पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं? गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार से माँगा स्पष्ट जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 25 जून 2026 को केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार करते हुए पूछा कि यदि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का वैध प्रमाण नहीं माना जाता, तो फिर नागरिकता साबित करने का अधिकृत दस्तावेज़ आखिर कौन-सा है। असम से सांसद गोगोई ने इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी को जनता के बीच भ्रम का कारण बताया और तत्काल स्पष्टीकरण की माँग की।
मुख्य सवाल: पासपोर्ट की वैधानिक स्थिति
गोगोई ने तर्क दिया कि भारत सरकार द्वारा जारी पासपोर्ट महज एक साधारण दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक ऐसा आधिकारिक प्रमाण-पत्र है जिसे दुनिया भर की सरकारें मान्यता देती हैं। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि यदि विदेश मंत्रालय यह कहता है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो क्या इसका अर्थ यह निकाला जाए कि सरकार गैर-नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट जारी करती है?
उन्होंने आगे पूछा कि क्या चीन, श्रीलंका या किसी अन्य विदेशी देश के नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिया जाता है? यदि नहीं, तो पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न मानने का तर्क किस आधार पर टिका है — यह प्रश्न उन्होंने सरकार के सामने रखा।
दस्तावेज़ों की घटती विश्वसनीयता पर चिंता
गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार एक के बाद एक नागरिकता-संबंधी दस्तावेज़ों को अपर्याप्त बताती जा रही है। उनके अनुसार, वोटर आईडी, पैन कार्ड, आधार कार्ड और अब पासपोर्ट — इन सभी के बारे में यह कहा जा रहा है कि ये नागरिकता के अंतिम प्रमाण नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि इस क्रमिक अवमूल्यन से आम नागरिकों में अनिश्चितता और भय का माहौल बन रहा है।
एनआरसी की आशंका और असम का संदर्भ
असम से आने वाले गोगोई ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि असम के लोगों ने NRC की राजनीति और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहद करीब से देखा है। यह ऐसे समय में आया है जब असम में NRC को लेकर वर्षों की कानूनी और प्रशासनिक उठापटक अभी भी लोगों की स्मृति में ताज़ी है। गोगोई ने आशंका जताई कि कहीं सरकार किसी वैकल्पिक प्रक्रिया के ज़रिए NRC जैसी व्यवस्था को फिर से लागू करने की तैयारी तो नहीं कर रही।
सरकार से स्पष्टीकरण की माँग
गोगोई ने ज़ोर देकर कहा कि नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार नागरिकता-संबंधी दस्तावेज़ों की वैधानिक स्थिति पर क्या दृष्टिकोण रखती है। उन्होंने माँग की कि केंद्र सरकार संसद या सार्वजनिक मंच पर यह स्पष्ट करे कि आखिर नागरिकता का अधिकृत प्रमाण किसे माना जाएगा, ताकि जनमानस में व्याप्त भ्रम दूर हो सके।
गौरतलब है कि नागरिकता और दस्तावेज़ीकरण का यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के क्रियान्वयन को लेकर भी बहस जारी है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसदीय चर्चा का केंद्र बन सकता है।