शशि थरूर ने जम्मू में पासपोर्ट देरी पर उठाए सवाल, पुलिस वेरिफिकेशन की धीमी रफ्तार पर अधिकारी तलब
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जम्मू दौरे के दौरान 22 जून 2026 को पासपोर्ट सेवाओं में व्याप्त देरी और प्रशासनिक अड़चनों को लेकर तीखे सवाल उठाए। विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की जम्मू में आयोजित बैठक में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) और पासपोर्ट सेवा केंद्रों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में क्या उठे मुद्दे
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बैठक का ब्यौरा साझा किया। उन्होंने लिखा, 'बैठक के दौरान पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में हो रही देरी, पुलिस वेरिफिकेशन में लगने वाले समय और अन्य प्रशासनिक बाधाओं पर अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे गए।' उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में पासपोर्ट विभाग, पुलिस, सीआईडी और डाक विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
थरूर के अनुसार, कई मामलों में अनावश्यक देरी की शिकायतें सामने आई हैं, जिन्हें समिति ने गंभीरता से उठाया। अधिकारियों ने सुधार का आश्वासन दिया है।
RPO का निरीक्षण: संतोषजनक, पर सुधार की गुंजाइश
संसदीय समिति ने जम्मू स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय और पासपोर्ट सेवा केंद्र का सीधा निरीक्षण भी किया। थरूर ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि प्रारंभिक निरीक्षण में इन संस्थानों का कामकाज संतोषजनक और व्यवस्थित प्रतीत हुआ, हालाँकि सुधार की गुंजाइश को भी स्वीकार किया गया। यह दौरा ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में पासपोर्ट आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है और पुलिस वेरिफिकेशन में होने वाली देरी आम नागरिकों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है।
दौरे के अन्य पड़ाव
जम्मू दौरे के दौरान थरूर और समिति के अन्य सदस्यों का पारंपरिक लोक नर्तकों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। थरूर ने एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे उस फार्मेसी को देखने भी गए, जो लगभग 20 वर्षों तक एक क्लिनिक के रूप में कार्यरत रही — जहाँ प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन से पहले चिकित्सा प्रैक्टिस की थी। थरूर ने इसे इस बात का प्रतीक बताया कि अधिकांश सांसदों का राजनीति से पहले और बाद में भी एक सामान्य जीवन होता है।
श्रीनगर में नालंदा डायलॉग और करण सिंह से मुलाकात
इससे पहले थरूर ने श्रीनगर में आयोजित नालंदा डायलॉग में भी भाग लिया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में उन्हें वरिष्ठ नेता डॉ. करण सिंह के साथ समापन भाषण देने का अवसर मिला। थरूर ने करण सिंह को अपना पुराना मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक बताया, जिनकी कश्मीर के इतिहास और भारतीय संस्कृति पर गहरी पकड़ है। कार्यक्रम का समापन कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले भव्य सांस्कृतिक आयोजन के साथ हुआ।
आगे क्या
संसदीय समिति की इस समीक्षा के बाद अधिकारियों द्वारा दिए गए सुधार के आश्वासन पर अमल होता है या नहीं, यह देखना अहम होगा। गौरतलब है कि पुलिस वेरिफिकेशन में देरी की समस्या केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है — यह देशभर में पासपोर्ट आवेदकों की एक प्रमुख शिकायत रही है। समिति की सिफारिशें संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है।