शिलांग हिंसा: मेघालय CM कॉनराड संगमा ने SIT गठन का ऐलान किया, 15 FIR दर्ज, KSU के तीन नेता गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 24 अगस्त को विधानसभा में स्वयं बयान देते हुए घोषणा की कि 19 अगस्त को शिलांग में 'ब्लैक-फ्लैग बाइक रैली' के दौरान भड़की हिंसा की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है। इस हिंसा में 18 लोग घायल हुए और 31 वाहनों पर पथराव की घटनाएं सामने आईं।
मुख्य घटनाक्रम
खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) द्वारा आयोजित इस रैली को ईस्ट खासी हिल्स के डिप्टी कमिश्नर ने शांतिपूर्ण रहने के आश्वासन पर अनुमति दी थी। हालांकि, कथित तौर पर रैली के दौरान उपद्रवियों ने 31 गाड़ियों पर पत्थर फेंके और आसपास मौजूद लोगों पर हमला किया। घायल 18 लोगों को शिलांग सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
गौरतलब है कि निशाना बनाई गई गाड़ियों में से आठ वाहन असम में पंजीकृत थे, जो इस हिंसा के अंतर-राज्यीय आयाम को उजागर करता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री संगमा ने बताया कि घटना की रात यानी 19 अगस्त को ही KSU के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अतिरिक्त मेघालय मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MMPO) एक्ट भी लागू किया गया।
संगमा ने विधानसभा को सूचित किया, "इस घटना के सिलसिले में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं।" हिंसा में शामिल कथित पाँच नकाबपोश संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
SIT की भूमिका और जांच का दायरा
गठित SIT की अगुवाई इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर) करेंगे। यह टीम विशेष रूप से असम में पंजीकृत वाहनों पर हुए हमलों की जांच करेगी और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब मेघालय विधानसभा का ऑटम सेशन शुरू हुआ है और विपक्ष सरकार से जवाब माँग रहा था।
मुख्यमंत्री का आश्वासन
संगमा ने सदन में कहा, "मैं सदन और राज्य के नागरिकों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी और हिंसा में शामिल उपद्रवियों को सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।" उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य जवाबदेही तय करने के साथ-साथ 19 अगस्त की घटनाओं के बाद जनता का विश्वास और सामान्य स्थिति बहाल करना है।
आगे क्या होगा
SIT की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। असम में पंजीकृत वाहनों पर हुए हमलों की जांच दो राज्यों के बीच समन्वय की माँग करती है, जो इस मामले को और जटिल बनाती है। राज्य सरकार पर दबाव है कि वह यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में अनुमति प्राप्त रैलियाँ हिंसा में न बदलें।