पासपोर्ट और आधार को नागरिकता का वैध प्रमाण बनाए कानून: शशि थरूर की संशोधन माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार, 26 जून को माँग की कि भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड दोनों को कानूनी रूप से भारतीय नागरिकता के वैधानिक प्रमाण के रूप में मान्यता दी जाए — जब तक कि सरकार उन्हें औपचारिक रूप से रद्द या वापस न करे। उन्होंने इसके लिए मौजूदा कानून में संशोधन की अपील की, यह कहते हुए कि मौजूदा स्थिति करोड़ों नागरिकों के लिए एक गंभीर कानूनी विरोधाभास पैदा करती है।
विवाद की जड़: विदेश मंत्रालय का बयान
थरूर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए विदेश मंत्रालय के उस हालिया बयान पर सवाल उठाए, जिसमें कहा गया कि भारतीय पासपोर्ट मुख्यतः एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का निर्विवाद प्रमाण। उन्होंने लिखा कि यह बयान — विशेषकर 'पासपोर्ट सेवा दिवस' पर जारी होने के कारण — जनता में हैरानी और राजनीतिक बहस का कारण बन गया।
1967 के पासपोर्ट अधिनियम का पेच
थरूर ने स्पष्ट किया कि सरकार का यह रुख पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 पर आधारित है, जो विशेष परिस्थितियों में — जैसे जनहित के मामलों में — सरकार को गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने की अनुमति देती है। हालाँकि, उनका तर्क है कि इस अपवाद-आधारित प्रावधान को आधार बनाकर पासपोर्ट की नागरिकता-प्रमाण की साख को कमज़ोर करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक के लिए दशकों से पासपोर्ट पहचान और नागरिकता का सर्वाधिक विश्वसनीय दस्तावेज़ माना जाता रहा है।
कठोर सत्यापन के बाद भी प्रमाण नहीं?
थरूर ने रेखांकित किया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले सरकार पुलिस सत्यापन, दस्तावेजों की जाँच और कई स्तरों पर नागरिकता की पुष्टि करती है। ऐसे में उनका सवाल है कि इतनी कठोर प्रक्रिया के बाद जारी किया गया दस्तावेज यदि नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाए, तो यह एक बड़ा कानूनी विरोधाभास है। उन्होंने पूछा, 'यदि पासपोर्ट नागरिकता साबित नहीं करता, तो फिर उसका वास्तविक उद्देश्य क्या है?'
आधार की सीमा और नई व्यवस्था का सुझाव
थरूर ने आधार कार्ड के संदर्भ में याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार केवल पहचान और पते का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। इससे एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई है — करोड़ों भारतीयों के पास सरकार द्वारा जारी दस्तावेज होने के बावजूद उनके पास नागरिकता का कोई निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जाता। उन्होंने सुझाव दिया कि चूँकि आधार फिलहाल 182 दिन के निवास के आधार पर जारी होता है, इसलिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को गैर-नागरिक निवासियों के लिए अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी करना चाहिए।
स्थायी समाधान की माँग
थरूर ने माँग की कि सरकार कानून में संशोधन करे और पासपोर्ट तथा आधार कार्ड दोनों को भारतीय नागरिकता का वैध और अंतिम प्रमाण घोषित करे — जब तक कि उन्हें सरकार औपचारिक रूप से रद्द न करे। उनके अनुसार इससे नागरिकों और गैर-नागरिकों के बीच स्पष्ट अंतर होगा, पहचान सत्यापन की प्रक्रिया सरल बनेगी और अनावश्यक प्रशासनिक विवादों का अंत हो सकेगा।