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पासपोर्ट-नागरिकता विवाद: सलमान खुर्शीद का सवाल — इतने साल बाद स्पष्टीकरण की ज़रूरत क्यों?

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पासपोर्ट-नागरिकता विवाद: सलमान खुर्शीद का सवाल — इतने साल बाद स्पष्टीकरण की ज़रूरत क्यों?

सारांश

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट-नागरिकता स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि पासपोर्ट अधिनियम खुद नागरिकता से जुड़ाव की पुष्टि करता है। उन्होंने NCERT पाठ्यक्रम, राम मंदिर दान विवाद और UP में विपक्षी गठबंधन पर भी सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

सलमान खुर्शीद ने 25 जून 2025 को विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट-नागरिकता स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए।
पासपोर्ट अधिनियम के अनुसार गैर-नागरिक को पासपोर्ट देने से इनकार किया जा सकता है — खुर्शीद ने इसे नागरिकता से जुड़ाव का प्रमाण बताया।
NCERT कक्षा 9 की पुस्तक में आपातकाल अध्याय पर उन्होंने कहा — इतिहास को पूरी सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया जाए, चुनिंदा तथ्यों के साथ नहीं।
राम मंदिर दान विवाद में एफआईआर के बिना सीधे एसआईटी गठित करने पर खुर्शीद ने प्रक्रिया पर सवाल उठाया।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस- सपा गठबंधन को व्यावहारिक बताया, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व पर छोड़ा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने 25 जून 2025 को पासपोर्ट और नागरिकता के बीच के कानूनी संबंध पर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण — कि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं — कई नागरिकों को चौंका सकता है और सरकार को यह बताना चाहिए कि इतने वर्षों बाद यह सफाई देने की नौबत क्यों आई।

पासपोर्ट और नागरिकता: कानूनी पेचीदगी

खुर्शीद ने ध्यान दिलाया कि पासपोर्ट अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है, तो उसे पासपोर्ट देने से इनकार किया जा सकता है। उनके अनुसार, इस प्रावधान से यह स्वाभाविक रूप से निकलता है कि पासपोर्ट और नागरिकता के बीच कोई न कोई संबंध अवश्य है। उन्होंने माना कि नागरिकता का अंतिम निर्धारण नागरिकता अधिनियम के तहत होता है, लेकिन दोनों कानूनों को एक साथ पढ़ने पर यह संबंध और स्पष्ट हो जाता है।

उन्होंने कहा कि पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए नागरिक को कड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं और कई दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए यह अंतर समझना सहज नहीं है। खुर्शीद ने सरकार से माँग की कि वह यह भी स्पष्ट करे कि यह सफाई अभी क्यों ज़रूरी हो गई, खासकर जब देश के कई हिस्सों में नागरिकता और मतदान के अधिकार पर सवाल उठ रहे हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया

2013 के बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस निर्णय पर — जिसमें कहा गया था कि अकेले पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता सिद्ध नहीं की जा सकती — खुर्शीद ने कहा कि न्यायालयों के कई फैसले आते हैं और उन पर अपील भी होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार उस फैसले को आधार मानती है, तो उसे उसी समय स्पष्ट करना चाहिए था। उनके अनुसार, आज की परिस्थितियाँ तब से काफी बदल चुकी हैं।

NCERT पाठ्यक्रम और आपातकाल विवाद

NCERT की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर अध्याय जोड़े जाने को लेकर खुर्शीद ने कहा कि सरकार के पास पाठ्यपुस्तकों में सामग्री जोड़ने का अधिकार है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि किसी घटना को किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता कि आपातकाल लगाया गया था, परंतु उसके पीछे की परिस्थितियाँ और उसके परिणाम भी समान रूप से बताए जाने चाहिए।

