6 नवंबर 2026
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झालावाड़ में सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट का भंडाफोड़: 6 नाबालिग लड़कियाँ बचाई गईं, 5 गिरफ्तार

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झालावाड़ में सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट का भंडाफोड़: 6 नाबालिग लड़कियाँ बचाई गईं, 5 गिरफ्तार

सारांश

राजस्थान के झालावाड़ में पुलिस ने एक महीने के गुप्त अभियान के बाद 100 से अधिक जवानों के साथ छापेमारी की और 6 नाबालिग लड़कियों को सेक्स ट्रैफिकिंग गिरोह से बचाया। पाँच आरोपी गिरफ्तार हैं — जिनमें पीड़िताओं के रिश्तेदार भी शामिल हैं। पॉक्सो और ITPA के तहत मामला दर्ज।

मुख्य बातें

राजस्थान पुलिस ने 3 नवंबर 2026 को झालावाड़ के भवानीमंडी में छापेमारी कर 6 नाबालिग लड़कियों को सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट से बचाया।
5 आरोपी गिरफ्तार; इनमें पीड़िताओं के कथित रिश्तेदार और करीबी भी शामिल हैं।
चिकित्सा जांच में 5 लड़कियों के बार-बार यौन शोषण की पुष्टि; 2 लड़कियों में यौन संचारित रोग (STD) पाए गए।
7 अक्टूबर को मिली गुप्त शिकायत के आधार पर एसआईटी गठित हुई; 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने एक साथ छापेमारी की।
मामले में पॉक्सो एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज।
सभी 6 बच्चियाँ बाल कल्याण समिति के आदेश पर बाल गृह में सुरक्षित।

राजस्थान पुलिस ने 6 नवंबर 2026 को झालावाड़ जिले के भवानीमंडी इलाके में एक सेक्स ट्रैफिकिंग गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बचाया और पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में पीड़िताओं के कथित रिश्तेदार और करीबी भी शामिल हैं, जो इस मामले को और अधिक गंभीर बनाता है।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुडानिया के अनुसार, 7 अक्टूबर को मिली एक गुप्त शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई शुरू की गई। शिकायत में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आयुष श्रोत्रिय की देखरेख में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया।

गुप्त अभियान और छापेमारी

पुलिस ने करीब एक महीने तक सावधानीपूर्वक गुप्त अभियान चलाया। जासूसी कैमरों की मदद से डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए गए और सबूतों की पुष्टि के बाद 3 नवंबर को 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की एक संयुक्त टीम ने चिन्हित स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज से बिचौलियों और परिवार के सदस्यों की कथित संलिप्तता के अहम सबूत मिले हैं।

पीड़िताओं की स्थिति

चिकित्सा जांच में पाँच लड़कियों के बार-बार यौन शोषण की पुष्टि हुई है। उनमें से दो लड़कियों में यौन संचारित रोग (एसटीडी) भी पाए गए, जिनका इलाज विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि लड़कियों को ग्राहकों के सामने पेश किया जाता था और अवैध गतिविधियों के बदले पैसे लिए जाते थे।

कानूनी कार्रवाई

पाँचों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। पुलिस ने अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट) और पॉक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। गौरतलब है कि पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों में न्यूनतम सज़ा सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक हो सकती है।

आगे की जांच और पीड़िताओं का पुनर्वास

नेटवर्क में शामिल दलालों, ग्राहकों और अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा के नेतृत्व में एक अलग एसआईटी गठित की गई है। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर बचाई गई सभी छह लड़कियों को सुरक्षित आश्रय के लिए एक बाल गृह (चिल्ड्रन होम) में भेजा गया है। मामले की व्यापक जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दोषसिद्धि दर अब भी अपेक्षाकृत कम रहती है। एसआईटी का गठन और डिजिटल साक्ष्य संग्रह पुलिस की तैयारी दर्शाता है, परंतु असली परीक्षा यह होगी कि नेटवर्क के बाकी सदस्यों — दलाल और ग्राहक — तक जांच पहुँचती है या नहीं। पीड़िताओं के पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक सहायता पर भी दीर्घकालिक ध्यान ज़रूरी है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झालावाड़ सेक्स ट्रैफिकिंग मामले में क्या हुआ?
राजस्थान पुलिस ने 3 नवंबर 2026 को झालावाड़ के भवानीमंडी इलाके में छापेमारी कर 6 नाबालिग लड़कियों को एक सेक्स ट्रैफिकिंग गिरोह से बचाया और 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में पॉक्सो एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार 5 आरोपियों में पीड़िताओं के कथित रिश्तेदार और करीबी लोग भी शामिल हैं। सभी को अदालत ने 3 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है और आगे की पूछताछ जारी है।
बचाई गई लड़कियों की स्थिति क्या है?
चिकित्सा जांच में 5 लड़कियों के बार-बार यौन शोषण की पुष्टि हुई है और 2 लड़कियों में यौन संचारित रोग (STD) पाए गए हैं। उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है और सभी 6 बच्चियों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर बाल गृह में रखा गया है।
इस मामले में एसआईटी की क्या भूमिका है?
दो अलग-अलग एसआईटी गठित की गई हैं — पहली अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आयुष श्रोत्रिय की देखरेख में प्रारंभिक जांच के लिए, और दूसरी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचंद मीणा के नेतृत्व में गिरोह के बाकी सदस्यों — दलाल और ग्राहक — की पहचान के लिए।
इस मामले में कौन-से कानून लागू किए गए हैं?
पुलिस ने पॉक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट) और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (ITPA) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पॉक्सो के तहत न्यूनतम सज़ा 7 वर्ष कारावास है जो आजीवन कारावास तक जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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