के माध्यम से संदेश दिया है कि तुम मंदिर और मूर्ति तोड़ सकते हो, लेकिन सोमनाथ को नहीं तोड़ सकते हो। एक हजार वर्ष बीत चुका है, सोमनाथ वहीं है। तुम (गजनवी) आए और चले गए। इसलिए भविष्य में इस प्रकार की कोशिश न करें।" शंकराचार्य ने कहा कि पीएम मोदी का यह संदेश स्वागत योग्य कदम है।

इसी बीच, अविमुक्तेश्वरानंद ने मांग की कि देश में जहाँ कहीं भी गजनवी का नाम है, वहाँ से उसे हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गजनवी ने निश्चित रूप से अच्छा कार्य नहीं किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व- अटूट आस्था के 1,000 वर्ष' शीर्षक के साथ सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले को लेकर लेख लिखा। उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले को मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया।

पीएम मोदी ने लिखा, "1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहाँ के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है। जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है। हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं। यह ऐसा दुख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है।"

उन्होंने आगे लिखा, "एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुनः निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वह समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे।"

इस लेख के बाद सोमनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहितों और सोमपुरा ब्राह्मण समुदाय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को स्मरण करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

Point of View

जो न केवल हमारे धार्मिक धरोहर को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है। शंकराचार्य का बयान और पीएम मोदी का लेख दोनों ही एक संगठित दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो देशवासियों को अपने सांस्कृतिक मूल्यों को समझने और उन्हें संजोने के लिए प्रेरित करता है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
सोमनाथ मंदिर को भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है, जिसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है।
गजनवी का सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कब हुआ था?
गजनवी का सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण 1026 में हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ पर हुए आक्रमण को मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया।
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