अजमेर महिला जेल से बंदी बाहर ले जाने की आरोपी निलंबित जेलर दिव्या चौधरी कोटा से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान पुलिस ने 6 अक्टूबर 2026 को अजमेर महिला सुधार गृह से दो महिला कैदियों को कथित तौर पर बिना अनुमति बाहर ले जाने के मामले में फरार चल रही निलंबित जेलर दिव्या चौधरी (37 वर्ष) को कोटा जिले के एक फ्लैट पर छापा मारकर गिरफ्तार कर लिया। अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल ने बुधवार, 7 अक्टूबर को इस गिरफ्तारी की पुष्टि की।
मामले का मुख्य घटनाक्रम
पुलिस जांच और तकनीकी साक्ष्यों के अनुसार यह घटना 12 जुलाई 2026 को हुई थी। उस समय अजमेर महिला सुधार गृह की प्रभारी जेलर रहीं दिव्या चौधरी — जो भीलवाड़ा की निवासी हैं — ने कथित रूप से महिला प्रहरी सोनिया चौधरी के साथ मिलकर दो कैदियों — किरण उर्फ सेठा (आजीवन कारावास की सजायाफ्ता) और सना (विचाराधीन कैदी) — को जेल से बाहर निकाला।
आरोप है कि दोनों ने मुख्य द्वार पर तैनात कर्मचारियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया और ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों को धमकाया। इसके बाद दिव्या चौधरी दोनों बंदियों को कथित तौर पर अपने एआरजी सिटी स्थित निजी आवास पर ले गईं, जो पुलिस के अनुसार निजी लाभ के लिए किया गया।
FIR और फरारी
इस मामले में अजमेर केंद्रीय कारागार के प्रहरी महीपाल मंगलोडा की शिकायत पर 5 अगस्त 2026 को सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी जेलर कथित तौर पर बिना सूचना दिए अपने मुख्यालय से चली गईं और गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार रहीं।
गौरतलब है कि एक सरकारी अधिकारी का इस तरह फरार होना और दो माह से अधिक समय तक कानून की पकड़ से बाहर रहना, राज्य की जेल व्यवस्था में गंभीर प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करता है।
विशेष टीम और तकनीकी जांच
आरोपी की तलाश के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़ और सर्किल अधिकारी शिवम जोशी की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई। जांच में सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, सरकारी रिकॉर्ड और साइबर सेल की सहायता ली गई।
इस टीम का नेतृत्व सिविल लाइंस थाना प्रभारी शंभू सिंह ने किया। टीम में एएसआई मोइनुद्दीन, साइबर सेल एएसआई आशीष, हेड कांस्टेबल परिणा बानो, कांस्टेबल ऋषवेंद्र सिंह और साइबर सेल कांस्टेबल अभय सिंह शामिल थे। अंततः 6 अक्टूबर को कोटा के एक फ्लैट पर छापेमारी कर दिव्या चौधरी को पकड़ा गया।
आरोप और कानूनी पहलू
पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाल के अनुसार, आरोपी जेलर पर अपने पद का दुरुपयोग करने, सहयोगियों के साथ षड्यंत्र रचने, जेल सुरक्षाकर्मियों को धमकाने और दोनों महिला कैदियों को अनधिकृत तरीके से बाहर ले जाने के गंभीर आरोप हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जेल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर बहस तेज है।
आगे की जांच
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार जेलर से गहन पूछताछ जारी है। जांच एजेंसी मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका और दोनों महिला बंदियों को जेल से बाहर ले जाने के पीछे की मंशा की भी छानबीन कर रही है। यह मामला अजमेर महिला जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।