मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में की पूजा, चढ़ाई 1.6 किलो चांदी की तलवार
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने शुक्रवार, 12 जून को कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर में देवी मूकाम्बिका के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर को 1.6 किलोग्राम वजनी चांदी की तलवार भेंट की। उनका यह दौरा राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोणों से चर्चा में रहा, क्योंकि कर्नाटक में उनके बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं।
मंदिर में आगमन और स्वागत
मुख्यमंत्री विजय नई दिल्ली से एक विशेष विमान द्वारा मंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे और वहाँ से सड़क मार्ग से सीधे कोल्लूर स्थित मंदिर के गेस्ट हाउस गए। पारंपरिक लाल शल्य वस्त्र धारण करने के बाद उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया।
मंदिर अधिकारियों ने उनका पूर्णकुंभ परंपरा के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया और उनकी कलाई पर पवित्र धागा बांधा। मंदिर परिसर के बाहर जमा उनके अनेक प्रशंसकों ने तालियों और जयकारों से उनका अभिवादन किया। हल्की बूंदाबांदी के बावजूद विजय कुछ देर रुककर अपने समर्थकों से मिले।
पूजा का विवरण
कोल्लूर मूकाम्बिका मंदिर के अध्यक्ष बाबू हेगड़े ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय का दर्शन लगभग 20 मिनट तक चला। उन्होंने कहा, 'विजय ने मंदिर को 1.6 किलोग्राम वजनी चांदी की तलवार दान की और अन्य भक्तों की तरह देवी की पूजा की। कोई विशेष संकल्प नहीं था। वे गर्भगृह के सामने खड़े होकर प्रार्थना कर चले गए।' हेगड़े ने यह भी बताया कि दर्शन के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था
विजय के आगमन को देखते हुए कर्नाटक पुलिस ने मंदिर परिसर और उसके आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी थी। कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्यों के पुलिसकर्मियों को मंगलुरु हवाई अड्डे और मंदिर क्षेत्र में तैनात किया गया था। विजय द्वारा पूजा पूर्ण होने तक अन्य श्रद्धालुओं के मंदिर प्रवेश पर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई थी।
कर्नाटक में विजय के बड़े प्रशंसक आधार को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने हवाई अड्डे और मंदिर — दोनों स्थानों पर भारी भीड़ जुटने की आशंका जताई थी, जो सही साबित हुई।
आगे क्या
यह दौरा मुख्यमंत्री विजय की व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक माना जा रहा है। गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का कर्नाटक के एक प्रमुख धार्मिक स्थल पर इस प्रकार का दौरा दोनों राज्यों के सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को भी रेखांकित करता है। आने वाले दिनों में विजय के अन्य धार्मिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों पर नज़र रहेगी।