पासपोर्ट-नागरिकता विवाद: सलमान खुर्शीद का सवाल — इतने साल बाद स्पष्टीकरण की ज़रूरत क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने 25 जून 2025 को पासपोर्ट और नागरिकता के बीच के कानूनी संबंध पर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण — कि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं — कई नागरिकों को चौंका सकता है और सरकार को यह बताना चाहिए कि इतने वर्षों बाद यह सफाई देने की नौबत क्यों आई।
पासपोर्ट और नागरिकता: कानूनी पेचीदगी
खुर्शीद ने ध्यान दिलाया कि पासपोर्ट अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है, तो उसे पासपोर्ट देने से इनकार किया जा सकता है। उनके अनुसार, इस प्रावधान से यह स्वाभाविक रूप से निकलता है कि पासपोर्ट और नागरिकता के बीच कोई न कोई संबंध अवश्य है। उन्होंने माना कि नागरिकता का अंतिम निर्धारण नागरिकता अधिनियम के तहत होता है, लेकिन दोनों कानूनों को एक साथ पढ़ने पर यह संबंध और स्पष्ट हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए नागरिक को कड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं और कई दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। ऐसे में आम आदमी के लिए यह अंतर समझना सहज नहीं है। खुर्शीद ने सरकार से माँग की कि वह यह भी स्पष्ट करे कि यह सफाई अभी क्यों ज़रूरी हो गई, खासकर जब देश के कई हिस्सों में नागरिकता और मतदान के अधिकार पर सवाल उठ रहे हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया
2013 के बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस निर्णय पर — जिसमें कहा गया था कि अकेले पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता सिद्ध नहीं की जा सकती — खुर्शीद ने कहा कि न्यायालयों के कई फैसले आते हैं और उन पर अपील भी होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार उस फैसले को आधार मानती है, तो उसे उसी समय स्पष्ट करना चाहिए था। उनके अनुसार, आज की परिस्थितियाँ तब से काफी बदल चुकी हैं।
NCERT पाठ्यक्रम और आपातकाल विवाद
NCERT की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर अध्याय जोड़े जाने को लेकर खुर्शीद ने कहा कि सरकार के पास पाठ्यपुस्तकों में सामग्री जोड़ने का अधिकार है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि किसी घटना को किस दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकता कि आपातकाल लगाया गया था, परंतु उसके पीछे की परिस्थितियाँ और उसके परिणाम भी समान रूप से बताए जाने चाहिए।
खुर्शीद ने जोर देकर कहा कि पाठ्यपुस्तक में यह भी उल्लेख होना चाहिए कि आपातकाल के बाद चुनाव हुए, कांग्रेस उस चुनाव में हारी, और बाद में वह दो-तिहाई बहुमत के साथ पुनः सत्ता में आई। उनके अनुसार, इतिहास को चुनिंदा तथ्यों के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आपातकाल के 51 वर्ष पर 'संविधान हत्या दिवस' मनाए जाने पर उन्होंने कहा कि संविधान सभी को अभिव्यक्ति का अधिकार देता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि संविधान आज भी जीवित है और विभिन्न सरकारों के आने-जाने के बावजूद उसकी शक्ति बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज संविधान को कमज़ोर करने के सवाल उठ रहे हैं और पहले उन सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
राम मंदिर दान विवाद पर सवाल
राम मंदिर दान विवाद पर खुर्शीद ने कहा कि यदि वास्तव में कोई अनियमितता हुई है, तो सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत सबसे पहले एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि एफआईआर के बिना सीधे एसआईटी गठित करने का निर्णय क्यों लिया गया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और BJP के करीब माने जाने वाले लोग भी अब इस विवाद को लेकर चिंता जता रहे हैं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की संभावना
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन पर खुर्शीद ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन ही सबसे व्यावहारिक रास्ता दिखता है। उन्होंने तर्क दिया कि जहाँ-जहाँ विपक्षी गठबंधन बने, वहाँ बेहतर परिणाम मिले और जहाँ नहीं बने, वहाँ नुकसान हुआ। उन्होंने इंडिया ब्लॉक को एक व्यापक मंच बताते हुए कहा कि इसे जमीनी स्तर तक मज़बूत करना विपक्ष की जिम्मेदारी है, हालाँकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा।