इंडिया ब्लॉक बैठक पर सियासी घमासान: कांग्रेस बोली एकजुटता, भाजपा ने कहा बिखर रहा गठबंधन
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 9 जून 2026 को संपन्न हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। जहाँ कांग्रेस ने इस बैठक को संविधान और देश की रक्षा की लड़ाई का प्रतीक बताया, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दावा किया कि यह गठबंधन भीतर से कमज़ोर पड़ता जा रहा है।
कांग्रेस का रुख: एकजुटता ही एकमात्र रास्ता
कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य जेबी माथेर ने कहा कि जो नेता गठबंधन के समर्थन और उसकी विचारधारा के आधार पर चुनाव जीतकर आए हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी जीत किस आधार पर हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई नेता या दल अब अपना रुख बदलता है या गठबंधन छोड़ने का फैसला करता है, तो यह उन मतदाताओं के विश्वास के साथ विश्वासघात होगा जिन्होंने उन पर भरोसा जताया।
माथेर ने कहा, 'राजनीतिक लाभ के लिए दल या गठबंधन बदलना दीर्घकाल में टिकाऊ नहीं होता। देश के दीर्घकालिक हितों के लिए इंडिया ब्लॉक ही सबसे मज़बूत मंच है।' उन्होंने यह भी बताया कि इस बैठक में 23 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया और सभी से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की।
भाजपा का दावा: टूट रहा है इंडिया ब्लॉक
दूसरी ओर, भाजपा के राज्यसभा सदस्य अशोक चव्हाण ने इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधते हुए कहा कि यह गठबंधन धीरे-धीरे बिखर रहा है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर भी असंतोष दिखाई दे रहा है — TMC के कुछ सांसद और विधायक कथित तौर पर पार्टी छोड़ चुके हैं और अलग विपक्षी समूह बनाने की कोशिशें भी देखने को मिली हैं।
चव्हाण ने यह भी दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) भी इंडिया ब्लॉक से दूरी बनाती दिख रही है। उनके अनुसार, मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस गठबंधन का राजनीतिक प्रभाव लगातार कमज़ोर होता जा रहा है।
बैठक का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक का गठन 2023 में हुआ था और तब से इसमें घटक दलों के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठते रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है और गठबंधन के भीतर सीट-बँटवारे को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। TMC और AAP जैसे दलों ने पहले भी गठबंधन की रणनीति पर असहमति जताई है।
आम जनता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी एकता का सीधा असर आगामी चुनावों में मतदाताओं के विकल्पों पर पड़ेगा। यदि गठबंधन मज़बूत रहता है, तो सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती बढ़ सकती है; यदि बिखरता है, तो विपक्षी वोट विभाजित होने की आशंका है।
आगे क्या
बैठक के बाद इंडिया ब्लॉक के घटक दलों की अगली रणनीतिक बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, गठबंधन की असली परीक्षा आने वाले राज्य चुनावों में सीट-बँटवारे के समझौते में होगी।