8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शशि थरूर का जम्मू दौरा: जितेंद्र सिंह को कहा शुक्रिया, स्थानीय कांग्रेस नेता नाराज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शशि थरूर का जम्मू दौरा: जितेंद्र सिंह को कहा शुक्रिया, स्थानीय कांग्रेस नेता नाराज

सारांश

शशि थरूर का जम्मू दौरा संसदीय निरीक्षण से आगे निकल गया — जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की पुरानी क्लिनिक देखी और एक्स पर धन्यवाद दिया। जवाब में सिंह ने थरूर की सास के इलाज का ज़िक्र किया। इस बीच स्थानीय कांग्रेस नेता पार्टी कार्यकर्ताओं से न मिलने पर नाराज़ रहे।

मुख्य बातें

शशि थरूर ने 22 जून 2026 को जम्मू स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र का निरीक्षण किया और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की।
थरूर ने एक्स पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की पुरानी क्लिनिक — जो अब फार्मेसी है — का उल्लेख करते हुए उनका धन्यवाद किया।
जितेंद्र सिंह ने बताया कि वे उसी क्लिनिक में दो दशकों तक डायबेटोलॉजिस्ट रहे और थरूर की सास श्रीमती दास का भी इलाज करते थे।
थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी समिति का कार्यक्षेत्र विदेश मामलों तक सीमित है, घरेलू सुरक्षा या आंतरिक नीतियाँ इसमें शामिल नहीं।
कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता से न मिलने पर थरूर की आलोचना की।

संसद की स्थायी समिति (विदेश मामले) के अध्यक्ष शशि थरूर ने 22 जून 2026 को जम्मू स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट सेवा केंद्र का निरीक्षण किया। इससे पूर्व उन्होंने कश्मीर घाटी का भी दौरा किया था। यह दौरा भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों की संसदीय समीक्षा तथा स्थानीय पासपोर्ट कार्यालयों के कामकाज की जाँच के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

दौरे का मुख्य घटनाक्रम

थरूर ने जम्मू में पासपोर्ट सेवा केंद्र के निरीक्षण के दौरान पारंपरिक लोकनृत्य कलाकारों द्वारा स्वागत किया गया। निरीक्षण के बाद उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी भेंट की। उपराज्यपाल से मुलाकात के पश्चात थरूर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर अग्रसर हो रहा है।

थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी समिति का कार्यक्षेत्र केवल विदेश मामलों तक सीमित है और घरेलू सुरक्षा अथवा आंतरिक नीतियों का आकलन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

थरूर का एक्स पोस्ट और जितेंद्र सिंह से जुड़ा प्रसंग

थरूर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि जम्मू पासपोर्ट कार्यालय परिसर में एक फार्मेसी है, जो पहले दो दशकों तक क्लिनिक के रूप में संचालित थी। इसी क्लिनिक में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह एक चिकित्सक के रूप में मरीजों की सेवा करते थे। थरूर ने लिखा कि यह इमारत के एक कोने में स्थित है और यह याद दिलाता है कि राजनीति से पहले और बाद में सांसदों का एक वास्तविक जीवन भी होता है। उन्होंने जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए लिखा कि 'अगर आप मेरे साथ होते तो अच्छा होता' — और उनका धन्यवाद किया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह एक मित्रतापूर्ण और स्नेहपूर्ण पहल थी। उन्होंने बताया कि इसी क्लिनिक में वे डायबेटोलॉजिस्ट और चिकित्सक के रूप में दो दशकों तक मरीजों की सेवा करते थे। जितेंद्र सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि इसी क्लिनिक में वे शशि थरूर की सास और सुनींदा जी की माता, श्रीमती दास का भी इलाज करते थे, जो टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित थीं। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात प्रेरणादायक रही और उन्हें खुशी होती अगर उन्हें पहले से इसकी जानकारी होती।

स्थानीय कांग्रेस की नाराज़गी

इस दौरे को लेकर कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने थरूर की आलोचना की। स्थानीय नेताओं का कहना है कि थरूर ने दौरे के दौरान न तो पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और न ही स्थानीय जनता से संवाद किया। यह असंतोष ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में अपनी ज़मीनी उपस्थिति मज़बूत करने की कोशिश में है।

दौरे का राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर का संसदीय दौरा ऐसे समय में हुआ जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं। थरूर का यह दौरा एक संसदीय समिति के प्रमुख के रूप में था, जो विदेश नीति के क्षेत्र में संसद की निगरानी भूमिका को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी नेताओं के जम्मू-कश्मीर दौरों को राजनीतिक नज़रिए से भी देखा जाता है।

आगे क्या

थरूर की समिति की रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पासपोर्ट कार्यालयों के कामकाज और विदेश नीति से जुड़े पहलुओं पर सिफारिशें अपेक्षित हैं। स्थानीय कांग्रेस इकाई की नाराज़गी पार्टी के भीतर आंतरिक समन्वय पर सवाल उठाती है, जिस पर आने वाले दिनों में चर्चा हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि अपनी ही पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की। यह घटना दर्शाती है कि संसदीय समितियाँ कभी-कभी दलगत सीमाओं से परे व्यक्तिगत सौहार्द की भूमि बन जाती हैं — जो लोकतंत्र के लिए स्वस्थ है, लेकिन पार्टी संगठन के लिए असुविधाजनक। कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई की नाराज़गी यह भी संकेत देती है कि केंद्रीय नेतृत्व और ज़मीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी अभी भी बनी हुई है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशि थरूर जम्मू-कश्मीर दौरे पर क्यों गए थे?
थरूर संसद की स्थायी समिति (विदेश मामले) के अध्यक्ष के रूप में भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन संबंधों की समीक्षा तथा स्थानीय पासपोर्ट कार्यालयों के कामकाज की जाँच के लिए गए थे। उन्होंने जम्मू पासपोर्ट सेवा केंद्र का निरीक्षण किया और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी मुलाकात की।
थरूर ने जितेंद्र सिंह को धन्यवाद क्यों कहा?
थरूर ने एक्स पर पोस्ट किया कि जम्मू पासपोर्ट कार्यालय में एक फार्मेसी है जो पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की क्लिनिक थी, जहाँ वे दो दशकों तक डायबेटोलॉजिस्ट के रूप में काम करते थे। इस भावनात्मक प्रसंग को साझा करते हुए थरूर ने सिंह का धन्यवाद किया।
जितेंद्र सिंह ने थरूर के पोस्ट पर क्या कहा?
जितेंद्र सिंह ने इसे मित्रतापूर्ण और स्नेहपूर्ण पहल बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी क्लिनिक में वे थरूर की सास और सुनींदा जी की माता, श्रीमती दास का इलाज करते थे, जो टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित थीं।
स्थानीय कांग्रेस नेता थरूर से नाराज़ क्यों हैं?
कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई का कहना है कि थरूर ने दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं या स्थानीय जनता से मुलाकात नहीं की। नेताओं का मानना है कि इस तरह के दौरों में पार्टी संगठन से संवाद होना चाहिए था।
थरूर की समिति के अधिकार क्षेत्र में क्या आता है?
थरूर ने स्पष्ट किया कि संसद की स्थायी समिति (विदेश मामले) का कार्यक्षेत्र केवल विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक सीमित है। घरेलू सुरक्षा, आंतरिक नीतियाँ या प्रशासनिक मुद्दे इस समिति के दायरे में नहीं आते।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले