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दक्षिण रेलवे की माँग: चेन्नई में पटरियों के पास टैसमैक की 43 शराब दुकानें हों शिफ्ट

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दक्षिण रेलवे की माँग: चेन्नई में पटरियों के पास टैसमैक की 43 शराब दुकानें हों शिफ्ट

सारांश

दक्षिण रेलवे की माँग सिर्फ 43 दुकानों के बारे में नहीं है — यह उस खालीपन को उजागर करती है जहाँ न राज्य सरकार की राजस्व प्राथमिकता झुकती है, न केंद्रीय रेलवे की सुरक्षा चिंता का कोई कानूनी दाँत है। देशभर में 17,000 से ज़्यादा ऐसी दुकानें बताती हैं कि यह समस्या चेन्नई तक सीमित नहीं।

मुख्य बातें

दक्षिण रेलवे ने तमिलनाडु सरकार से 43 टैसमैक शराब दुकानें स्टेशनों व पटरियों के पास से शिफ्ट करने की माँग की है।
यह माँग चेन्नई, तिरुवल्लूर, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, रानीपेट और कांचीपुरम जिलों की दुकानों के लिए है।
चेन्नई रेलवे डिवीजन ने सितंबर 2024 और मई 2025 में पत्र लिखे; जवाब न मिलने पर जुलाई 2026 में मुख्य सचिव को पत्र भेजा।
हाल के महीनों में रेलवे क्षेत्र के पास 7 टैसमैक दुकानें बंद या स्थानांतरित की गई हैं।
देश भर में 17,000 से अधिक शराब दुकानें रेलवे ट्रैक के निकट हैं; इस दूरी को लेकर कोई राष्ट्रीय नियम नहीं।
टीवीके सरकार ने हाल ही में धार्मिक स्थलों, स्कूलों और बस स्टैंड के 500 मीटर के भीतर के 717 टैसमैक आउटलेट बंद कर दिए हैं।

दक्षिण रेलवे ने तमिलनाडु सरकार से चेन्नई और आसपास के जिलों में रेलवे स्टेशनों व पटरियों के निकट स्थित टैसमैक की 43 शराब दुकानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की औपचारिक माँग की है। रेलवे ने इसके पीछे पटरियों पर अनाधिकृत आवाजाही से होने वाली मौतों, दुर्घटनाओं और यात्रियों की लगातार शिकायतों को आधार बनाया है।

मुख्य घटनाक्रम

चेन्नई रेलवे डिवीजन ने सबसे पहले सितंबर 2024 में और फिर मई 2025 में टैसमैक को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जुलाई 2026 में यह मामला राज्य के मुख्य सचिव के समक्ष उठाया गया।

जिन 43 आउटलेट्स की पहचान की गई है, वे चेन्नई, तिरुवल्लूर, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, रानीपेट और कांचीपुरम जिलों में स्थित हैं। रेलवे अधिकारियों ने विशेष रूप से रॉयपुरम, कोरुकुपेट, पेराम्बुर, जोलारपेट, विल्लीवक्कम, अवादी, एन्नोर, तिरुवलंगडु और नंदीअम्बक्कम जैसे स्थानों को चिह्नित किया है।

यात्रियों पर असर और शिकायतें

अधिकारियों के अनुसार, इन दुकानों के पास शराब पीने वाले लोग कभी-कभी रेलवे संपत्ति में अनाधिकृत रूप से प्रवेश कर लेते हैं और खतरनाक स्थानों पर पटरियाँ पार करते हैं। इसके अलावा कुछ लोग प्लेटफॉर्म और कोच के भीतर सो जाते हैं या ट्रेनों में असुरक्षित तरीके से यात्रा करते हैं।

यात्री प्रतिनिधियों ने बताया कि अम्बाटुर, तिरुवल्लुर, अवादी और ताम्बरम सैनिटोरियम स्टेशनों के आसपास यात्रियों को विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ता है। रिपोर्टों के अनुसार, तिरुवल्लूर का सब-वे शराब पीने का अड्डा बन गया है, जिससे महिलाएँ अंधेरा होने के बाद उसका उपयोग करने से बचती हैं।

इसके अतिरिक्त महिला यात्रियों से छेड़छाड़, रेलवे कर्मचारियों को परेशान करना, गंदगी फैलाना, चोरी और तांबे के सिग्नल तारों के साथ छेड़छाड़ जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।

टैसमैक की स्थिति और चुनौतियाँ

टैसमैक तमिलनाडु सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है जिसका राज्य में शराब के थोक और खुदरा व्यापार पर पूर्ण एकाधिकार है। टैसमैक अधिकारियों का कहना है कि वैकल्पिक स्थान खोजना कठिन है क्योंकि कई प्रस्तावित जगहों पर स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई है या वे स्थान उपयुक्त नहीं पाए गए।