खुर्शीद ने जोर देकर कहा कि पाठ्यपुस्तक में यह भी उल्लेख होना चाहिए कि आपातकाल के बाद चुनाव हुए, कांग्रेस उस चुनाव में हारी, और बाद में वह दो-तिहाई बहुमत के साथ पुनः सत्ता में आई। उनके अनुसार, इतिहास को चुनिंदा तथ्यों के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आपातकाल के 51 वर्ष पर 'संविधान हत्या दिवस' मनाए जाने पर उन्होंने कहा कि संविधान सभी को अभिव्यक्ति का अधिकार देता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि संविधान आज भी जीवित है और विभिन्न सरकारों के आने-जाने के बावजूद उसकी शक्ति बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज संविधान को कमज़ोर करने के सवाल उठ रहे हैं और पहले उन सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।

राम मंदिर दान विवाद पर सवाल

राम मंदिर दान विवाद पर खुर्शीद ने कहा कि यदि वास्तव में कोई अनियमितता हुई है, तो सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत सबसे पहले एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि एफआईआर के बिना सीधे एसआईटी गठित करने का निर्णय क्यों लिया गया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और BJP के करीब माने जाने वाले लोग भी अब इस विवाद को लेकर चिंता जता रहे हैं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की संभावना

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन पर खुर्शीद ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन ही सबसे व्यावहारिक रास्ता दिखता है। उन्होंने तर्क दिया कि जहाँ-जहाँ विपक्षी गठबंधन बने, वहाँ बेहतर परिणाम मिले और जहाँ नहीं बने, वहाँ नुकसान हुआ। उन्होंने इंडिया ब्लॉक को एक व्यापक मंच बताते हुए कहा कि इसे जमीनी स्तर तक मज़बूत करना विपक्ष की जिम्मेदारी है, हालाँकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। पासपोर्ट अधिनियम और नागरिकता अधिनियम के बीच की यह कानूनी बारीकियाँ आम नागरिक के लिए भ्रामक हैं, और सरकार ने अब तक यह नहीं बताया कि यह सफाई अभी क्यों ज़रूरी हुई। NCERT विवाद में भी असली प्रश्न पाठ्यक्रम में बदलाव का नहीं, बल्कि इतिहास की चयनात्मक प्रस्तुति का है — जो शिक्षा को राजनीतिक उपकरण बनाने के खतरे की ओर इशारा करता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण न मानने की बात क्यों कही?
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और नागरिकता का अंतिम निर्धारण नागरिकता अधिनियम के तहत होता है। यह स्पष्टीकरण 2013 के बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस फैसले के अनुरूप है जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट अकेले नागरिकता सिद्ध नहीं करता।
सलमान खुर्शीद का पासपोर्ट-नागरिकता विवाद पर क्या कहना है?
खुर्शीद का कहना है कि पासपोर्ट अधिनियम स्वयं कहता है कि गैर-नागरिक को पासपोर्ट देने से इनकार किया जा सकता है, इसलिए दोनों के बीच कोई न कोई संबंध अवश्य है। उन्होंने सरकार से माँग की कि वह यह भी बताए कि इतने वर्षों बाद यह स्पष्टीकरण देने की ज़रूरत क्यों पड़ी।
NCERT की कक्षा 9 की किताब में आपातकाल पर खुर्शीद की क्या आपत्ति है?
खुर्शीद ने आपातकाल अध्याय जोड़ने का विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने माँग की कि इतिहास को पूरी सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार, पाठ्यपुस्तक में यह भी बताया जाना चाहिए कि आपातकाल के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस हारी और बाद में दो-तिहाई बहुमत से वापस आई।
राम मंदिर दान विवाद में एफआईआर के बिना SIT क्यों बनाई गई?
खुर्शीद ने सवाल उठाया कि सामान्य कानूनी प्रक्रिया में पहले एफआईआर दर्ज होती है, फिर जाँच होती है। एफआईआर के बिना सीधे SIT गठित करना असामान्य है और इस पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-सपा गठबंधन की क्या संभावना है?
खुर्शीद ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन सबसे व्यावहारिक रास्ता है और इंडिया ब्लॉक को जमीनी स्तर पर मज़बूत करना विपक्ष की जिम्मेदारी है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व लेगा।
राष्ट्र प्रेस
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