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सिक्किम: समरदुंग सुरंग में भूस्खलन, 12-20 श्रमिक फंसे; गैस रिसाव से बचावकर्मी भी बेहोश

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सिक्किम: समरदुंग सुरंग में भूस्खलन, 12-20 श्रमिक फंसे; गैस रिसाव से बचावकर्मी भी बेहोश

सारांश

दक्षिण सिक्किम में समरदुंग सुरंग में भूस्खलन के बाद 12 से 20 श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है। गैस रिसाव के कारण पश्चिम बंगाल से आए बचावकर्मी भी बेहोश हो गए। तीस्ता चरण-छह जलविद्युत परियोजना की यह सुरंग पटेल इंजीनियरिंग द्वारा निर्मित है।

मुख्य बातें

20 जुलाई 2026 को दक्षिण सिक्किम के मामरिंग में समरदुंग सुरंग में भूस्खलन हुआ।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार 12 से 20 श्रमिक सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं; आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
कथित गैस रिसाव के कारण पश्चिम बंगाल के बचाव दल के सदस्य बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह सुरंग पटेल इंजीनियरिंग द्वारा निर्मित तीस्ता चरण-छह जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है।
सिक्किम पुलिस , अग्निशमन सेवाएँ और अन्य आपातकालीन एजेंसियाँ घटनास्थल पर तैनात हैं।

दक्षिण सिक्किम के मामरिंग में 20 जुलाई 2026 को निर्माणाधीन समरदुंग सुरंग में भूस्खलन के बाद 12 से 20 श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सुरंग के भीतर गैस रिसाव की भी आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण बचाव अभियान और अधिक जटिल हो गया है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

पटेल इंजीनियरिंग द्वारा निर्मित यह सुरंग तीस्ता चरण-छह जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है, जो रंगपो के निकट स्थित है। सोमवार को भूस्खलन आने के बाद सुरंग का एक हिस्सा ढह गया अथवा अवरुद्ध हो गया, जिससे अंदर काम कर रहे श्रमिक बाहर नहीं निकल पाए। अधिकारियों ने अभी तक फंसे श्रमिकों की सटीक संख्या या उनकी स्थिति की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।

गैस रिसाव से बचावकर्मी भी प्रभावित

सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से आए एक बचाव दल के सदस्यों को फंसे श्रमिकों तक पहुँचने के प्रयास के दौरान चक्कर आने लगे और वे कथित तौर पर गैस के संपर्क में आने के कारण बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह स्थिति बचाव अभियान को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही है।

बचाव अभियान और तैनाती

सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं तथा अन्य आपातकालीन एजेंसियों के दल घटनास्थल पर तैनात हैं और राहत कार्य निरंतर जारी है। अधिकारियों ने बचाव कार्यों में सुविधा के लिए क्षेत्र में यातायात को भी नियंत्रित कर दिया है। स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नज़र बनी हुई है।

परियोजना की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि तीस्ता चरण-छह जलविद्युत परियोजना सिक्किम की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है। यह ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सिक्किम में भूस्खलन की घटनाएँ मानसून के दौरान आम हो जाती हैं, और निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।

आगे क्या होगा

बचाव दल फंसे हुए श्रमिकों तक पहुँचने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। अधिकारियों से स्थिति की औपचारिक पुष्टि और फंसे श्रमिकों की सटीक संख्या की जानकारी का इंतज़ार है। गैस रिसाव की आशंका को देखते हुए विशेष उपकरणों से लैस दल को तैनात किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह नीतिगत विफलता है। बचावकर्मियों का स्वयं गैस की चपेट में आना दर्शाता है कि घटनास्थल पर प्रारंभिक जोखिम-आकलन अपर्याप्त था। जलविद्युत परियोजनाओं में श्रमिक सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र निगरानी की माँग अब और टाली नहीं जानी चाहिए।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समरदुंग सुरंग हादसा क्या है?
20 जुलाई 2026 को दक्षिण सिक्किम के मामरिंग में निर्माणाधीन समरदुंग सुरंग में भूस्खलन के बाद 12 से 20 श्रमिकों के फंसे होने की आशंका है। सुरंग का एक हिस्सा ढहने या अवरुद्ध होने से श्रमिक बाहर नहीं निकल पाए।
समरदुंग सुरंग किस परियोजना का हिस्सा है?
यह सुरंग रंगपो के निकट तीस्ता चरण-छह जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है, जिसका निर्माण पटेल इंजीनियरिंग द्वारा किया जा रहा है। यह सिक्किम की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है।
बचाव अभियान में क्या चुनौतियाँ हैं?
कथित गैस रिसाव के कारण पश्चिम बंगाल से आए बचाव दल के सदस्य बेहोश हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इससे बचाव अभियान और जटिल हो गया है, क्योंकि बिना विशेष उपकरणों के सुरंग में प्रवेश जोखिमभरा है।
फंसे श्रमिकों की संख्या की पुष्टि हुई है?
अभी तक अधिकारियों ने फंसे श्रमिकों की संख्या या उनकी स्थिति की कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार यह संख्या 12 से 20 के बीच बताई जा रही है।
घटनास्थल पर कौन-सी एजेंसियाँ तैनात हैं?
सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ और अन्य आपातकालीन एजेंसियाँ घटनास्थल पर तैनात हैं। बचाव कार्यों में सुविधा के लिए क्षेत्र में यातायात भी नियंत्रित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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