सिक्किम: समारदुंग सुरंग में भूस्खलन और मीथेन रिसाव, 27 लोगों के फंसे होने की आशंका; NDRF का बचाव अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
सिक्किम के दक्षिणी जिले में 21 जुलाई को दोपहर 3:09 बजे निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग में अचानक भूस्खलन हुआ और उसके बाद मीथेन गैस का खतरनाक रिसाव शुरू हो गया, जिससे करीब 27 लोगों के सुरंग के भीतर फंसे होने की आशंका है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सिक्किम पुलिस और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं युद्धस्तर पर राहत-बचाव में जुटी हैं।
हादसे का घटनाक्रम
यह दुर्घटना ममरिंग स्थित समारदुंग सुरंग में घटी, जिसे तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के अंतर्गत पटेल इंजीनियरिंग द्वारा निर्मित किया जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग के भीतर अचानक भूस्खलन हुआ, जिससे रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और अंदर काम कर रहे मजदूर बाहर नहीं निकल सके। स्थिति तब और विकट हो गई जब सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिससे बचावकर्मियों के लिए अंदर प्रवेश करना अत्यंत जोखिम भरा हो गया।
सुरंग से बाहर निकलने में सफल कुछ मजदूरों ने बताया कि उन्होंने अंदर से विस्फोट जैसी तेज आवाज सुनी, जिसके बाद वे तुरंत बाहर की ओर भागे। भूस्खलन का सटीक कारण अभी तक प्रशासन नहीं जान पाया है।
बचाव अभियान की चुनौतियाँ
नमची जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही सिलिगुड़ी और पाक्योंग में तैनात एनडीआरएफ टीमों तथा एसडीआरएफ को तत्काल अलर्ट किया गया। उन्होंने कहा, 'अग्निशमन विभाग और पुलिसकर्मियों ने बिना विशेष सुरक्षा उपकरणों के दो बार सुरंग में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन अंदर की खतरनाक परिस्थितियों के कारण वे फंसे लोगों तक नहीं पहुंच सके।'
तामलिंग के अनुसार, सुरंग के भीतर मीथेन गैस की मात्रा इतनी अधिक है कि बचावकर्मी अभी तक उस स्थान तक नहीं पहुंच पाए हैं जहाँ मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। कई बचावकर्मियों को संपर्क स्थापित करने से पहले ही वापस लौटना पड़ा। पहली एनडीआरएफ टीम ने उन अग्निशमन कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला जो घटना के बाद अंदर गए थे, और इसके बाद दूसरी एनडीआरएफ टीम सुरंग में दाखिल हुई।
फंसे लोगों की संख्या
फंसे लोगों की सटीक संख्या को लेकर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। जिला कलेक्टर तामलिंग ने बताया, 'प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब 19 मजदूर अंदर फंसे थे। बाद में बचाव के लिए पटेल इंजीनियरिंग के तीन कर्मचारी सुरंग में गए, जिनमें से दो भी अंदर फंस गए। इससे कंपनी के कुल 21 लोगों के अंदर होने की आशंका है। इसके अलावा एनएचपीसी के 6 कर्मचारी भी सुरंग के भीतर बताए जा रहे हैं, जिससे कुल संख्या 27 तक पहुंचती है। वास्तविक संख्या इससे कम या अधिक भी हो सकती है।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक एनडीआरएफ टीम फंसे हुए लोगों के सटीक स्थान तक नहीं पहुंच जाती, तब तक अंदर की स्थिति की पुष्टि संभव नहीं है।
प्रशासन की प्राथमिकता
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता सुरंग के भीतर फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। यह हादसा ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी राज्यों में मानसून के दौरान निर्माण-स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बचाव अभियान जारी है और आगे की जानकारी मिलने पर स्थिति स्पष्ट होगी।