स्वप्ना बर्मन की तृणमूल कांग्रेस में उम्मीदवारी पर संकट: नई चुनौतियाँ सामने आईं
सारांश
Key Takeaways
- स्वप्ना बर्मन की तृणमूल कांग्रेस से उम्मीदवारी पर संकट।
- अनुशासनात्मक मामलों की जटिलताएँ।
- रेलवे में स्वप्ना के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक जांच।
कोलकाता, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज विधानसभा क्षेत्र से एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता और तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार स्वप्ना बर्मन की उम्मीदवारी पर संकट के बादल छा गए हैं। स्वप्ना के खिलाफ लंबित अनुशासनात्मक मामलों से जुड़ी नई चुनौतियाँ सामने आई हैं।
स्वप्ना रेलवे के अलीपुरद्वार डिवीजन में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। अदालत ने पहले उन्हें अनुशासनहीनता स्वीकार करने और रेलवे को पत्र सौंपने का निर्देश दिया था। हालाँकि, गुरुवार को यह स्पष्ट हुआ कि स्वप्ना ने ऐसा करने के बजाय इस्तीफा दे दिया, जिससे मामला और भी जटिल हो गया।
सूत्रों के अनुसार, स्वप्ना ने रेलवे अधिकारी के पद से इस्तीफा दिए बिना 27 फरवरी को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गई थीं। इसके बाद पार्टी ने उन्हें राजगंज विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार नामित किया। 9 मार्च को रेलवे ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू की, जिसमें उन पर सेवा में रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने का आरोप लगाया गया था।
16 मार्च को स्वप्ना ने अपना इस्तीफा सौंपा, लेकिन विभागीय जांच पहले से चल रही थी, इसलिए रेलवे ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। इस निर्णय के विरोध में स्वप्ना ने कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच में याचिका दायर की। इस मामले की सुनवाई बुधवार को न्यायमूर्ति गौरांग कांत की पीठ के समक्ष हुई।
सुनवाई के दौरान, रेलवे ने अदालत में दलील दी कि स्वप्ना बर्मन के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है, जिसके कारण उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया। हालाँकि, रेलवे ने कहा कि यदि स्वप्ना आरोप स्वीकार कर लें और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले किसी भी लाभ को छोड़ दें, तो उन्हें उचित समय पर आवश्यक क्लीयरेंस जारी किया जाएगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने स्वप्ना को बुधवार शाम 5 बजे तक रेलवे को अपना आरोप स्वीकार करते हुए एक पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
रेलवे का प्रतिनिधित्व कर रहे उप सॉलिसिटर जनरल सुदीप्तो मजूमदार ने बताया, "स्वप्ना बर्मन ने रेलवे को एक पत्र सौंपा था। चूंकि वह पत्र अदालत द्वारा जारी विशिष्ट निर्देशों के अनुरूप नहीं था, इसलिए हमने इस मामले को दोबारा उठाया। न्यायाधीश ने स्वप्ना बर्मन को एक बार फिर रेलवे को एक नया पत्र सौंपने का निर्देश दिया है, जिसमें वह स्पष्ट रूप से अपने कदाचार को स्वीकार करें।"