मराठी स्कूल बंद नहीं होने देंगे, 'अकोला पैटर्न' पूरे महाराष्ट्र में लागू करेंगे: सुजात अंबेडकर
सारांश
मुख्य बातें
वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा नेता सुजात अंबेडकर ने 10 अक्टूबर 2026 को सतारा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र सरकार पर मराठी माध्यम के स्कूलों को बंद करने और शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में एक भी मराठी स्कूल बंद नहीं होना चाहिए और अकोला जिले में अपनाए गए शैक्षणिक मॉडल को पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जाना चाहिए।
अकोला पैटर्न: क्या है यह मॉडल
सुजात अंबेडकर ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में अकोला जिले में 80 नए स्कूल शुरू किए गए हैं। उनके अनुसार, स्कूलों को बंद करने के बजाय उनकी संख्या बढ़ाना और शैक्षणिक सुविधाओं को सुदृढ़ करना ही सही नीति है। इस मॉडल में ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए जिम और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु अध्ययन केंद्र भी विकसित किए गए हैं, जिससे वे पुलिस भर्ती, वन विभाग की भर्तियों और अन्य सरकारी परीक्षाओं में भाग ले सकें।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई जिलों में कम नामांकन का हवाला देकर सरकारी मराठी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इससे ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा तक पहुँच और सीमित हो जाएगी।
उम्मीदवारों की घोषणा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वंचित बहुजन आघाड़ी ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी की। पार्टी ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. इकबाल चंदूलाल शेख और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. सोमनाथ सालुंखे को उम्मीदवार बनाया है।
सुजात अंबेडकर ने प्रो. सालुंखे के प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्र के शैक्षणिक एवं शोध अनुभव का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है जो शिक्षा क्षेत्र की वास्तविक जमीनी समस्याओं से भली-भाँति परिचित हैं।
शिक्षकों की समस्याएँ और सरकार पर सवाल
सुजात अंबेडकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिक्षक भर्ती में आने वाली बाधाओं, वेतन विसंगतियों, सेवानिवृत्त शिक्षकों की लंबित पेंशन और शिक्षक सेवक व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि शिक्षकों को न्याय दिलाना और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिक्षक सेवक व्यवस्था लंबे समय से विवादों में रही है, जहाँ नियमित शिक्षकों की तुलना में कम वेतन पर काम करने वाले शिक्षकों की स्थायित्व की माँग अनसुनी रही है।
शिक्षा के व्यावसायीकरण पर चिंता
सुजात अंबेडकर ने चेतावनी दी कि शिक्षा को केवल व्यावसायिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार मराठी माध्यम के स्कूल न केवल भाषा और संस्कृति के वाहक हैं, बल्कि ये समाज के वंचित और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों की शिक्षा की रीढ़ भी हैं। उन्होंने ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों के बीच अवसरों की खाई को पाटने के लिए ठोस सरकारी हस्तक्षेप की माँग की।
आगे की राजनीतिक दिशा
वंचित बहुजन आघाड़ी का कहना है कि उसके उम्मीदवार महाराष्ट्र विधान परिषद में शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र इस पर रहेगी कि ये उम्मीदवार शिक्षा-केंद्रित राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाते हैं और क्या 'अकोला पैटर्न' राज्यव्यापी नीति बहस का हिस्सा बन सकता है।