अजमेर महिला जेल से बंदियों को घर ले जाने वाली निलंबित जेलर दिव्या चौधरी कोटा से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान पुलिस ने 6 अक्टूबर 2026 को अजमेर महिला सुधार गृह से दो महिला बंदियों को कथित तौर पर अनधिकृत रूप से बाहर ले जाने के मामले में फरार चल रही तत्कालीन जेलर दिव्या चौधरी को कोटा जिले के एक फ्लैट में छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया। 37 वर्षीया दिव्या चौधरी 5 अगस्त 2026 को मामला दर्ज होने के बाद से फरार थीं और गिरफ्तारी से बचने के लिए बिना सूचना दिए अपने मुख्यालय से चली गई थीं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस जांच और तकनीकी साक्ष्यों के अनुसार यह मामला 12 जुलाई 2026 का है, जब दिव्या चौधरी ने महिला प्रहरी सोनिया चौधरी के साथ मिलकर अजमेर महिला सुधार गृह के मुख्य द्वार पर तैनात कर्मचारियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया। आरोप है कि दोनों ने ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों को धमकाकर दो बंदियों — आजीवन कारावास की सजा काट रही किरण उर्फ सेठा और विचाराधीन कैदी सना — को जेल से बाहर निकाल लिया।
इसके बाद दिव्या चौधरी कथित तौर पर दोनों बंदियों को एआरजी सिटी स्थित अपने निजी आवास पर ले गईं। पुलिस के अनुसार यह कदम निजी लाभ के उद्देश्य से उठाया गया, हालांकि इसकी पूरी जांच अभी जारी है।
एफआईआर और फरारी
अजमेर केंद्रीय कारागार के प्रहरी महीपाल मंगलोडा की शिकायत पर 5 अगस्त 2026 को सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया। एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपी जेलर कथित तौर पर बिना किसी सूचना के अपने मुख्यालय से चली गईं और गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबे समय तक फरार रहीं।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि आरोपी जेलर पर न केवल पद का दुरुपयोग करने, बल्कि सहयोगियों के साथ मिलकर जेल सुरक्षा कर्मचारियों को धमकाने का भी आरोप है — जो मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।
जांच टीम और तकनीकी साक्ष्य
मामले की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़ और सर्किल अधिकारी शिवम जोशी की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम का नेतृत्व सिविल लाइंस थाना प्रभारी शंभू सिंह ने किया।
जांच में सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, सरकारी रिकॉर्ड और साइबर सेल की सहायता ली गई। टीम में एएसआई मोइनुद्दीन, साइबर सेल एएसआई आशीष, हेड कांस्टेबल परिणा बानो, कांस्टेबल ऋषवेंद्र सिंह तथा साइबर सेल कांस्टेबल अभय सिंह शामिल थे।
पुलिस अधीक्षक का बयान
अजमेर के पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल ने बुधवार को बताया कि आरोपी जेलर पर अपने पद का दुरुपयोग करने, सहयोगियों के साथ मिलकर जेल सुरक्षाकर्मियों को धमकाने और दो महिला कैदियों को जेल से बाहर ले जाने का आरोप है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार जेलर से गहन पूछताछ की जा रही है।
आगे की जांच
पुलिस अब मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। दोनों महिला बंदियों को जेल से बाहर ले जाने के पीछे की मंशा और पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को उजागर करने का प्रयास जारी है। भीलवाड़ा निवासी दिव्या चौधरी की गिरफ्तारी से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में जांच में और अहम खुलासे हो सकते हैं।