25 जून 2026
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ओवैसी का MEA पर पलटवार: पासपोर्ट को नागरिकता से अलग करना अनुचित, सरकार तय नहीं कर सकती कौन भारतीय है

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ओवैसी का MEA पर पलटवार: पासपोर्ट को नागरिकता से अलग करना अनुचित, सरकार तय नहीं कर सकती कौन भारतीय है

सारांश

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने MEA के पासपोर्ट-नागरिकता बयान को सीधे चुनौती दी — कहा, पासपोर्ट अधिनियम खुद नागरिकता को अनिवार्य शर्त मानता है। उनका असली सवाल यह है: क्या सरकार दस्तावेजों की परिभाषा बदलकर नागरिकता तय करने का अधिकार अपने हाथ में लेना चाहती है?

मुख्य बातें

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 25 जून 2026 को MEA के पासपोर्ट-नागरिकता बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
ओवैसी ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं के अनुसार बिना नागरिकता के पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता।
उन्होंने चेताया कि नागरिकता प्रमाण पत्र को एकमात्र प्रमाण मानने से आधार कार्ड , वोटर आईडी और पासपोर्ट धारक करोड़ों नागरिक मुश्किल में पड़ सकते हैं।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार मनमाने ढंग से यह तय करना चाहती है कि कौन भारत का नागरिक है।
मुजफ्फरनगर के कथित बंधुआ मजदूरी मामले पर उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 25 जून 2026 को भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें पासपोर्ट को महज एक यात्रा दस्तावेज बताया गया था और नागरिकता के प्रमाण के रूप में इसकी मान्यता को नकारा गया था। ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार यह अधिकार नहीं रख सकती कि वह अपनी मर्जी से किसी को भी भारत का नागरिक मानने से इनकार कर दे।

पासपोर्ट और नागरिकता का कानूनी संबंध

ओवैसी ने सवाल उठाया कि भारतीय पासपोर्ट आखिर किसे जारी किया जाता है? उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज केवल और केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाता है — किसी विदेशी नागरिक को नहीं। पासपोर्ट जारी करने से पूर्व विस्तृत पुलिस सत्यापन और सभी आवश्यक जाँचें की जाती हैं। ऐसे में इसे नागरिकता से पूरी तरह काट देना तर्कसंगत नहीं है।

उन्होंने पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि इस कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि बिना नागरिकता के किसी व्यक्ति को पासपोर्ट नहीं दिया जा सकता — सिवाय उन विशेष परिस्थितियों के जिनमें केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य होती है।

आम नागरिकों पर संभावित असर

ओवैसी ने चेताया कि यदि नागरिकता प्रमाण पत्र को ही नागरिकता का एकमात्र वैध प्रमाण माना जाने लगा, तो देश की बड़ी आबादी मुश्किल में पड़ सकती है। उनके अनुसार, भारत में अधिकतर लोग जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों के आधार पर अपनी पहचान साबित करते हैं — अलग से नागरिकता प्रमाण पत्र बहुत कम लोगों के पास होता है।

उन्होंने कहा कि देश में कई पीढ़ियों से रह रहे लोगों के पास स्वतंत्र नागरिकता दस्तावेज नहीं हैं। इन सभी प्रचलित दस्तावेजों को अमान्य करना आम जनता के लिए गंभीर कानूनी जटिलताएँ खड़ी कर सकता है।

सरकार पर सीधा आरोप

ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा यह है कि वह किसी को भी उठाकर कह सके — 'यह भारत का नागरिक नहीं है।' उन्होंने कहा, 'हम तय करेंगे कि कौन भारत का नागरिक है और कौन नहीं — यह सही नहीं है।' उनके अनुसार, सरकार बेवजह पासपोर्ट को लेकर आम लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रही है।

मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी मामले पर प्रतिक्रिया

इसी दौरान ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सामने आए कथित बंधुआ मजदूरी के मामले की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे 'अत्यंत निंदनीय और अमानवीय' बताते हुए कहा कि किसी गरीब व्यक्ति को बंधक बनाना, जबरन काम कराना, भूखा रखना और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना गंभीर अपराध है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब राज्य सरकार को किसी की शादी में क्या पक रहा है इसकी खबर रहती है, तो ऐसे संगीन सामाजिक अपराधों की जानकारी प्रशासन को क्यों नहीं होती।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नजर केवल एक ही समुदाय पर टिकी रहती है, जबकि अन्य गंभीर सामाजिक अपराधों की अनदेखी की जाती है। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और गरीबों से बंधुआ मजदूरी जैसी घटनाओं पर भी प्रशासन की निष्क्रियता पर उन्होंने सवाल उठाए।

ओवैसी के इस बयान ने पासपोर्ट-नागरिकता विवाद को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है, और आने वाले दिनों में इस पर संसदीय और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कानूनी दृष्टि से विवादास्पद है — क्योंकि पासपोर्ट अधिनियम स्वयं नागरिकता को पासपोर्ट जारी करने की पूर्वशर्त मानता है। ओवैसी ने जो सवाल उठाया है वह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी है: यदि सामान्य दस्तावेज नागरिकता साबित नहीं कर सकते, तो NRC जैसी प्रक्रिया के बिना करोड़ों भारतीय अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगे? मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को केवल विपक्षी राजनीति के रूप में देख रही है, लेकिन असली मुद्दा यह है कि MEA के बयान का कानूनी आधार क्या है और क्या यह किसी बड़े नीतिगत बदलाव की आहट है।
RashtraPress
25 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MEA ने पासपोर्ट को लेकर क्या बयान दिया था जिस पर ओवैसी ने आपत्ति जताई?
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा था कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी बयान पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 25 जून 2026 को कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
ओवैसी का पासपोर्ट अधिनियम को लेकर क्या तर्क है?
ओवैसी के अनुसार पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं में स्पष्ट है कि बिना नागरिकता के किसी को पासपोर्ट नहीं दिया जा सकता — केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार की अनुमति से अपवाद संभव है। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता से पूरी तरह अलग करना कानूनी रूप से सही नहीं है।
इस विवाद से आम नागरिकों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि नागरिकता प्रमाण पत्र को ही एकमात्र वैध प्रमाण माना गया, तो आधार कार्ड, वोटर आईडी, जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों पर निर्भर करोड़ों नागरिकों के लिए कानूनी जटिलताएँ खड़ी हो सकती हैं। ओवैसी ने कहा कि भारत में बड़ी आबादी के पास अलग से नागरिकता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है।
ओवैसी ने मुजफ्फरनगर बंधुआ मजदूरी मामले पर क्या कहा?
ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सामने आए कथित बंधुआ मजदूरी के मामले को 'अत्यंत निंदनीय और अमानवीय' बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार को सामाजिक गतिविधियों की जानकारी रहती है, तो ऐसे गंभीर अपराधों की अनदेखी क्यों होती है।
क्या पासपोर्ट-नागरिकता विवाद का NRC से कोई संबंध है?
ओवैसी ने सीधे NRC का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनका यह तर्क कि सरकार 'मनमाने ढंग से' नागरिकता तय करना चाहती है, NRC बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। यदि पासपोर्ट समेत प्रचलित दस्तावेज नागरिकता साबित नहीं कर सकते, तो नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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