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सिक्किम सुरंग हादसा: CM सुवेंदु अधिकारी ने 11 मृत बंगाल मजदूरों के परिवारों को ₹5-5 लाख मुआवजा सौंपा

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सिक्किम सुरंग हादसा: CM सुवेंदु अधिकारी ने 11 मृत बंगाल मजदूरों के परिवारों को ₹5-5 लाख मुआवजा सौंपा

सारांश

सिक्किम के नामची में एनएचपीसी सुरंग हादसे में जान गँवाने वाले 11 बंगाल मजदूरों के परिवारों को CM सुवेंदु अधिकारी ने ₹5-5 लाख मुआवजा और होम गार्ड नौकरी का वादा दिया — यह त्रासदी राज्य में रोजगार संकट और प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा को एक बार फिर उजागर करती है।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 11 मृत प्रवासी मजदूरों के परिवारों को ₹5-5 लाख मुआवजे के चेक सौंपे।
मजदूरों की मौत 20 जुलाई को सिक्किम के नामची में एनएचपीसी लिमिटेड की निर्माणाधीन सुरंग में हुई थी।
प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को राज्य पुलिस में होम गार्ड के पद पर नियुक्ति का वादा किया गया।
उत्तर बंगाल के 25 में से 12 बंद चाय बागान तीन महीने में पुनः खोले जाएँगे।
दुग्ध-उत्पाद कंपनियों को दक्षिण व उत्तर बंगाल में 15-15 एकड़ भूमि आवंटित होगी।
नई राज्य सरकार को सत्ता में आए अभी केवल 10 सप्ताह हुए हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार, 28 जुलाई 2025 को उन 11 प्रवासी मजदूरों के परिवारों को ₹5-5 लाख के मुआवजे के चेक सौंपे, जिनकी 20 जुलाई को सिक्किम के नामची में एनएचपीसी लिमिटेड की निर्माणाधीन सुरंग में मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री ने जलपाईगुड़ी जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर यह सहायता राशि प्रदान की।

मुआवजे के साथ नौकरी का वादा

मुख्यमंत्री अधिकारी ने केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहे — उन्होंने 11 परिवारों में से प्रत्येक के एक सदस्य को राज्य पुलिस में होम गार्ड के पद पर नियुक्ति देने का वादा भी किया। यह घोषणा उन परिवारों के लिए राहत की बात है जो अपने एकमात्र कमाने वाले सदस्य को खो चुके हैं।

जलपाईगुड़ी पहुँचने का मार्ग

मुख्यमंत्री सिलीगुड़ी के बागडोगरा हवाई अड्डे से हेलीकॉप्टर के जरिए जलपाईगुड़ी एसएआई स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के अस्थायी हेलीपैड पर उतरे। वहाँ से वे सड़क मार्ग से जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुँचे और मृतकों के परिजनों से व्यक्तिगत रूप से मिले।

रोजगार संकट पर मुख्यमंत्री का बयान

मीडिया से बातचीत में अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में औद्योगिक इकाइयों के पलायन के कारण राज्य में रोजगार के अवसर सिकुड़ गए, जिसने युवाओं को प्रवासी मजदूर बनने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, 'मारे गए मजदूर काम के लिए दूसरे राज्यों में गए थे। पश्चिम बंगाल में रोजगार नहीं है। लेकिन राज्य सरकार धीरे-धीरे रोजगार के अवसर पैदा करके स्थिति को बदलने की कोशिश कर रही है।'

उन्होंने प्रवासी मजदूरों से आग्रह किया कि वे धीरे-धीरे राज्य में वापस लौटना शुरू करें। अधिकारी ने कहा कि बड़ी फैक्टरियों के साथ-साथ छोटे और कुटीर उद्योगों में भी रोजगार के अवसर तैयार किए जाएँगे।

उद्योग और चाय बागानों के लिए बड़े ऐलान

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तर बंगाल के 25 बंद चाय बागानों में से लगभग 12 को तीन महीने के भीतर पुनः चालू किया जाएगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित दुग्ध-उत्पाद कंपनियों को दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल में मैन्युफैक्चरिंग इकाइयाँ स्थापित करने के लिए 15-15 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि चाय बागानों को प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना (PMCSPY) से लाभ मिलेगा, जिससे श्रमिकों की आजीविका में सुधार होगा। गौरतलब है कि नई राज्य सरकार को सत्ता में आए अभी केवल 10 सप्ताह हुए हैं और ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी जटिलताओं के बाद विधानसभा में संशोधन विधेयक पास किया जा चुका है।

आगे क्या होगा

यह हादसा इस बात को रेखांकित करता है कि पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में मजदूर अन्य राज्यों में काम करने जाते हैं और वहाँ सुरक्षा जोखिमों का सामना करते हैं। मुख्यमंत्री के वादों के क्रियान्वयन पर अब पीड़ित परिवारों और विपक्ष की नज़र रहेगी। होम गार्ड नियुक्तियों की प्रक्रिया और बंद चाय बागानों को खोलने की समयसीमा आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

समाधान नहीं। असली सवाल यह है कि एनएचपीसी जैसी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम की परियोजना में सुरंग सुरक्षा मानक क्यों विफल हुए, और उसकी जवाबदेही कब तय होगी। मुख्यमंत्री ने पूर्व TMC सरकार पर रोजगार संकट का दोष मढ़ा, लेकिन प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार का अपना तंत्र क्या है — यह अनुत्तरित रहा। बंद चाय बागानों और दुग्ध उद्योग की घोषणाएँ स्वागतयोग्य हैं, पर इनका क्रियान्वयन इतिहास देखें तो संशय स्वाभाविक है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिक्किम सुरंग हादसे में कितने बंगाल मजदूरों की मौत हुई?
20 जुलाई को सिक्किम के नामची में एनएचपीसी लिमिटेड की निर्माणाधीन सुरंग में पश्चिम बंगाल के 11 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी।
CM सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिवारों को क्या सहायता दी?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 11 परिवारों में से प्रत्येक को ₹5 लाख का मुआवजा चेक सौंपा और प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को राज्य पुलिस में होम गार्ड के पद पर नौकरी देने का वादा किया।
मुख्यमंत्री अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में रोजगार को लेकर क्या कहा?
अधिकारी ने कहा कि पूर्ववर्ती TMC सरकार के दौरान औद्योगिक इकाइयों के पलायन से रोजगार के अवसर घटे, जिससे मजदूरों को अन्य राज्यों में जाना पड़ा। उन्होंने बड़ी फैक्टरियों, कुटीर उद्योगों और सरकारी स्तर पर रोजगार बढ़ाने का वादा किया।
उत्तर बंगाल के बंद चाय बागानों को लेकर क्या घोषणा हुई?
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तर बंगाल के 25 बंद चाय बागानों में से लगभग 12 को तीन महीने के भीतर पुनः चालू किया जाएगा और इन्हें प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना (PMCSPY) का लाभ भी मिलेगा।
दुग्ध उत्पाद कंपनियों के लिए क्या ऐलान किया गया?
CM अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की दुग्ध-उत्पाद कंपनियों को दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल में मैन्युफैक्चरिंग इकाइयाँ लगाने के लिए 15-15 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी, जिससे अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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