हाल के महीनों में रेलवे प्रतिष्ठानों के पास कम से कम सात दुकानें बंद की गई हैं अथवा दूसरे स्थान पर स्थानांतरित की गई हैं। तमिलनाडु की टीवीके सरकार ने हाल ही में शिक्षण संस्थानों, पूजा स्थलों और बस स्टैंड के 500 मीटर के दायरे में आने वाले 717 टैसमैक आउटलेट बंद कर दिए हैं।

नियम और राष्ट्रीय संदर्भ

टैसमैक के एक अधिकारी ने बताया कि शराब की दुकानों और रेलवे ट्रैक के बीच की दूरी को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट राष्ट्रीय नियम नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि देश भर में 17,000 से अधिक शराब की दुकानें रेलवे ट्रैक के निकट स्थित हैं और कई राज्य इस संदर्भ में दिशानिर्देश बनाने पर विचार कर रहे हैं।

टैसमैक कर्मचारी संघ के एक पदाधिकारी ने सुझाव दिया कि रेलवे बोर्ड को इस विषय पर उचित नियमों के लिए न्यायालय से निर्देश लेने चाहिए।

आगे क्या होगा

रेलवे का स्पष्ट उद्देश्य है कि व्यस्त यात्री कॉरिडोर के आसपास सुरक्षा जोखिम कम किए जाएँ। यह मामला केंद्र-राज्य समन्वय की एक व्यापक चुनौती को भी उजागर करता है — जहाँ एक राष्ट्रीयकृत सेवा और एक राज्य-नियंत्रित एकाधिकार के बीच अधिकार क्षेत्र का टकराव है। जब तक कोई स्पष्ट विधायी ढाँचा नहीं बनता, इस विवाद का दीर्घकालिक समाधान अनिश्चित बना रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राज्य के राजस्व से चलने वाले टैसमैक को हटाने का कानूनी दाँत नहीं। दो साल से ज़्यादा समय तक पत्रों का जवाब न देना तमिलनाडु सरकार की प्राथमिकताओं को साफ दर्शाता है — टैसमैक राज्य के राजस्व का बड़ा स्तंभ है और उसे हटाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति सीमित है। असली सवाल यह है कि जब देश में 17,000 से अधिक ऐसी दुकानें हैं और कोई राष्ट्रीय नियम नहीं, तो क्या रेलवे बोर्ड इसे नीतिगत मुद्दा बनाएगा या चेन्नई डिवीजन के पत्र फ़ाइलों में ही दफन होते रहेंगे।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण रेलवे ने टैसमैक दुकानें शिफ्ट करने की माँग क्यों की है?
दक्षिण रेलवे ने यात्री सुरक्षा को आधार बनाते हुए यह माँग की है। पटरियों के पास मौजूद शराब दुकानों के कारण नशे में लोगों द्वारा पटरियाँ पार करना, प्लेटफॉर्म पर सोना, महिला यात्रियों से छेड़छाड़ और रेलवे संपत्ति से छेड़छाड़ जैसी घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं।
कितनी और कहाँ-कहाँ की टैसमैक दुकानों को शिफ्ट करने को कहा गया है?
कुल 43 टैसमैक दुकानों की पहचान की गई है, जो चेन्नई, तिरुवल्लूर, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, रानीपेट और कांचीपुरम जिलों में स्थित हैं। विशेष रूप से रॉयपुरम, कोरुकुपेट, पेराम्बुर, अवादी और एन्नोर जैसे स्थानों को चिह्नित किया गया है।
टैसमैक दुकानें शिफ्ट करने में क्या बाधाएँ हैं?
टैसमैक अधिकारियों के अनुसार, वैकल्पिक स्थान खोजना आसान नहीं है क्योंकि कई प्रस्तावित जगहों पर स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई है। इसके अलावा शराब दुकानों और रेलवे ट्रैक के बीच न्यूनतम दूरी को लेकर कोई राष्ट्रीय कानूनी नियम भी नहीं है।
क्या तमिलनाडु सरकार ने इस दिशा में कोई कदम उठाए हैं?
हाँ, टीवीके सरकार ने हाल ही में शिक्षण संस्थानों, पूजा स्थलों और बस स्टैंड के 500 मीटर के दायरे में आने वाले 717 टैसमैक आउटलेट बंद किए हैं। रेलवे प्रतिष्ठानों के पास भी अब तक कम से कम सात दुकानें बंद या स्थानांतरित की जा चुकी हैं।
क्या पूरे देश में रेलवे ट्रैक के पास शराब दुकानों की कोई समस्या है?
रिपोर्टों के अनुसार देश भर में 17,000 से अधिक शराब की दुकानें रेलवे ट्रैक के निकट स्थित हैं। इस दूरी को लेकर कोई राष्ट्रीय दिशानिर्देश नहीं है और कई राज्य इस विषय पर नियम बनाने पर विचार कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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