इंडिया ब्लॉक बैठक में 23 दल शामिल, AAP और कुछ पार्टियों ने बनाई दूरी: जयराम रमेश
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया ब्लॉक गठबंधन की अहम बैठक 8 जून, सोमवार को दोपहर 12 बजे नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होने वाली है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने पुष्टि की कि 23 राजनीतिक दलों ने इस बैठक में भाग लेने की सहमति दी है, जबकि कुछ दलों ने अपने-अपने कारणों से इस विशेष बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई है।
मुख्य घटनाक्रम
आम आदमी पार्टी (AAP), जो कभी इंडिया ब्लॉक का अभिन्न हिस्सा रही, इस बैठक से दूर रही। AAP के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने गठबंधन की अन्य पार्टियों से अपील करते हुए कहा कि उनके अनुसार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) देशभर में क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों को कमज़ोर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि दोनों बड़ी पार्टियाँ बारी-बारी से सत्ता में बनी रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कांग्रेस गठबंधन का नेतृत्व करती रहेगी, AAP दूरी बनाए रखेगी।
जयराम रमेश का बयान
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि जो दल इस विशेष बैठक में नहीं आ सके, उन्होंने भी मोदी सरकार की नीतियों और कार्रवाइयों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। रमेश के अनुसार, ये नीतियाँ लाखों भारतीयों के मतदान के अधिकार को सीमित कर रही हैं, संविधान पर लगातार प्रहार कर रही हैं और जाँच एजेंसियों के ज़रिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियाँ करोड़ों भारतीयों की आजीविका को नुकसान पहुँचा रही हैं, लगातार महंगाई से घरेलू बजट बिगड़ रहा है, लाखों युवाओं की आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात हो रहा है, निवेश का माहौल कमज़ोर पड़ रहा है और विदेश नीति के मोर्चे पर राष्ट्रीय हितों से समझौता किया जा रहा है।
टीएमसी की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि यह एक ही मकसद और साफ इरादे के साथ हुई। उन्होंने कहा कि भारत एकजुट है और कई पार्टियाँ भाईचारे की भावना से मिलने का इंतज़ार कर रही हैं।
गठबंधन की स्थिति और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया ब्लॉक की एकजुटता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि AAP का गठबंधन से अलगाव कोई नई बात नहीं — दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता रहा है। 23 दलों की भागीदारी गठबंधन के लिए एक संख्यात्मक संकेत है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि आने वाले चुनावों में यह एकता किस हद तक व्यावहारिक रूप ले पाती है।