सोमनाथ भारती का कांग्रेस पर बड़ा आरोप: क्षेत्रीय दलों को खत्म करना चाहती है पार्टी
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सोमनाथ भारती ने 7 जून 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी क्षेत्रीय दलों को जानबूझकर कमज़ोर करती है, ताकि भविष्य में देश की राजनीति केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच सीमित हो जाए। भारती ने स्पष्ट किया कि AAP ने इंडिया गठबंधन से दूरी इसीलिए बनाई, क्योंकि गठबंधन के भीतर ही उसे कमज़ोर करने की कोशिशें होती रहीं।
गठबंधन धर्म पर सवाल
सोमनाथ भारती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान AAP इंडिया गठबंधन का हिस्सा थी और दिल्ली में तीन-चार सीटों का फार्मूला तय हुआ था। उनके अनुसार, अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए खुलकर प्रचार किया, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता तो दूर, दिल्ली के स्थानीय नेता भी AAP के लिए प्रचार करने नहीं आए। उन्होंने कहा, 'यदि गठबंधन धर्म निभाना होता तो इस तरह की स्थिति नहीं बनती।'
कांग्रेस की रणनीति पर आरोप
भारती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मंशा यह है कि देश की राजनीति केवल BJP और कांग्रेस के बीच बारी-बारी सत्ता परिवर्तन तक सिमट जाए और अन्य दल राजनीतिक परिदृश्य से बाहर हो जाएं। आलोचकों का कहना है कि यह रवैया लोकतांत्रिक बहुलवाद के लिए चिंताजनक है।
तृणमूल कांग्रेस का उदाहरण
भारती ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने दिल्ली में AAP के साथ व्यवहार किया, उसी तरह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ भी किया। उनके अनुसार, जहाँ भी कोई क्षेत्रीय पार्टी मज़बूत होती है, वहाँ कांग्रेस उसे कमज़ोर करने की कोशिश करती है और कई जगहों पर विरोधी दलों का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करती है।
इंडिया गठबंधन की सीमाएँ
भारती ने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव तक सीमित था। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में कांग्रेस का क्षेत्रीय दलों के प्रति रवैया अलग-अलग रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब AAP और कांग्रेस के बीच तनाव सार्वजनिक हुआ हो — दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी दोनों दल आमने-सामने थे।
अन्य क्षेत्रीय दलों को सलाह
भारती ने कहा कि कांग्रेस की इन नीतियों का अनुभव AAP ने स्वयं किया है, इसलिए उन्हें इसका भली-भाँति अंदाज़ा है। उन्होंने अन्य क्षेत्रीय दलों को भी सतर्क रहने और इस स्थिति को समझने की सलाह दी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।